कलश यात्रा के साथ श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ शुरू

कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष त्रयोदशी तिथि सोमवार को कथा के पहले दिन 151 महिलाओं ने दुर्गा मंदिर प्रांगण से कथा स्थल तक गाजे-बाजे के बीच कलश शोभा यात्रा निकाली गयी. कलश में जल भरकर मंदिर की परिक्रमा कर कथा स्थल पर पहुंची.
प्रतिनिधि, बासुकिनाथ जरमुंडी में श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ हो गया है. कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष त्रयोदशी तिथि सोमवार को कथा के पहले दिन 151 महिलाओं ने दुर्गा मंदिर प्रांगण से कथा स्थल तक गाजे-बाजे के बीच कलश शोभा यात्रा निकाली गयी. कलश में जल भरकर मंदिर की परिक्रमा कर कथा स्थल पर पहुंची. पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच महिलाओं ने जल से भरे कलश को कथा स्थल पर रखा. कार्यक्रम में पंडित सपन झा ने कथा का वाचन किया. पंडितों ने बताया कि कलश यात्रा को शुभता और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. महिलाएं अपने सिर पर पवित्र जल से भरा कलश धारण करती हैं, जिससे वातावरण भक्तिमय और शुद्ध हो जाता है. इस दौरान भजन-कीर्तन और जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठा. कथा वाचक ने कहा कि जहां पर भगवान प्रतिष्ठित रूप से बैठते हैं. वह मंदिर कहलाता है, जहां शिवजी बैठते हैं वहां शिवालय कहलाता है. जिस तरह से घर के माता-पिता की सेवा का काम घर की लक्ष्मी का है. कथा में यजमान प्रेमशंकर पत्रलेख बने हैं. कथा स्थल पर भजन संध्या का भी आयोजन होगा. अन्य श्रद्धालु तन-मन से लगे हैं. पंडित सुधाकर झा, पंडित नवीन झा एवं पंडित विक्की झा द्वारा धार्मिक अनुष्ठान को नियमपूर्वक संपन्न कराने में लगे हैं. शोभायात्रा के सफल संचालन में ग्रामीण श्यामाकांत पत्रलेख, अमन कुमार, जूगल कुमार आदि लगे थे. — फोटो- कलश शोभा यात्रा में शामिल श्रद्धालु
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