दुमका में बारिश का मतलब बिजली-पानी की आपूर्ति ठप

Updated at : 26 May 2017 5:29 AM (IST)
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दुमका में बारिश का मतलब बिजली-पानी की आपूर्ति ठप

विडंबना. कहने को सिर्फ उपराजधानी, हल्की आंधी-बारिश से ही बिगड़ जाती है शहर की सूरत 30-30 रुपये में पानी का जार खरीदने को लोग विवश दुमका : उपराजधानी दुमका में हल्की आंधी-बारिश लोगों को रुला जाती है. आंधी-बारिश आयी, मतलब बिजली गयी और उसके बाद जलापूर्ति दो-तीन दिनों के लिए ठप. यह आम बात हो […]

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विडंबना. कहने को सिर्फ उपराजधानी, हल्की आंधी-बारिश से ही बिगड़ जाती है शहर की सूरत

30-30 रुपये में पानी का जार खरीदने को लोग विवश
दुमका : उपराजधानी दुमका में हल्की आंधी-बारिश लोगों को रुला जाती है. आंधी-बारिश आयी, मतलब बिजली गयी और उसके बाद जलापूर्ति दो-तीन दिनों के लिए ठप. यह आम बात हो चुकी है. 10 मिनट की बारिश किसी इलाके के लिए 10-20 घंटे तक बिजली गुल करके चली जाती है, जबकि शहरी जलापूर्ति को दो-तीन दिनों के लिए.
दुमका के लगभग सात हजार वैध उपभोक्ता पिछले तीन दिनों से पेयजल की आपूर्ति नहीं होने से परेशान हैं. लोगों को मुहल्ले के चापाकल से बाल्टी में भर-भरकर पानी लाना पड़ता है. पीने के लिए पानी का बीस लीटर का जार 30-30 रुपये में भराना पड़ रहा है. वह भी बाजार में उन्हीं को मिल पाता है, जिन्होंने पहले से 150 रुपये में जार खरीदा हुआ है.
सात हजार उपभोक्ता पिछले तीन दिनों से पेयजल की आपूर्ति को लेकर परेशान
दो दिनों में मिली मात्र दो घंटे बिजली
शहरी जलापूर्ति योजना के लिए विद्युत विभाग ने जो तार खींचा है, उसमें हाल के दिनों में कुछ ज्यादा ही फाॅल्ट हो रहे हैं. जिससे विद्युत की आपूर्ति बास्कीचक तक नहीं हो पाती और जलापूर्ति के लिए वहां मोटर तक नहीं चल पाता. 23 मई को 3.38 बजे बिजली गुल हुई थी. 27 घंटे बाद बिजली की आपूर्ति बहाल भी हुई तो महज 2 घंटे तक टिकी. उसके बाद 22 घंटे बाद भी फाॅल्ट ढूंढ़कर उसे सुधारा जा सका है. अंत में पाया गया कि मसलिया फीडर से टैपिंग की हुई जगह पर ही तीन इंसुलेटर पंक्चर हो गये थे.
स्थायी निदान पर नहीं हो रहा काम
शहरी जलापूर्ति के लिए बिजली की आपूर्ति आंधी-बारिश के दौरान भी जारी रहे, इसके लिए अब तक कोई ठोस उपाय नहीं किये गये हैं. वहां विद्युत आपूर्ति के लिए जो कार्य किये गये हैं, उसकी गुणवत्ता पर भी अंगुली उठने लगी हैं. जो खामियां है, उसके निदान पर काम करने की बजाय तत्कालिक उपाय पर ही पहल होती है. इसी लाइन में सबसे अधिक इंसुलेटर का पंक्चर होने और बार-बार फाॅल्ट आने के कारणों की तहत जांच जरूरी है. मिली जानकारी के मुताबिक पिछले तीन सालों में लगभग एक सौ इंसुलेटर बदले जा चुके हैं.
काम नहीं आयी डीसी से लेकर मंत्री तक की बैठक
व्यवस्था में सुधार के लिए जिले के उपायुक्त राहुल कुमार सिन्हा से लेकर स्थानीय विधायक सह कल्याण मंत्री डॉ लोइस मरांडी तक संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दे चुके हैं, बावजूद व्यवस्था सुधरने का नाम नहीं ले रही है. अभी बरसात का मौसम नहीं आया है. यही स्थिति रही, तो बरसात के मौसम में लोगों को इस बार बिजली-पानी दोनों रुलायेगी.
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