भाव के भूखे हैं भगवान, सच्चे मन से करें भक्ति : ब्रज किशोरी

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भाव के भूखे हैं भगवान, सच्चे मन से करें भक्ति : ब्रज किशोरी

किशोरी जी ने शुकदेव मुनि द्वारा राजा परीक्षित को सुनाये गये महात्मा विदुर तथा भगवान श्री कृष्ण के बीच हुए संवाद, सृष्टि की उत्पत्ति, मनु एवं सतरूपा प्रसंग तथा भगवान शिव तथा पार्वती के अलौकिक विवाह आदि के प्रसंगों का सरस वर्णन किया.

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प्रतिनिधि, रामगढ़ लखनपुर के नर्मदेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन ब्रज किशोरी जी ने शुकदेव मुनि द्वारा राजा परीक्षित को सुनाये गये महात्मा विदुर तथा भगवान श्री कृष्ण के बीच हुए संवाद, सृष्टि की उत्पत्ति, मनु एवं सतरूपा प्रसंग तथा भगवान शिव तथा पार्वती के अलौकिक विवाह आदि के प्रसंगों का सरस वर्णन किया. कहा कि संसार की सारी वस्तुएं, सारी निधियां भगवान श्री कृष्ण की हैं. भगवान केवल भाव के भूखे हैं. भक्तों से केवल निर्मल हृदय की भक्ति चाहते हैं. कहा कि अभिमानी अहंकारी दुर्योधन के राज प्रसाद व छप्पन भोग को त्याग कर भगवान श्रीकृष्ण महात्मा विदुर की कुटिया में केले के छिलके का भोग लगाने चले जाते हैं. कहा कि ध्रुव पांच वर्ष की उम्र में भगवान को पा सकते हैं, तो फिर हम कैसे पीछे रह सकते हैं. उन्होंने शिव-पार्वती के विवाह प्रसंग का भी विस्तार से वर्णन किया. कलाकारों ने झांकी प्रस्तुत की. श्रीमद् भागवत कथा की संगीत में प्रस्तुति से कथा सुनाने आए श्रोता आह्लादित हो गये.

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