इनवायरमेंटल क्लियरेंस न मिलने से घाट से बालू उठाव अब तक नहीं हो सका शुरू

Updated at : 29 Mar 2024 11:43 PM (IST)
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इनवायरमेंटल क्लियरेंस न मिलने से घाट से बालू उठाव अब तक नहीं हो सका शुरू

रानीश्वर के बालूघाटों की बंदोबस्ती

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रानीश्वर. प्रखंड के बालूघाटों की बंदोबस्ती की प्रक्रिया चल रही है. जानकारी के अनुसार बालूघाटों की इनवायरमेंटल क्लियरेंस नहीं मिलने से बालूघाटों से बालू उठाव शुरू नहीं हो सका है. मयूराक्षी नदी के सात बालूघाटों की बंदोबस्ती के लिए निविदा आमंत्रित की गयी है. जानकारी के अनुसार बालूघाटों के लिए इनवायरमेंटल क्लियरेंस मिलने पर बालूघाटों से बालू उठाव शुरू हो सकता है. मयूराक्षी नदी के नौरंगी, एकतला, दिगुली, मोहुलपुर, छोटाकामती, कुमिरदहा, बेनियाग्राम बालूघाटों की बंदोबस्ती के लिए निविदा आमंत्रित की गयी थी. मयूराक्षी नदी के जिन बालूघाटों की बंदोबस्ती के लिए निविदा आमंत्रित किया गया था, वे सभी बड़े बालूघाट है. वहीं प्रखंड क्षेत्र के सिद्धेश्वरी नदी के सात छोटी बालूघाटों की पंचायत स्तर से बालू उठाव के लिए स्वीकृति के लिए अंचलाधिकारी द्वारा जिला खनन कार्यालय को सूची भेजी गयी है. पर छोटी बालूघाटों का मामला भी साफ नहीं होने से छोटे बालूघाटों से भी बालू उठाव शुरू नहीं हो सका है. जानकारी के अनुसार वर्ष 2016 में यहां बालूघाटों की बंदोबस्ती हुई थी. उसके बाद से बालूघाटों की बंदोबस्ती नहीं हो सका है. जिसका खामियाजा स्थानीय लोगों को झेलना पड़ रहा है. स्थानीय लोगों को एक भी ट्रैक्टर बालू की आवश्यकता पड़ने पर ब्लैक में बालू खरीदना पड़ रहा है. 600 से 1000 रुपये प्रति ट्रैक्टर मिलने योग्य बालू ब्लैक में 2000 से 3000 रुपये प्रति ट्रैक्टर की दर से मजबूरी में खरीदना पड़ रहा है. एक सीमेंट विक्रेता ने बताया कि बालू के अभाव में सीमेंट की बिक्री भी कम हो गयी है. वहीं सरकारी व गैर-सरकारी कार्य भी प्रभावित हो रहा है. साथ ही काम के अभाव में राजमिस्त्री व मजदूर पलायन कर रहे हैं. बालू के अभाव में बहुत सारे पीएम आवास अधूरा रह गये हैं. इधर हाल ही में अबुआ आवास निर्माण कार्य की स्वीकृति दी गयी है. लाभुकों ने बताया कि बालू उपलब्ध नहीं हो पाने से आवास निर्माण कार्य भी शुरू नहीं कर पायेंगे. पिछले कई सालों से यहां बालू के लिए हाहाकार मचा है. उधर मयूराक्षी नदी का बालू नदी में पानी के साथ बहकर बंगाल चला जाता है. झारखंड के बालू से बंगाल के बालू माफिया मालामाल हो रहे हैं.

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