झारखंड में डैम : पानी मिल रहा बंगाल को, तरस रहा संताल

Updated at : 16 Feb 2020 1:16 AM (IST)
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झारखंड में डैम : पानी मिल रहा बंगाल को, तरस रहा संताल

आनंद जायसवाल, दुमका : झारखंड के दुमका जिले के मसानजोर में मयुराक्षी नदी पर बने डैम का लाभ लेने के लिए संताल परगना के लोग पिछले 64 सालों से संघर्ष कर रहे हैं. पर पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल निर्माण के दौरान तय की गयी शर्तों का उल्लंघन कर यहां के लोगों का हक मार रहा […]

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आनंद जायसवाल, दुमका : झारखंड के दुमका जिले के मसानजोर में मयुराक्षी नदी पर बने डैम का लाभ लेने के लिए संताल परगना के लोग पिछले 64 सालों से संघर्ष कर रहे हैं. पर पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल निर्माण के दौरान तय की गयी शर्तों का उल्लंघन कर यहां के लोगों का हक मार रहा है. और तो और, झारखंड में स्थिति इस विशाल संपत्ति पर कब्जा जमाये बैठा है. पश्चिम बंगाल की सीमा से करीब 18 किमी अंदर झारखंड के दुमका जिले के मसानजोर में स्थिति इस डैम से पश्चिम बंगाल के वीरभूम व मुर्शिदाबाद जिले को पांच लाख साठ हजार एकड़ जमीन सिंचित करने का लक्ष्य था.

पर, इस डैम से वर्तमान में झारखंड के दुमका जिले के मात्र 18 हजार एकड़ खेत ही सिंचित हो पा रहे हैं. दुमका प्रखंड के दरबारपुर व रानीबहाल पंचायत के छह गांव और रानीश्वर प्रखंड की आठ पंचायत के कुछ खेतों में ही पानी आ पा रहा है. जिस वक्त सबसे अधिक पटवन की जरूरत होती है, उस समय संताल परगना का यह क्षेत्र सिंचाई सुविधा से वंचित हो जाता है, जिसकी गोद में पानी समाया है.
हजारों लोगों को अपनी जमीन छोड़नी पड़ी : मसानजोर डैम के निर्माण में झारखंड के दुमका जिले के दुमका, जामा, मसलिया व शिकारीपाड़ा प्रखंड के 144 गांव खत्म हो गये. इन गांवों की करीब 19000 एकड़ जमीन पानी में चली गयी. इनमें 12000 एकड़ खेती योग्य जमीन थी. इसके अलावा करीब 5000 एकड़ बैहर जमीन भी डैम में गयी थी.
करीब तीन हजार से अधिक घर हटा दिये गये. हजारों लोगों को अपनी जमीन छोड़नी पड़ी, इसके बाद भी झारखंड के लोग इस पर अपना अधिकार नहीं जता पा रहे हैं. डैम में बनी हाइड्रेल परियोजना से 04 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है. यही नहीं, बंगाल के वीरभूम जिले के मुख्यालय सिउड़ी शहर के पास तिलपाड़ा बराज का निर्माण किया है.
बराज से बायीं ओर निकाली गयी नहर का नाम है मयुराक्षी द्वारका नहर. दायीं ओर निकाली गयी नहर का नाम मयुराक्षी बक्रेश्वर मुख्य नहर है. तिलपाड़ा बराज से बक्रेश्वर थर्मल पावर स्टेशन को भी पानी मिलता है. यहां से कुल 1050 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है. पर आज भी डैम के आसपास का इलाका अंधेरे में है.
झारखंड को नाम मात्र का पानी
दुमका जिले में दरबारपुर, रानीबहाल समेत रानीश्वर की आठ पंचायतों की मात्र 18000 एकड़ जमीन को ही मिल रहा पानी. लक्ष्य भी था मात्र 25500 एकड़ खेत को पानी पहुंचाने का.
पश्चिम बंगाल को मिल रहा फायदा
वीरभूम व मुर्शिदाबाद जिले की 5,60,000 एकड़ जमीन को सिंचाई को मिल रहा पानी
सिउड़ी शहर के पास स्थित तिलपाड़ा बराज में भेजा जा रहा पानी. यहां से हो रहा 1050 मेगावाट बिजली का उत्पादन
मसानजोर डैम में बने हाइड्रल परियोजना से 04 मेगावाट बिजली का हो रहा उत्पादन
बंगाल के कुछ इलाकों में बाढ़ की समस्या से मिली निजात
पश्चिम बंगाल के कई उद्योगों को मिल रहा है पानी
पहले कहा : मामूली पानी मिलता है, अब कहा : 266 क्यूबिक मीटर मिलता है
रांची. मसानजोर डैम के मामले में राज्य सरकार की अोर से झारखंड हाइकोर्ट में दायर अलग-अलग शपथ पत्रों में अंतर विरोध झलकता है. वर्ष 2019 में दायर शपथ पत्र में सरकार ने बताया था कि उक्त डैम से झारखंड को मामूली पानी मिलता है.
जनवरी 2020 में दायर शपथ पत्र में सरकार ने बताया है कि 266 क्यूबिक मीटर पानी डैम से झारखंड को मिल रहा है. मसानजोर डैम पर झारखंड के पूर्ण नियंत्रण के लिए गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे ने हाइकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है.
प्रार्थी की अोर से अधिवक्ता दिवाकर उपाध्याय ने बताया कि डैम से चार मेगावाट बिजली का भी उत्पादन हो रहा है, लेकिन एक भी यूनिट झारखंड को नहीं मिल रही है. उन्होंने बताया कि 1978 में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर व पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्योति बसु के बीच करार हुआ था. प्रार्थी ने मसानजोर डैम पर झारखंड को पूर्ण नियंत्रण देने की मांग की है.
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