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Published at :30 Nov 2015 7:16 PM (IST)
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बिलकांदी पंचायत में दो-दो स्वास्थ्य उपकेंद्र रहते हुए भी ग्रामीणों को नहीं मिल रहा चिकित्सीय सुविधा का लाभ प्रतिनिधि, रानीश्वररानीश्वर प्रखंड के पश्चिम बंगाल सीमा से सटे हुए बिलकांदी पंचायत के लोगों को चिकित्सीय सुविधा का लाभ नहीं मिल रहा है़ पंचायत के अधिकांश लोगों को झोलाछाप डाक्टर से इलाज कराना पड़ता है या पश्चिम […]

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बिलकांदी पंचायत में दो-दो स्वास्थ्य उपकेंद्र रहते हुए भी ग्रामीणों को नहीं मिल रहा चिकित्सीय सुविधा का लाभ प्रतिनिधि, रानीश्वररानीश्वर प्रखंड के पश्चिम बंगाल सीमा से सटे हुए बिलकांदी पंचायत के लोगों को चिकित्सीय सुविधा का लाभ नहीं मिल रहा है़ पंचायत के अधिकांश लोगों को झोलाछाप डाक्टर से इलाज कराना पड़ता है या पश्चिम बंगाल के अस्पताल में इलाज के लिए जाना पड़ता है. बिलकांदी पंचायत में 22 गांव है, जिसकी जनसंख्या 7102 है़ जिनमें से महिलाओं की संख्या 3527 व पुरूषों की संख्या 3575 है़ पंचायत के लोगों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए जयताड़ा व जामजुड़ी में दो प्राथमिक स्वास्थ्य उपकेंद्र बनाया गया है़ दोनों ही स्वास्थ्य उपकेंद्र भगवान भरोसे चलते है़ यहां पदस्थापित स्वास्थ्य कर्मी स्वास्थ्य उपकेंद्र के अधीन आंगनबाड़ी केंद्रों में सिर्फ टीकाकरण के दिन ही पहुंचते हैं. गांव में स्वास्थ्य उपकेंद्र रहते हुए भी ग्रामीण इसका लाभ से वंचित हो रहे हैं. ग्रामीणों की शिकायत के बावजूद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी पहल नहीं करते हैं. जयताड़ा में स्वास्थ्य उपकेंद्र भवन है जो जजर्र स्थिति में है वहीं जामजुड़ी में एक भाड़े के घर पर स्वास्थ्य उपकेंद्र हैं जामजुड़ी गांव के बाहर सुनसान जगह पर दो मंजिला एक नये स्वास्थ्य उपकेंद्र भवन का निर्माण कराया जा रहा है. नये भवन में चाहरदीवारी तथा स्वास्थ्य कर्मियों के रहने का आवास भी निर्माण कराया जा रहा है………….बिलकांदी पंचायत में अधिकांश लोग किसान परिवार से है साधारण बीमारी की इलाज भी पंचायत के स्वास्थ्य केंद्र में नहीं हो पाता है सर्दी, बुखार होने पर भी लोगों को झोलाछाप से चिकित्सा कराना पड़ता है.प्रदीप घोष, शिलाजुड़ीसरकार स्वास्थ्य केंद्रों पर स्वास्थ्य कर्मी प्रतिनियुक्त किया है प्रतिमाह स्वास्थ्य कर्मियों को वेतन भी मिलता है, लेकिन बदले में ग्रामीणों को चिकित्सा सेवा का लाभ नहीं मिलता है जो दुर्भाग्य की बात है इसके लिए पदाधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को पहल करनी चाहिए.मोतालिब खान, जयताड़ाजामजुड़ी गांव प्रखंड मुख्यालय से काफी दूरी पर है़ यहां स्वास्थ्य केंद्र रहते हुए भी ग्रामीणों को इसका लाभ नहीं मिलता है इस परिस्थिति में गांव में स्वास्थ्य केंद्र रहना न रहना बराबर है.सुबोधन मुमरू, जामजुड़ीस्वास्थ्य कर्मी समय-समय पर अपनी सुविधा के लिए आंदोलन करते रहते हैं. पर जिस काम के लिए उन्हें प्रतिनियुक्त किया गया है उसके बारे में वे कभी नहीं सोचते हैं. नियमित ड्यूटी नहीं करनेवाले स्वास्थ्य कर्मी का नौकरी में बने रहने का औचित्य ही नहीं है.सुफल सोरेन, जामजुड़ी…………..फोटो 30 डीएमके/रानीश्वर 1 से 31़प्राथमिक स्वास्थ्य उपकेंद्र जयताड़ा2़प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जामजुड़ी का नये निर्माणाधीन भवन3़प्राथमिक स्वास्थ्य उपकेंद्र जामजुड़ी का पुराना भाड़े का भवन………़प्रदीप घोशमोतालिब खानसुबोधन मुमरू़सुफल सोरेन

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