भक्ति के बिना ज्ञान वैराग्य नहीं होते पूर्ण : कृष्ण प्रताप

Published at :29 Apr 2015 10:06 PM (IST)
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भक्ति के बिना ज्ञान वैराग्य नहीं होते पूर्ण : कृष्ण प्रताप

प्रतिनिधि, नोनीहाटनोनीहाट में रामचरितमानस महायज्ञ से चहुंओर भक्तिमय माहौल बना हुआ है. कथावाचक कृष्ण प्रताप तिवारी ने बताया कि भक्ति के बिना ज्ञान वैराग्य पूर्ण नहीं होते. भक्तिरूपी माता सीता को प्राप्त करने के लिये ज्ञान वैराग्य के मूर्ति श्री राम लक्ष्मण विश्वामित्र के साथ जनकपुर पहुंचे. चित्रकु ट से पधारे संत कृष्ण प्रताप ने […]

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प्रतिनिधि, नोनीहाटनोनीहाट में रामचरितमानस महायज्ञ से चहुंओर भक्तिमय माहौल बना हुआ है. कथावाचक कृष्ण प्रताप तिवारी ने बताया कि भक्ति के बिना ज्ञान वैराग्य पूर्ण नहीं होते. भक्तिरूपी माता सीता को प्राप्त करने के लिये ज्ञान वैराग्य के मूर्ति श्री राम लक्ष्मण विश्वामित्र के साथ जनकपुर पहुंचे. चित्रकु ट से पधारे संत कृष्ण प्रताप ने श्री राम के बालकथा और विवाह प्रसंग के विवेचना करते हुए कहा कि किशोरावस्था से ही भगवान श्री राम ने समाज को बहुत महत्व दिया था. यहां तक कि परिवार से अधिक समाज से प्रेम किया. भोजन करत बुलावत राजा नहीं आवत तज बाल समाजा… चौपाई का उल्लेख करते हुए कहा कि जो समाज के लिये निजी स्वार्थ का त्याग कर देता है उसे पूरे समाज का सदा प्रेम मिलता है. उन्होंने बताया कि जनकपुर की मंगलकामनाएं श्री राम को मिली थी और समाज का स्नेह प्राप्त करके ही वे भगवान शिव के धनुष को तोड़ने में सफल हो पाये थे. बताया कि श्री राम की विनम्रता के सामने परशुराम जी का क्रोध तक समाप्त हो गया था. विनम्रता की विजय हुई और क्रोध की पराजय. व्यक्ति को जीवन में अपने समाज से प्रेम करना चाहिए और समाज की मंगलकामना हासिल करनी चाहिए.——————- फोटो-नोनीहाट-यज्ञ

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