गड्ढों में डूबी दुमका-गोविंदपुर सड़क,पानी के नीचे छिपा ‘हादसों का जाल’
गोबिंदपुर-साहिबगंज रोड में विजयपुर पुल से लेकर फूलो झानो चौक के बीच सड़क की बदहाली दर्शाती तस्वीरें | Prabhat Khabar Network
दुमका-साहिबगंज सड़क पर सैकड़ों गड्ढे बने तालाब, वाहन चालकों के लिए 'मौत का कुआं'. जानिए क्या है पूरा मामला और यात्रियों की सुरक्षा का हाल.
दुमका- दुमका-गोविंदपुर-साहिबगंज मुख्य सड़क की बदहाली इन दिनों राहगीरों और वाहन चालकों के लिए बड़ी परेशानी का सबब बनी हुयी है. सड़क पर जगह-जगह बने सैकड़ों छोटे-बड़े गड्ढे बारिश के पानी से भरकर तालाब का रूप ले चुके हैं. स्थिति यह है कि कई जगह सड़क और गड्ढे के बीच अंतर करना भी मुश्किल हो गया है. पानी से लबालब गड्ढों के कारण वाहन चालकों को उनकी गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे हर पल दुर्घटना की आशंका बनी रहती है.
इस मार्ग पर भारी वाहनों की लगातार आवाजाही सड़क की स्थिति को और भयावह बना रही है. दिन-रात ट्रक और अन्य भारी वाहनों के गुजरने से पहले से क्षतिग्रस्त सड़क लगातार टूटती जा रही है. भारी वाहनों के पहियों के दबाव से गड्ढे चौड़े और गहरे होते जा रहे हैं. बारिश का पानी इन गड्ढों में जमा होने के बाद स्थिति और गंभीर हो जाती है.
विजयपुर से फूलो झानो चौक तक सबसे खराब स्थिति
इस मार्ग पर विजयपुर से लेकर फूलो झानो चौक तक सड़क की स्थिति बेहद खराब है. यहां सैकड़ों गड्ढों से बचते हुए वाहन चालकों को बार-बार वाहन दायें-बायें करना पड़ता है. इस कठिन हिस्से को पार करने के बाद भी परेशानी खत्म नहीं होती. श्रीअमड़ा, कोरैया, गुहियोजारी, काठीकुंड चौक, जमनी के आगे दलाही काटापहाड़ तथा गोपीकांदर इलाके में रामपुर छत्तरचुंआ के पास भी सड़क की हालत बेहद खराब है.
इन इलाकों में कोयला लदे हाइवा का परिचालन भी लगातार जारी रहता है. भारी वाहनों की आवाजाही से सड़क पर दबाव बढ़ रहा है और गड्ढे लगातार गहरे होते जा रहे हैं.
छोटे वाहनों को नुकसान, भारी वाहनों के पलटने का खतरा
सड़क की बदहाली का सबसे अधिक खामियाजा छोटे वाहन चालकों को भुगतना पड़ रहा है. गड्ढों से बचकर निकलने के दौरान वाहनों का संतुलन बिगड़ने के साथ टायर, पहिया और अन्य हिस्सों के क्षतिग्रस्त होने का डर बना रहता है. दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह रास्ता और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है.

वहीं, बड़े और भारी वाहनों के लिए खतरा अलग है. पानी से भरे गहरे गड्ढों में अचानक पहिया जाने पर वाहन असंतुलित हो सकता है. खासकर बारिश और कम दृश्यता के दौरान भारी वाहनों के पलटने की आशंका बनी रहती है. सड़क पर यातायात का दबाव देखते हुए यह स्थिति गंभीर चिंता का विषय है.
कांवरिया वाहनों की बढ़ी आवाजाही से चिंता और बढ़ी
सावन के महीने में इस मार्ग पर कांवरिया वाहनों की आवाजाही भी काफी बढ़ गई है. देवघर और बासुकिनाथ में पूजा-अर्चना के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु मलूटी, तारापीठ, साहिबगंज, मालदा और कोलकाता की ओर जाते हैं.
कांवरिया वाहनों के अलावा इस रूट पर बस, ट्रक, यात्री वाहन और निजी चारपहिया वाहनों की भी लगातार आवाजाही होती है. ऐसे में सड़क के गड्ढे महज आवागमन की परेशानी नहीं, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन गये हैं.
रात के समय स्थिति और भी खराब हो जाती है. पानी से भरे गड्ढे दूर से दिखाई नहीं देने के कारण चालक अचानक ब्रेक लगाने या वाहन मोड़ने को मजबूर हो जाते हैं. इससे दुर्घटना की आशंका और बढ़ जाती है.
तत्काल राहत के लिए स्टोन डस्ट डालकर भरने की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की स्थायी मरम्मत होने तक तत्काल राहत के लिए बड़े गड्ढों में स्टोन डस्ट डालकर उन्हें भरना जरूरी है. इससे गड्ढों की गहराई कम होगी और वाहन चालकों को कुछ राहत मिल सकेगी. इसके साथ ही सड़क पर जमा बारिश के पानी की निकासी की व्यवस्था भी की जानी चाहिये.
लोगों ने संबंधित विभाग से विजयपुर से श्रीअमड़ा चौक तक सड़क का विशेष निरीक्षण कराने, सभी बड़े गड्ढों को चिह्नित करने और तत्काल मरम्मत कराने की मांग की है.

कई महत्वपूर्ण धार्मिक और व्यावसायिक केंद्रों को जोड़ता है मार्ग
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मार्ग देवघर-बासुकिनाथ के बाद संताल परगना के कई महत्वपूर्ण धार्मिक और व्यावसायिक केंद्रों को जोड़ता है. ऐसे में सड़क की बदहाली को नजरअंदाज करना यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ क्षेत्र के आवागमन के लिए भी गंभीर समस्या पैदा कर सकता है. लोगों ने संबंधित विभाग से जल्द से जल्द ठोस पहल कर सड़क की मरम्मत कराने की मांग की है.
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