ग्राम प्रधान अपने अधिकारों का करें प्रभावी उपयोग : जॉन सोरेन

जोहार मानव संसाधन विकास केंद्र के सभागार में कार्यशाला के अंतिम दिन झारखंड में पेसा कानून पर विचार-विमर्श किया गया.
दुमका. जोहार मानव संसाधन विकास केंद्र के सभागार में शनिवार को कार्यशाला के अंतिम दिन झारखंड में पेसा कानून पर विचार-विमर्श किया गया. मुख्य वक्ता के रूप में पंचायती राज विभाग के मास्टर ट्रेनर जॉन सोरेन ने पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम, 1996 (पेसा) एवं पंचायत उपबंध झारखंड नियमावली, 2025 के प्रमुख प्रावधानों पर विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने कहा कि 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के तहत संविधान के भाग-9 में पंचायत व्यवस्था को जोड़ा गया है, जो संविधान के अनुच्छेद 244 के खंड (1) के अंतर्गत निहित है. उन्होंने बताया कि झारखंड की पेसा नियमावली को 23 दिसंबर 2025 को विधानसभा से पारित किया गया, जबकि 2 जनवरी 2026 को इसका गजट में अधिसूचना जारी की गयी. उन्होंने कहा कि पंचायत उपबंध झारखंड नियमावली 2025 कुल 17 अध्यायों में विभाजित है. अध्याय-1 में प्रारंभिक प्रावधान, संक्षिप्त नाम एवं परिभाषाएं दी गयी हैं. अध्याय-2 में पारंपरिक ग्राम, ग्राम सभा एवं उनकी सीमाओं के प्रकाशन का उल्लेख है, जबकि अध्याय-3 में पारंपरिक ग्राम सभा की बैठकों से संबंधित प्रावधान शामिल हैं. उन्होंने ग्राम प्रधानों से आह्वान किया कि वे अपने संवैधानिक अधिकारों एवं शक्तियों का समुचित उपयोग करें, ताकि ग्राम सभा को सशक्त बनाकर स्थानीय स्वशासन को मजबूत किया जा सके. कार्यशाला को सफल बनाने में टॉम कावला, दीप्ति मिंज, बलराज, एलेना होरो, सोलोमन, जॉन फेलिक्स, विनय सोरेन, शांतिलता मुर्मू, मीनू मरांडी, जसपाल हांसदा, हूल वैसी सहित पहाड़िया सेवा समिति सठिया, लाहंती संस्था, आदिवासी विकास ट्रस्ट गोड्डा समेत कई संगठनों का महत्वपूर्ण योगदान रहा.
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