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नैक एक्रीडिटेशन नहीं कराने की वजह से अनुदान की राशि पाने से वंचित रह जा रहे अधिकांश संबद्ध कॉलेज

Updated at : 07 Dec 2024 10:42 PM (IST)
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नैक एक्रीडिटेशन नहीं कराने की वजह से अनुदान की राशि पाने से वंचित रह जा रहे अधिकांश संबद्ध कॉलेज

फारमेट बदलने से एसकेएमयू भी सकेंड साइकिल करा पाने में रहा विफल

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आनंद जायसवाल, दुमकासिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय नैक से सकेंड साइकिल का एक्रीडिटेशन करा पाने में अब तक विफल रहा है. हालांकि विश्वविद्यालय ने सकेंड साइकिल की पूरी तैयारी कर रखी है, पर इससे संबंधित ब्योरा उपलब्ध कराने के फारमेट बदल जाने से विश्वविद्यालय को इसमें थोड़ा वक्त और लग रहा है. विश्वविद्यालय की तरह ही कई काॅलेज भी इस मामले में बेहद फिसड्डी साबित हो रहे हैं. नैक एक्रीडिटेशन नहीं रहने से कालेजों का विकास प्रभावित है और संस्थान की आधारभूत संरचना, पठन-पाठन के स्तर आदि का मूल्यांकन नहीं हो पाता है. सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय का नैक एक्रीडिटेशन 2018 में प्राप्त हुआ था. विभिन्न क्राइटेरिया में तब यह विश्वविद्यालय बेहद पिछड़ा था, रिसर्च के काम लगभग ठप थे, इनोवेशन व एक्सटेंशन के लिए भी अच्छे अंक विवि को तब प्राप्त नहीं हुए थे. लिहाजा विश्वविद्यालय को तब केवल 1.61 सीजीपीए ही अंक प्राप्त हुआ था, जिसके आधार पर विश्वविद्यालय को सी ग्रेड ही प्राप्त हो सका था. इस ग्रेडिंग को 2017 से प्रभावी बताया गया था. कायदे से एक्रीडिटेशन तीन साल के लिए दिया जाता है. यानी यह एक्रीडिटेशन अभी विवि का एक्सपायर कर चुका है. कुछ को छोड़ दिया जाये, तो विश्वविद्यालय के अधिकांश अंगीभूत व संबद्ध महाविद्यालय सकेंड साइकिल तो दूर अब तक एक्रीडिटेशन ही प्राप्त नहीं कर सके हैं.

तीन-तीन साल बाद सुधर सकता है ग्रेडिंगतीन-तीन साल के साइकिल में फिर से नैक की वहीं प्रक्रिया अपनानी होती है. यानी एक्रीडिटेशन के चौथे साल में सकेंड साइकिल में विवि या काॅलेज शैक्षणिक गुणवत्ता, अपनी आधारभूत संरचना, शैक्षणिक स्तर, मानव संसाधन, शोध, बेस्ट प्रैक्टिसेस आदि में ग्रेडिंग को सुधार कर सकता है. मिली जानकारी के मुताबिक वर्तमान समय में मयुराक्षी ग्रामीण महाविद्यालय रानीश्वर, संत जेवियर्स काॅलेज महारो, मधुस्थली बीएड काॅलेज मधुपुर व चाणक्या काॅलेज ऑफ टीचर्स एजुकेशन, दुमका इंजीनियरिंग काॅलेज, डीपसर देवघर जैसे संस्थान ही नैक से अभी एक्रीडिएट हैं.

ग्रेड प्वाइंट-सीजीपीए-ग्रेड स्टेटस

3.51 – 4.00 A एक्रीडिटेड

3.26 – 3.50 A एक्रीडिटेड

3.01 – 3.25 A एक्रीडिटेड

2.76 – 3.00 B एक्रीडिटेड

2.51 – 2.75 B एक्रीडिटेड

2.01 – 2.50 B एक्रीडिटेड

1.51 – 2.00 C एक्रीडिटेड

<= 1.50 D नॉट एक्रीडिटेडवित्त रहित शैक्षणिक संस्थानों के लिए राज्य सरकार ने अनुदान के लिए कर रखा है प्रावधान

झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा झारखंड राज्य वित्तीय रहित शैक्षणिक संस्थान (अनुदान) की संशोधित नियमावली 2023 के तहत सामान्य स्तर के महाविद्यालयों के लिए न्यूनतम ए ग्रेड रहने पर 500 छात्र रहने पर प्रतिमाह 12 लाख रुपये, बी ग्रेड के लिए प्रतिमाह आठ लाख, सी ग्रेड के लिए चार लाख रुपये व ग्रेडिंग नहीं रहने पर महज दो लाख रुपये के अनुदान का प्रावधान किया है. 501 से 1000 छात्र रहने पर ए ग्रेड में 15 लाख, बी ग्रेड पर 10 लाख, सी ग्रेड पर पांच लाख व एक्रीडिएशन न रहने पर ढाई लाख रुपये ही अनुदान का प्रावधान किया गया है. 1001 से 2000 रहने पर राशि क्रमश: 18 लाख, 12 लाख, छह लाख एवं तीन लाख रुपये है, जबकि 2001 या इससे ऊपर छात्र संख्या रहने पर ए ग्रेड में प्रतिमाह तीस लाख, बी ग्रेड में बीस लाख, सी ग्रेड में दस लाख रुपये तथा ग्रेडिंग न रहने पर महज पांच लाख रुपये का अनुदान दिया जाना है. अगर विज्ञान संकाय की पढ़ाई नहीं होती, तो 20 प्रतिशत राशि कम ही मिलेगी. दुमका के ही एएन काॅलेज सकेंड साइकिल नहीं करा सकी है, जिस वजह से उसे नौ हजार से अधिक छात्र रहने पर भी महज पांच लाख रुपये प्रतिमाह का अनुदान मिल पाया. यानी पूरे साल के महज साठ लाख रुपये काॅलेज को बी ग्रेड पहले मिला था. अगर वही ग्रेड भी होता, तो यह अनुदान की राशि साठ लाख की जगह दो करोड़ 40 लाख रुपये प्राप्त हुई होती. ठीक इसके विपरीत मयुराक्षी ग्रामीण महाविद्यालय रानीश्वर ने सकेंड साइकिल में बी ग्रेड हासिल कर चुका है, ऐसे में जहां उस काॅलेज को पिछले साल महज साठ लाख रुपये का अनुदान मिला था, वहां इस बार उसे चार गुणा यानी दो करोड़ चालीस लाख रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ है.

क्या कहते हैं कुलपति

विश्वविद्यालय प्रशासन नैक के सकेंड साइकिल के लिए पूरी तरह तैयारी कर चुका था. अब इसके फारमेट में बदलाव कर दिया गया है. हम सभी की कोशिश है कि कार्य को हम जनवरी में प्राथमिकता के साथ पूरा करा लें.

प्रो डॉ बिमल प्रसाद सिंह, कुलपति

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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