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जरमुंडी नीचे बाजार स्थित प्राचीन दुर्गा मंदिर में पूजा का 350 साल पुराना इतिहास

Updated at : 23 Sep 2025 11:56 PM (IST)
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जरमुंडी नीचे बाजार स्थित प्राचीन दुर्गा मंदिर में पूजा का 350 साल पुराना इतिहास

चीनी से बने बताशा का यहां मुख्य रूप से भोग लगाया जाता है. 22 मौजा की सहयोग से सामूहिक पूजा यहां होती है.

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बासुकिनाथ. जरमुंडी के नीचे बाजार में स्थित प्राचीन दुर्गा मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है. सिंह समाज के लोगों ने खरवा गांव से माता को लाकर यहां स्थापित किया था. यह मंदिर लगभग 350 वर्षों पुराना है. मंदिर में पूजा की तैयारियां जोर-शोर से की जा रही हैं. पहले यह मंदिर खपरैल की छत और मिट्टी की दीवारों वाला था, जिसमें हजारों लोग पूजा-अर्चना करते थे. समय के साथ-साथ यहां भव्य मंदिर का निर्माण हुआ है, और मार्बल टाइल्स द्वारा इसे आकर्षक रूप दिया गया है. ग्रामीण पप्पू सिंह, कामेश्वर सिंह, बादल गण, दिलीप गण आदि ने बताया कि प्रखंड के खरवा गांव स्थित मां के मंदिर से मां दुर्गा का कलश लाकर यहां प्राण प्रतिष्ठा की गई थी. तब से इस मंदिर में भक्तों की भीड़ पूजा-अर्चना के लिए लगी रहती है. यहां मुख्य रूप से चीनी से बने बताशा का भोग लगाया जाता है. दूर-दूर से भक्त मन्नत मांगने इस मंदिर में आते हैं. सप्तमी से लेकर दशमी तक सैकड़ों लोगों की भीड़ मंदिर प्रांगण में जुटती है. अष्टमी को रात्रि जागरण का आयोजन किया जाता है. लगभग 1977-78 में ग्रामीणों के सकारात्मक प्रयास से इस मंदिर का पुनर्निर्माण कराया गया था. नवमी के दिन सैकड़ों की संख्या में पाठा की बलि दी जाती है, जबकि दशमी के दिन भव्य मेला होता है, जिसमें हजारों की भीड़ जुटती है. आदिवासी समाज पारंपरिक तरीके से पूजा के दिन मंदिर प्रांगण में सामूहिक नृत्य भी करता है.

22 मौजा के करीब 50 गांवों के लोग करते हैं पूजा-अर्चना :

माता के इस प्राचीन मंदिर में 22 मौजा के करीब 50 गांवों के लोग मिलकर माता दुर्गा की पूजा-अर्चना करते हैं. चैत महीने में भी यहां भव्य काली पूजा आयोजित होती है. पूजा के सफल संचालन के लिए समिति के दर्जनों सदस्य सक्रिय हैं. मंदिर में विद्युत की आकर्षक सजावट की जा रही है. इस बार पूजा के लिए पांच लाख रुपये से अधिक का बजट निर्धारित किया गया है. पूजा में भव्यता लाने के लिए सुचित नारायण सिंह, विक्रम सिंह, लाल सिंह, प्रकाश सिंह आदि संगठित होकर काम कर रहे हैं. इस प्रकार, यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि सामूहिक मिलन का भी आदर्श स्थल है, जहां ग्रामीण आज भी अपनी परंपराओं और विश्वासों को जीवित रखे हुए हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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RAKESH KUMAR

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RAKESH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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