दुमका के नन्हें फैजान की है गजब की स्मरण शक्ति

Updated at : 12 Apr 2017 5:45 AM (IST)
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दुमका के नन्हें फैजान की है गजब की स्मरण शक्ति

अब तक स्कूल में भी नहीं हुआ दाखिला, दूसरे बच्चों के लिये भी बना हुआ है उदाहरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं आदर्श, मिलने की भी है ललक दुमका : चार साल पहले हरियाणा के करनाल जिले के कोहड़ में जन्मा बालक कौटिल्य पंडित ने अपने गजब की याददाश्त क्षमता का उदाहरण देकर देश में ही […]

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अब तक स्कूल में भी नहीं हुआ दाखिला, दूसरे बच्चों के लिये भी बना हुआ है उदाहरण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं आदर्श, मिलने की भी है ललक
दुमका : चार साल पहले हरियाणा के करनाल जिले के कोहड़ में जन्मा बालक कौटिल्य पंडित ने अपने गजब की याददाश्त क्षमता का उदाहरण देकर देश में ही नहीं पूरे विश्व में सुर्खिया बटोर विशिष्ट पहचान बनायी थी. गुगल ब्वॉय के नाम से कौटिल्य को शोहरत मिली थी और बड़ी-बड़ी हस्तियों ने उसे सम्मानित किया था. ठीक उसी कौटिल्य की राह पर चल पड़ा है दुमका जिले के बघनोचा-राखाबनी का चार साल का बालक मो फैजान. फैजान को सभी देशों की उपराजधानी तो याद
है ही देश के विभिन्न प्रांतों की राजधानी भी उसे कंठस्थ है. अभी तक उसने न तो कखग लिखना सीखा है और न ही पूरे अल्फाबेट. पर अपनी इस स्मरण क्षमता से वह बड़े-बड़ों का पसीना छुड़ा देता है. दर्जनों राइम्स उसे याद है. दिलचस्प यह है कि अभी तक वह स्कूल भी नहीं गया. उसके पिता अब उसे दाखिला दिलाने की तैयारी कर रहे हैं.
देश व राजधानी से लेकर अन्य चीजें हैं कंठस्थ
फुर्सत के क्षण में पढ़ाती है मां
बाघनोचा-राखाबनी में रहने वाले मो फारुक अनवर व गुड़िया खातून के बेटे मो फैजान ने तीन दिन पूर्व चार साल की उम्र पूरी की है. फारुक एमए-बीएड कर चुके हैं और शिक्षक की नौकरी पाने के लिए खुद तैयारी कर रहे हैं. घर में उनके भतीजे रेहान हैं, जो सातवीं में पढ़ते हैं. रेहान को याद करते सुन फैजान को पहले ही दिन कई देशों की राजधानी याद हो गयी. जब इसका अहसास फारुक व उनकी पत्नी गुड़िया को हुआ, तो वे अपने बच्चे को इसके लिए प्रेरित करने लगे. जब उन्हें फुर्सत होती,
उसे बताते, पढ़ाते. चंद दिनों में उसने सभी देशों की राजधानी याद कर ली. अब तो वह देश के प्रमुख नेताओं, मंत्री, मुख्यमंत्री के नामों को जानने में लगा हुआ है.
एयरोनाॅटिकल इंजीनियर बनना चाहता है फैजान
फैजान की तमन्ना है कि वह एयरोनाॅटिकल इंजीनियर बने. वह चांद पर जाना चाहता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वह बहुत ही प्रभावित है. उनसे वह मिलना भी चाहता है. कौटिल्य के बारे में उसने लैपटॉप इंटरनेट के जरिये जाना था. वह उसकी ही तरह तेज बनना चाहता है. फैजान के दादा हाजी शेखावत अंसारी बांधडीह मिडिल स्कूल से बतौर शिक्षक सेवानिवृत्त हो चुके हैं. वे कहते हैं कि बच्चे में विलक्षण प्रतिभा है. सुनहर ही उसे सब कुछ याद रह जाता है. मुहल्ले के मो अरशद कहते हैं कि इतनी कम उम्र में इतनी स्मरण शक्ति बहुत बड़ी बात है. वे कहते हैं फैजान तरक्की के हर शिखर तक पहुंचेगा, ऐसी उम्मीद है.
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