कैंपस : संताली के पाणिनि थे रेव्ह जेरेमिया फिलिप्स : डॉ बसंत

Published by :ANAND JASWAL
Published at :05 Jan 2026 5:45 PM (IST)
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कैंपस : संताली के पाणिनि थे रेव्ह जेरेमिया फिलिप्स : डॉ बसंत

214वीं जयंती तथा संविधान के संताली भाषा में अनुवाद करने वाले विद्वानों के सम्मान में भव्य समारोह का आयोजन किया गया.

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स्नातकोत्तर संताली विभाग ने 214वीं जयंती पर सम्मान समारोह किया आयोजित संवाददाता, दुमका सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय दुमका के स्नातकोत्तर संताली विभाग ने रविवार को संताली भाषा के महान साहित्यकार, शोधार्थी एवं विद्वान रेव्ह जेरेमिया फिलिप्स की 214वीं जयंती तथा संविधान के संताली भाषा में अनुवाद करने वाले विद्वानों के सम्मान में भव्य समारोह का आयोजन किया गया. अध्यक्षता विभागाध्यक्ष डॉ सुशील टुडू ने की. मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के मानविकी संकायाध्यक्ष एवं संताल परगना महिला महाविद्यालय दुमका के प्राचार्य डॉ बसंत कुमार गुप्ता व विशिष्ट अतिथियों में भारतीय संविधान के संताली अनुवाद दल की प्रमुख सदस्य प्राचार्या मॉडल कॉलेज विजयपुर की प्रभारी प्राचार्य डॉ मेरी मारग्रेट टुडू, एसपी महिला कॉलेज दुमका के प्राध्यापक डॉ ईश्वर मरांडी तथा वर्धमान विश्वविद्यालय पश्चिम बंगाल के प्रो तनुश्री सिंह मुर्मू उपस्थित थे. डॉ गुप्ता ने कहा कि रेव्ह जेरेमिया फिलिप्स वास्तव में संताली के पाणिनि थे. उन्होंने बताया कि 1852 में प्रकाशित उनकी पुस्तक एन इंट्रोडक्शन टू द संताली लैंग्वेज संताली भाषा की प्रथम पुस्तक मानी जाती है. स्वागत भाषण में विभागाध्यक्ष डॉ सुशील टुडू ने कहा कि जेरेमिया फिलिप्स का योगदान केवल संताली भाषा तक सीमित नहीं, बल्कि उन्होंने शिक्षा और साहित्य के माध्यम से पूरे संताली समाज को नयी दिशा दी. इसके बाद डॉ अमित मुर्मू ने जेरेमिया फिलिप्स के जीवन, संघर्ष और साहित्यिक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला. प्रो तनुश्री सिंह मुर्मू ने कहा कि संताली भाषा किसी भी दृष्टि से पीछे नहीं है, आवश्यकता केवल उसके संरक्षण और व्यापक उपयोग की है. उन्होंने संविधान के संताली अनुवाद को ऐतिहासिक उपलब्धि बताते कहा कि इससे आमलोगों को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा. डॉ ईश्वर मरांडी ने कहा कि रेव्ह जेरेमिया फिलिप्स संताली के महानतम विद्वानों में से एक थे. एक विदेशी मिशनरी होते हुए भी उन्होंने संताली भाषा और संस्कृति के लिए जो समर्पण दिखाया, वह अद्वितीय है. संताली भाषा का समृद्ध स्वरूप उन्हीं के प्रयासों की देन है. डॉ मेरी मारग्रेट टुडू ने कहा कि भारतीय संविधान का संताली भाषा में अनुवाद होना पूरे संताली समाज के लिए गर्व की बात है. उन्होंने युवाओं से भाषा को आगे बढ़ाने का आह्वान किया. कहा कि साहित्यिक अनुवाद के क्षेत्र में अभी बहुत कार्य शेष है. इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक संताली रीति-रिवाजों के साथ हुई. अतिथियों का स्वागत मंदार की थाप, लोटा-पानी व पारंपरिक विधि से किया गया. इसके बाद वीर शहीद सिदो-कान्हू मुर्मू व रेव्ह जेरेमिया फिलिप्स के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया.

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