दिसंबर में बनकर तैयार हो जायेगा 400 करोड़ से बन रहा 500 बेड वाला पीजेएमसी का हाॅस्पिटल
Published by : ANAND JASWAL Updated At : 13 Oct 2025 7:55 PM
बिजली का काम भी पूरा करा लिया गया है. टेस्टिंग व ट्रॉयल चल रहा है. संवेदक कंपनी को ऑपरेशन थियेटर आदि जो तैयार करने थे, उसके भी उपकरणों को इंस्टाल कराने का काम होने लगा है.
गुड न्यूज. तेज गति से चल रहा अस्पताल के भवन को सजाने का काम
आनंद जायसवाल, दुमकाउपराजधानी के दिग्घी में फूलो झानो मेडिकल कॉलेज के पांच सौ बेड वाले अस्पताल भवन का निर्माण कार्य साल 2025 के दिसंबर महीने में ही पूर्ण हो जायेगा. भवन लगभग तैयार है. इंटीरियर के काम को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है. एक-दूसरे भवन तक पहुंचने के लिए कैंपस के अंदर कनेक्टिंग रोड बन चुका है. बिजली का काम भी पूरा करा लिया गया है. टेस्टिंग व ट्रॉयल चल रहा है. संवेदक कंपनी को ऑपरेशन थियेटर आदि जो तैयार करने थे, उसके भी उपकरणों को इंस्टाल कराने का काम होने लगा है. मेडिकल कालेज के अस्पताल परिसर में 500 बेड के अस्पताल भवन के अलावा कई अन्य भवनों का निर्माण हो चुका है. जैसे इंटर्न हाॅस्टल, नर्स हास्टल, रेजिडेंट डॉक्टर्स हाॅस्टल, मेडिकल सुपरिटेंडेंट रेसिडेंस, डीन रेसिडेंस, ऑडिटोरियम, गेस्ट हाउस, छात्रों के लिए एक्टिविटी सेंटर, 33 केवी सब स्टेशन आदि. हर फ्लोर में पांच-पांच ब्लॉक बनाये गये हैं. अलग-अलग ब्लॉक में विभिन्न विभागों का संचालन किया जायेगा. ग्राउंड फ्लोर में नेत्र विभाग, ऑर्थो, गायनी, महिला एवं पुरुष के लिए 20 बेड का इमरजेंसी वार्ड, 10 बेड का आइसीयू, मेजर और माइनर ओटी, रेडियोलॉजी विभाग में एमआरआइ, सिटी स्कैन, अल्ट्रासोनोग्राफी, पहली मंजिल में गायनोक्लॉजी काम्प्लेक्स, नेत्र विभाग, टीबी एंड चेस्ट, मनोचिकित्सा विभाग, चर्म रोग, आईवीएफ सेंटर, गायनी वार्ड व आइसोलेशन वार्ड, दूसरी मंजिल में 60 बेड का शिशु रोग विभाग, 5-5 बेड का बच्चों के लिए एनआइसीयू व पीआईसीयू, डेंटल, इएनटी, टीबी चेस्ट, मनोचिकित्सा विभाग, तीसरी मंजिल में 60 बेड का मेडिसिन वार्ड, सेंट्रल लैब, चौथी मंजिल में 60 बेड का सर्जरी वार्ड, 5-5 बेड का बीआइसीयू और एसआइसीयू, प्रशासनिक अधिकारियों का कार्यालय, पांचवी मंजिल में ऑर्थो विभाग, 5-5 बेड का आरआइसीयू, डायलिसिस, 12-12 वार्ड का इएनटी विभाग व वार्ड, ऑर्थोमोलॉजी विभाग, 60 बेड का ऑर्थो वार्ड है, जबकि छठी मंजिल में छह मेजर ऑपरेशन थियेटर होंगे.
बिजली-पानी की लचर व्यवस्था से छात्रों को होती है परेशानी
मेडिकल कालेज अस्पताल के संचालन के लिए सबसे अहम जरूरत में स्वास्थ्यकर्मियों के साथ-साथ विशेषज्ञ चिकित्सकों का पदस्थापन तो है ही, बिजली-पानी जैसी बुनियादी चीजों की निर्बाध उपलब्धता भी है. अभी जबकि केवल काॅलेज चल रहा है, तब महकमा बिजली की किल्लत से परेशान रहता है. बिजली न रहने पर सात-आठ मंजिले भवन के लिफ्ट काम करना बंद कर देते हैं. अभी पानी कुरुवा से यहां पहुुंचता है. मामूली अवरोध भी हुआ, तो सैंकड़ों छात्र, फैकल्टी स्टाफ व कर्मियों की परेशानी बढ़ जाती है. कई बार तो टैंकर से जलापूर्ति करवानी भी पड़ी है. अस्पताल अगर वहां चालू हुआ, तो अस्पताल की वजह से चार-पांच हजार लोगों का आवागमन रोजाना होने लगेगा. तब पानी की खपत और बढ़ जायेगी. ऐसे में मेडिकल काॅलेज व अस्पताल के लिए डेडिकेटेड प्रोजेक्ट न बनाया गया, तो अस्पताल चालू करने के बाद पानी की किल्लत को लेकर भारी फजीहत हो सकती है. इसलिए इस दिशा में अभी से ही पहल करने की जरूरत है.
अस्पताल चलाने के लिए चाहिए करोड़ों के उपकरण
फूलो झानो मेडिकल काॅलेज के 500 बेड वाले अस्पताल को चालू कराने के लिए करोड़ों के उपकरण की आवश्यकता होगी, जिसकी खरीद स्थानीय स्तर पर नहीं, विभागीय स्तर पर ही होनी है. ऐसे में इसके लिए आवश्यकता के अनुरूप उपकरणों की सूची तैयार कर उसे खरीदने के लिए भी विभागीय प्रक्रिया शुरू कराने की चुनाैती है. समय पर उपकरण उपलब्ध होंगे, तभी अस्पताल का नया भवन उपयोग में आ पायेगा और चार सौ करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बने मेडिकल काॅलेज अस्पताल का लाभ लोगों को मिल पायेगा.
प्रमंडलीय मुख्यालय के हॉस्पिटलों में हो जायेंगे कुल 900 बेडअभी दुमका के जिला अस्पताल, जिसे फूलो झानो मेडिकल कालेज से टैग किया गया है. वहां लगभग चार सौ बेड का अस्पताल चल रहा है. मेडिकल काॅलेज का अपना अस्पताल चालू हो जाएगा, तो इस जिला अस्पताल के चार सौ बेड के अस्पताल के अलावा प्रमंडलीय मुख्यालय में 500 अतिरिक्त बेड वाले अस्पताल होंगे. यानी यहां सरकारी स्तर पर ही नौ सौ बेड का अस्पताल होगा. यानि प्रबंधन और बेहतर सुविधाएं विभाग ने सुनिश्चित करायी, तो आनेवाले समय में सामान्य इलाज के लिए किसी को बाहर नहीं जाना पड़ेगा.
क्या कहते हैं अधिकारीफूलो झानो मेडिकल काॅलेज के अस्पताल का कार्य लगभग पूरा हो चुका है. बचे हुए काम भी दिसंबर तक पूरा करा लिया जायेगा. कुछ उपकरणों की खरीद भी होनी है, ताकि अस्पताल का संचालन हो सके. उन उपकरणों की आवश्यकता का आकलन करके विभागीय स्तर पर पत्राचार करने को कहा गया है.
अभिजीत सिन्हा, डीसीडिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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