संताली साहित्य को संजोने की अपील
Updated at : 12 Apr 2017 5:48 AM (IST)
विज्ञापन

आयोजन. 39वां संताली साहित्य दिवस समारोह में बाबूलाल मरांडी ने की शिरकत दुमका : आदिवासी समाज की पहचान उसकी भाषा, साहित्य, वेशभूषा और उसकी अपनी संस्कृति से है. इन विशिष्टताओं को अगर हमने भुला दिया, तो हमारी पहचान मिट जायेगी. उक्त बातें 39वें संताली साहित्य दिवस पर मंगलवार को एसपी कॉलेज दुमका में आयोजित एक […]
विज्ञापन
आयोजन. 39वां संताली साहित्य दिवस समारोह में बाबूलाल मरांडी ने की शिरकत
दुमका : आदिवासी समाज की पहचान उसकी भाषा, साहित्य, वेशभूषा और उसकी अपनी संस्कृति से है. इन विशिष्टताओं को अगर हमने भुला दिया, तो हमारी पहचान मिट जायेगी. उक्त बातें 39वें संताली साहित्य दिवस पर मंगलवार को एसपी कॉलेज दुमका में आयोजित एक समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने कही. उन्होंने कहा कि संताली भाषा एवं साहित्य समृद्ध है पर इसे और समृद्ध बनाने की जरूरत है. इसके लिए युवा पीढ़ी को भी सजग होना होगा और अपने साहित्य-संस्कृति के विस्तार के लिए प्रयास करते रहना होगा, तभी हम भावी पीढ़ी के लिए इसे अक्षुण्ण रख पायेंगे.
बतौर विशिष्ट अतिथि पूर्व शिक्षा मंत्री प्रदीप यादव ने कहा कि 39 वर्षों से एसपी कॉलेज में छात्र-छात्राओं द्वारा अपने साहित्य-संस्कृति की रक्षा के लिए किया जानेवाला यह प्रयास सराहनीय है.
इससे साहित्य-संस्कृति दोनों सुदृढ़ होगी. उन्होंने कहा कि संताली को जितनी तरजीह अब तक मिलनी चाहिए थी, वह नहीं मिली. उन्होंने हाल ही में जेपीएससी से इस भाषा को दरकिनार किये जाने और सात दिनों के आंदोलन के बाद इसे वापस पुनरस्थापित करने के मुद्दे पर कहा कि यह भाषा केवल बातचीत तक सीमित न रहे, वरन साहित्य सृजना के क्षेत्र में भी क्रांतिकारी पहल हो. उन्होंने कहा कि आज तक सदन में एक भी विधायक ऐसे नहीं हुए, जिन्होंने संताली में अपना भाषण विधानसभा के अंदर रखा हो. श्री यादव ने कहा कि इसे केवल आठवीं अनुसूची में शामिल कर देना काफी नहीं है,
इसकी संपूर्ण मान्यता के लिए युवक-युवतियों को आगे आना होगा तथा इस भाषा को ऑरनामेंटल एजुकेशन से भी आगे ले जाना होगा. कार्यक्रम को विशिष्ट अतिथितियों के रूप में सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय के प्रभारी वीसी डॉ एसएन मुंडा, संताली साहित्यकार भैया हांसदा चासा, चुंडा सोरेन सिपाही, डॉ धुनी सोरेन, प्रो अंजुला मुर्मू आदि ने संबोधित किया. इससे पूर्व दीप प्रज्वलित कर तथा सिदो कान्हू की तस्वीर पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरुआत की गयी.
सांस्कृतिक कार्यक्रमों से छात्र-छात्राओं ने मोहा मन
इस दौरान विभिन्न कल्याण छात्रावासों के साथ-साथ स्कूली बालक-बालिकाओं द्वारा भी रंगारंग कार्यक्रम पेश किया गया. डिसेंट चिल्ड्रेन स्कूल, सेंट पीटर इंगलिश स्कूल रामगढ़, होली फैथ स्कूल आदि के बच्चों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुति से अतिथियों का मन मोह लिया. इससे पूर्व एक स्मारिका दिनीसा साकाम का विमोचन भी किया गया. कार्यक्रम में एसपी कॉलेज के प्राचार्य डॉ गगन कुमार ठाकुर, प्रो प्रशांत, प्रो शर्मिला सोरेन, प्रो एच राय चौधरी, संतोष शील,
रसिक बास्की आदि मौजूद थे. स्मारिका प्रकाशन में श्रीधन हेंब्रम, ठाकुर हांसदा, विश्वजीत बास्की, संदीप बास्की, इमानवेल हेंब्रम, प्यारेलाल बेसरा, सनीलाल हांसदा, राजेंद्र मुर्मू एवं श्याम देव हेंब्रम ने तथा आयोजन को सफल बनाने में अध्यक्ष सुलीश सोरेन, उपाध्यक्ष दोलोरेश हेंब्रम, सचिव प्रमोद बेसरा, उप सचिव मर्सिला सोरेन, कोषाध्यक्ष विमल कुमार टुडू तथा उप कोषाध्यक्ष रंजीत मरांडी की भूमिका अहम रही.
1979 में शुरू हुई थी संताली की पढ़ाई
मोबलीन टुडू ने बताया कि 1979 में एसपी कॉलेज में संताली भाषा की पढ़ायी शुरू हुई थी, तब यह कॉलेज तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय का अंगीभूत महाविद्यालय था. तत्कालीन सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री महादेव मरांडी ने इसकी पहल की थी. तब से ही संताली सांवहेत माहां अर्थात संताली साहित्य दिवस मनाने की परंपरा शुरु हुई, ताकि हम संताली साहित्य सृजना के क्षेत्र में भी आगे बढ़े. श्री टुडू ने बताया कि पहली बार जब पढ़ायी शुरु हो रही थी,
तो संताली में उपाधि वाले एक भी शिक्षक नहीं मिल रहे थे. वैकल्पिक व्यवस्था के रुप में प्रो स्टीफन मरांडी व प्रो स्टेनशिला हेंब्रम ने तब संताली पढ़ाना शुरू किया था. वे दोनों दूसरे भाषा के शिक्षक थे.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




