धर्मगुरुओं ने संभाली बाल विवाह की रोकथाम की कमान

Updated at : 28 Apr 2025 7:47 PM (IST)
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धर्मगुरुओं ने संभाली बाल विवाह की रोकथाम की कमान

सीडब्ल्यूसी के सदस्य डॉ राजकुमार उपाध्याय ने कहा कि मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार बाल विवाह की रोकथाम व संपूर्ण जिम्मेदारी बाल विवाह निषेध पदाधिकारी की होती है. उन्होंने कहा कि जिले में कहीं भी बाल विवाह की घटना होती हो तो अविलंब इसकी सूचना बाल विवाह निषेध पदाधिकारी को दें.

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अक्षय तृतीया पर जिला बाल संरक्षण इकाई सभागार कक्ष में हुई बैठक, लिये गये कई निर्णय संवाददाता, दुमका जिला बाल संरक्षण इकाई के सभागार कक्ष में बाल कल्याण समिति के प्रभारी अध्यक्ष रंजन कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में अक्षय तृतीया को लेकर बाल विवाह की रोकथाम के लिए बैठक हुई. उन्होंने कहा कि अक्षय तृतीया पर सामान्यतः जिले में कई बाल विवाह को अंजाम दिया जाता है. सीडब्ल्यूसी के सदस्य डॉ राजकुमार उपाध्याय ने कहा कि मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार बाल विवाह की रोकथाम व संपूर्ण जिम्मेदारी बाल विवाह निषेध पदाधिकारी की होती है. उन्होंने कहा कि जिले में कहीं भी बाल विवाह की घटना होती हो तो अविलंब इसकी सूचना बाल विवाह निषेध पदाधिकारी को दें. किशोर न्याय बोर्ड की सदस्या किरण तिवारी ने कहा कि बाल विवाह के विरुद्ध प्रत्येक प्रखंड, पंचायत, विद्यालय एवं ग्राम स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार हो. कानून का उल्लंघन करने वाले पर प्राथमिकी दर्ज की जाये. जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी प्रकाश चंद्र ने बताया कि क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्यरत स्वयंसेवी संस्थाएं ग्राम ज्योति, ग्राम साथी, लोक कल्याण सेवा केंद्र व प्रवाह बाल विवाह की रोकथाम के लिए क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं. बाल हित में उनके द्वारा आवश्यक सहयोग प्रदान किया जा रहा है. ग्राम साथी संगठन के निदेशक देवानंद कुमार ने कहा कि बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए देश में नागरिक समाज संगठनों के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) के दुमका में सहयोगी संगठन ग्राम साथी की ओर से अक्षय तृतीया और शादी-ब्याह के मौसम को देखते हुए बाल विवाहों की रोकथाम के लिए विभिन्न धर्मों के विवाह संपन्न कराने वाले पुरोहितों के बीच चलाये जा रहे जागरुकता अभियान को व्यापक सफलता मिली है. धर्मगुरुओं ने इसकी सराहना करते हुए समर्थन का हाथ बढ़ाया है. कहा कि यह देखते हुए कि कोई भी बाल विवाह किसी पंडित, मौलवी या पादरी जैसे पुरोहित के बिना संपन्न नहीं हो सकता, हमने उन्हें बाल विवाह के खिलाफ अभियान से जोड़ने का फैसला किया. इसके सकारात्मक नतीजों को देखते हुए हम उम्मीद कर सकते हैं. अक्षय तृतीया पर दुमका जिले में एक भी बाल विवाह नहीं होने पायेगा. देवानंद कुमार ने कहा कि अभी भी देश में बाल विवाह के खिलाफ जरूरी जागरूकता की कमी है. ज्यादातर लोगों को यह पता नहीं है कि यह बाल विवाह निषेध अधिनियम (पीसीएमए), 2006 के तहत दंडनीय अपराध है. इसमें किसी भी रूप में शामिल होने या सेवाएं देने पर दो साल की सजा व जुर्माना या दोनों हो सकता है. इसमें बाराती और लड़की के पक्ष के लोगों के अलावा कैटरर, साज-सज्जा करने वाले डेकोरेटर, हलवाई, माली, बैंड बाजा वाले, मैरेज हाल के मालिक और यहां तक कि विवाह संपन्न कराने वाले पंडित और मौलवी को भी अपराध में संलिप्त माना जाएगा और उन्हें सजा व जुर्माना हो सकता है. उन्होंने कहा कि इसीलिए हमने धर्मगुरुओं और पुरोहित वर्ग के बीच जागरूकता अभियान चलाने का फैसला किया क्योंकि यह वो सबसे महत्वपूर्ण वर्ग है जो विवाह संपन्न कराता है. बैठक में जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड हेल्पलाइन, रेलवे चाइल्ड हेल्प डेस्क, संप्रेक्षण गृह के सभी पदाधिकारी व कर्मीगण, ग्राम ज्योति की आभा, मुकेश कुमार दुबे, तारा प्रसाद, प्रवाह के प्रेम कुमार एवं विभिन्न धर्मों के धर्म गुरु-मौलवी ने बाल विवाह की रोकथाम हेतु अपना सुझाव दिया.

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