गालूडीह बायीं नहर में पानी छूठते खुली गुणवत्ता की पोल
हाल में करोड़ों की लागत से बनी थी सात किमी गालूडीह बायीं नहर, पहली बार नहर में पानी छोड़ते ही खुली पोल
गालूडीह : सुवर्णरेखा परियोजना के तहत करोड़ों की लागत से हाल में बनी गालूडीह बायीं नहर में पानी छोड़ते ही गुणवत्ता की पोल खुल गयी. धोरासाई गांव में सीएच 6.030 सीडी के पास नहर ध्वस्त हो गयी. नहर टूटने से धोरासाई और जगन्नाथपुर गांव के करीब दो दर्जन किसानों के करीब दस एकड़ खेत डूब गये हैं. कई किसानों ने रोपनी की थी. धान के पौधे डूब कर बरबाद हो गये. किसानों ने बताया कि अभी रोपनी नहीं की थी. करने की तैयारी है. लेकिन खेत डूबे होने के कारण रोपनी नहीं कर पायेंगे.
इस नहर में 26 जुलाई की शाम को पांच क्यूमेक पानी छोड़ा गया था. उक्त नहर गालूडीह से बहरागोड़ा तक 65 किमी बनेगी. वर्तमान में सात किमी नहर पूरी हुई है, जिसमें ट्रायल के पानी छोड़ा गया था कि नहर ध्वस्त हो गयी. इससे परियोजना के क्योंकि गुणवत्ता की पोल खुल गयी है.
किसानों ने किया विरोध मुआवजे की मांग
नहर टूटने एवं खेत डूबने से किसान परेशान हैं. किसानों ने आज विरोध प्रकट करते हुए मुआवजा की मांग की. जिन किसानों के खेत डूबे में उनमें धारोसाई और जगन्नाथपुर के किसान श्याम चरण मार्डी, गोवर्धन मार्डी, कार्तिक पातर, मंगल हांसदा, ठाकुर प्रसाद मार्डी, रामचंद्र हांसदा, शंकर पातर, साकला हांसदा, साकला टुडू, श्याम चरण टुडू, सालखू हांसदा, प्रदीप पातर, माधव मुर्मू, सुनील टुडू, दीवाकर टुडू आदि शामिल हैं. किसानों ने कहा दस एकड़ से अधिक खेत डूब गये हैं.
मुखिया ने अधीक्षण अभियंता से की शिकायत
बनकांटी पंचायत के मुखिया ठाकुर प्रसाद मार्डी ने किसानों की मांग पर गालूडीह बराज अंचल के अधीक्षण अभियंता आरएन प्रसाद को घटना की जानकारी देते नहर को दुरुस्त करने की और क्षतिपूर्ति देने की मांग की. श्री प्रसाद ने कहा अभियंता की टीम जाकर जांच करेगी.
