श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह में बही प्रेम और समर्पण की धारा

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श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह में बही प्रेम और समर्पण की धारा

मसलिया प्रखंड के अस्ताजोड़ा गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन भगवान श्रीकृष्ण और देवी रुक्मिणी के दिव्य विवाह महोत्सव का आयोजन किया गया.

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प्रतिनिधि, दलाही मसलिया प्रखंड के अस्ताजोड़ा गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन भगवान श्रीकृष्ण और देवी रुक्मिणी के दिव्य विवाह महोत्सव का आयोजन किया गया. कथा वाचन संजय शास्त्री महाराज ने अपने मुखारविंद से किया. उन्होंने रुक्मिणी के अटूट प्रेम और भक्ति की कथा सुनाई, जिसमें बताया कि रुक्मी द्वारा शिशुपाल से जबरन विवाह की योजना बनाये जाने पर रुक्मिणी ने श्रीकृष्ण को संदेश भेजा. इसके बाद श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी का हरण कर द्वारका ले जाकर दिव्य विवाह संपन्न किया. कथा के माध्यम से शास्त्री महाराज ने कहा कि सच्चा प्रेम, श्रद्धा और अटूट विश्वास ही ईश्वर की प्राप्ति का मार्ग है. रुक्मिणी माता लक्ष्मी का अवतार मानी जाती हैं. यह विवाह उत्सव गृहस्थ जीवन की मर्यादा का प्रतीक है. इस अवसर पर भजन-कीर्तन, मंगल गीत और झांकी दर्शन का आयोजन हुआ. श्रद्धालुओं ने युगल स्वरूप का दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया.

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