देगची में बच्चे को रख पार कराते हैं नदी

Updated at : 14 Jul 2017 4:57 AM (IST)
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देगची में बच्चे को रख पार कराते हैं नदी

जादूगोड़ा : मुसाबनी प्रखंड स्थित जादूगोड़ा यूसिल कंपनी से सटे सांसपुर गांव के बगान टोला के डेढ़ सौ परिवार बुनियादी जरूरतों से जूझ रहे हैं. आलम यह है कि ग्रामीणों को महज कुछ दूरी पर स्थित यूसिल कॉलोनी, स्कूल व अस्पताल जाने के लिए भी जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है. लोग […]

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जादूगोड़ा : मुसाबनी प्रखंड स्थित जादूगोड़ा यूसिल कंपनी से सटे सांसपुर गांव के बगान टोला के डेढ़ सौ परिवार बुनियादी जरूरतों से जूझ रहे हैं. आलम यह है कि ग्रामीणों को महज कुछ दूरी पर स्थित यूसिल कॉलोनी, स्कूल व अस्पताल जाने के लिए भी जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है. लोग बीमार बच्चों को इलाज के लिए देगची में बैठा कर नदी पार कराते हैं. आजादी के सात दशकों बाद भी यह सिलसिला जारी है, जिसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है. ग्रामीण राजू महतो ने बताया कि बरसात के समय गांव में आवागमन पूरी तरह बंद हो जाता है. साप्ताहिक हाट जादूगोड़ा जाने के लिए भी कंधे पर सब्जी व दूध के अलावा बच्चों को भी कंधे पर लाद कर या देगची के सहारे नदी पार कराना पड़ता है.

बीमार लोगों को भी बड़ी मुश्किल से नदी पार कराकर अस्पताल पहुंचाया जाता है.
उन्होंने बताया कि गांव के लोग सब्जियां अथवा गाय के दूध का कारोबार करते हैं. उन्होंने बताया कि ग्रामीणों ने वर्तमान विधायक लक्ष्मण टुडू से भी इसके लिए कई बार गुहार लगायी, लेकिन उन्हें आश्वासन के सिवा आज तक कुछ नहीं मिला. गांव के शिवानंद महतो ने कहा कि कुछ वर्ष पूर्व यूसिल प्रबंधन द्वारा एक नाव दी गयी थी जो अब टूट चुकी है. उन्होंने कहा कि बरसात में उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ती है. नदी पूरी तरह भर जाती है,
जिसमें पानी का बहाव भी तेज हो जाता है, इसके बावजूद ग्रामीणों को उसी मार्ग से आना-जाना करना पड़ता है. वहीं बुजुर्ग महिला फूलन देवी ने कहा कि हम महिलाओं को कहीं भी आने-जाने के लिए सोचना पड़ता है. कभी ट्यूब के सहारे तो कभी तैरकर जादूगोड़ा व अन्य जगह जाना पड़ता है. उन्होंने बताया कि गांव में एकमात्र पगडंडी है, वह भी जर्जर है. ऐसी स्थिति में गांव के बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है.
एतवारी देवी ने बताया कि गांव माटीगोड़ा पंचायत के अंतर्गत आता है, लेकिन गांव को आज तक किसी सरकारी सुविधा का लाभ नहीं मिल पाया है. उन्होंने कहा कि पहले नदी में पानी नहीं था तो लोग उधर से आसानी से आना-जाना कर लेते थे, लेकिन अब गालूडीह फाटक बंद होने के बाद से नदी में पानी भर गया है, जिससे लोगों को कहीं जाने-आने में परेशानी हो रही है. उसने प्रशासनिक अधिकारियों से ग्रामीणों को इस समस्या से निजात दिलाने की मांग की.
स्कूली बच्चे व मरीज को होती है सबसे ज्यादा परेशानी
बगान टोला के बच्चों को विशेष परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. ग्रामीण बताते हैं कि सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को होती है. नदी पार करने से पहले ही स्कूली बच्चों के जूते एवं ड्रेस कीचड़ में गंदे हो जाते हैं, स्कूल पहुंचने में देर अलग से होती है. यही नहीं, बच्चों को नदी पार कराने के लिए घर के किसी न किसी सदस्य को हमेशा उनके साथ रहना पड़ता है. मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इस बीच यदि किसी की तबीयत बिगड़ने या गर्भवती को प्रसव पीड़ा होने की स्थिति में प्रार्थना और दुआ ही सहारा होते हैं.
इस समस्या के बारे में कोई जानकारी नहीं है. जल्द ही टीम भेजकर पूरी समस्या की जांच कराकर उसका समाधान किया जायेगा.
अमित कुमार, उपायुक्त
12 वर्ष पूर्व बनी सड़क इतनी जर्जर हो चुकी है कि अब इस सड़क पर चलना मुश्किल है. बरसात में कीचड़ युक्त हो जाने से ऑटो चालक नहीं पहुंच पाते है.
कार्तिक हेंब्रम, स्थानीय मुखिया.
इस समस्या से हम अवगत हैं. बगान टोला के ग्रामीणों को अस्थायी व्यवस्था के लिए ड्रम का नाव बनाकर तत्काल उपलब्ध करवाया जाएगा.
डी हांसदा, कार्मिक उप प्रबंधक, यूसिल जादूगोड़ा
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