धर्म-अध्यात्म व योग में डूबी उपराजधानी, बही भक्ति की रसधारा

Updated at : 26 Dec 2017 5:37 AM (IST)
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धर्म-अध्यात्म व योग में डूबी उपराजधानी, बही भक्ति की रसधारा

महर्षि मेंहीं आश्रम में 19 वां ध्यान साधना शिविर शुरू श्री राम चरितमानस पारायण यज्ञ से माहौल हुआ भक्तिमय दुमका : उपराजधानी दुमका में इन दिनो योग, अध्यात्म और भक्ति का वातावरण चहुंओर दिख रहा है. दुमका के श्री अग्रसेन भवन में जहां श्रीरामकथा का वाचन हो रहा है और योग के शिविर चल रहे […]

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महर्षि मेंहीं आश्रम में 19 वां ध्यान साधना शिविर शुरू

श्री राम चरितमानस पारायण यज्ञ से माहौल हुआ भक्तिमय
दुमका : उपराजधानी दुमका में इन दिनो योग, अध्यात्म और भक्ति का वातावरण चहुंओर दिख रहा है. दुमका के श्री अग्रसेन भवन में जहां श्रीरामकथा का वाचन हो रहा है और योग के शिविर चल रहे थे, वहीं सोमवार से पुसारो नदी तट पर रमणिक वातावरण में सप्ताह व्यापी ध्यान साधना शिविर भी शुरू हो गया.
सत्संग ही अध्यात्म का प्रवेश मार्ग: अरण्यानंद : उपराजधानी दुमका के पुसारो स्थित महर्षि मेंहीं आश्रम में सोमवार से 19 वां ध्यान साधना शिविर प्रारंभ हुआ. इस शिविर के पहले ही दिन बड़ी तादाद में सत्संगी पहुंचे और ध्यान, सत्संग में भाग लिया और प्रवचन को सुना. पहले दिन मुख्य रूप से स्वामी अरण्यानंद महाराज, स्वामी अनिलानंद एवं स्वामी कमलानंद ने अलग-अलग सत्रों में सत्संग और संतमत के बारे में विस्तार से प्रकाश डाला. स्वामी अरण्यानंद ने बताया कि सत्संग से ही ज्ञान, वैराग्य, सत्यकथा और लोक मंगल प्राप्त हो सकता है. संतों का संग या सत्संग ही मोक्ष का मार्ग है. यही अध्यात्म का भी प्रवेश द्वार है.
सत्संग से सज्जन तो क्या दुर्जन को भी उसी प्रकार लाभ होता है. इस प्रकार पारसमणि के स्पर्श से लोहा भी सोना हो जाता है. वास्तव में सत्संग एक शिक्षण है. संस्कार है जो संतों के मार्गदर्शन में, उनके जीवन, उनके आचरण और उनके सानिध्य से प्राप्त होता है. स्वामी अनिलानंद ने कहा कि संत का जीवन ही सत्य, प्रेम, करुणा तथा सदाचार की खुली किताब की तरह है और उनकी संगति की प्राप्ति अध्यात्म का विद्यापीठ. सामूहिक सत्संग ज्ञान का अंग है
और परमात्मा का ध्यान सत्संग का योग. दरअसल जब ज्ञान और योग दोनों मिलते हैं, तभी भक्ति पूरी होती है और तब हम ईश्वर को अपने सन्निकट पाते हैं. स्वामी कमलानंद ने कहा कि संतों की संगति मिलती है, तो उनसे भक्ति की युक्ति प्राप्त होती है और भक्ति की युक्ति मिलती है और उससे साधना की जाती है, तो मुक्ति प्राप्त होती है. उन्होंने कहा कि हमारा विचार उत्तम हो, सात्विक-संतुलित आहार हो, संयमित जीवन हो. संतों का सानिध्य हो, जो जीवन सफल होता है. उल्लेखनीय है कि 31 दिसंबर तक चलने वाले इस ध्यान साधना शिविर में कुप्पाघाट से भी संत-मनीषियों का आगमन होगा और उनके भी प्रवचन होंगे. सप्ताहव्यापी अनुष्ठान को सफल बनाने में विनय कुमार, लोटन कुमार, जनार्दन शर्मा, लोबिन मंडल, भैरव सिंह, शालिग्राम, अनिल आदि अहम भूमिका निभा रहे हैं.
याेग व अनुशासित जीवन शैली से बीमारी को रखें दूर
दादी महिमा मंडल, मारवाड़ी युवा मंच की महिला शाखा प्रेरणा, श्रीकृष्ण सखा मंडल, श्री हरि सत्संग समिति के सहयोग से पतंजलि योग समिति द्वारा उपराजधानी दुमका में आयोजित सप्ताव्यापी योग शिविर का समापन सोमवार को हो गया. इस योग शिविर में योगाचार्य राकेश पराशर ने प्रशिक्षण देते हुए योग साधकों को अपने दिनचर्या में आंशिक बदलाव लाकर उसे व्यवस्थित और अनुशासित जीवन शैली में तब्दील करने की अपील की. कहा कि हमारी दिनचर्या और जीवन शैली ही स्वस्थ्य जीवन का आधार प्रदान करती है.
योगाचार्य राकेश पराशर ने इस योग शिविर में उपस्थित योग साधकों को सूक्ष्म यौगिक क्रियायें, मोटापा, डायबिटिज,कब्ज, गैस, एसिडिटी में विशेष रुप से उपयोगी आसन जैसे पवनमुक्तासन, वज्रासन, हस्त उत्थानासन, पाद हस्तासन, त्रिकोणासन समेत लघु शंख प्रक्षालन की विधि भी बतायी. साथ ही साथ संपूर्ण शरीर को प्राणवान, उर्जावान बनाने के लिए सूक्ष्म प्राणायाम का भी अभ्यास कराया. शिविर की व्यवस्था व सफल आयोजन में योग प्रशिक्षक संतोष कुमार गोस्वामी, शिव हांसदा, दयाल दां आदि की भूमिका अहम रही. मौके पर पतंजलि योग समिति द्वारा प्रकाशित योग से संबंधित पुस्तिका का भी नि:शुल्क वितरण किया गया.
मानव कल्याण का महामंत्र है रामायण: राजकुमार
श्री अग्रसेन भवन मारवाड़ी मातृ सेवा सदन के प्रशाल में श्री राम चरितमानस पारायण यज्ञ में श्रीराम कथा के मर्मज्ञ और प्रवचनकर्ता श्री राजकुमार हिम्मतसिंहका ने कहा कि रामायण मानव कल्याण का महामंत्र है. रामायण का अर्थ मानव का कल्याण करना भी है. यह वास्तव में मानव कल्याण का एक शब्दकोश या ग्रंथ की तरह है. जिसके आदर्शों को व्यक्ति यदि अपने जीवन में उतार ले तो उसका कल्याण निश्चित है. भौतिकवादी युग में जहां विज्ञान के सूत्र असफल होते हैं, वहां रामायण के शब्द जटिल मामलों के समाधान में सफल होते हैं. यह ऐसा पवित्र ग्रंथ है. इसमें जीवन आदर्श के अनेकों ऐसे प्रसंग मिलते हैं.
जिसे हम अपने में आत्मसात कर अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं. श्री हिम्मतसिंहका ने कहा कि रामायण के हर अध्याय मानवीय रिश्ते श्रद्धा, प्रेम, भक्ति, वात्सल्य, करुणा, मित्रता, कर्तव्य परायणता की सीख देते हैं. रामायण से आज आधुनिक जीवन में बहुत सी बातें सीखी जा सकती है. इससे हम सीख सकते हैं कि किसी मनुष्य के लिए प्राण से ज्यादा वचन जरूरी होता है. शादी के बंधन को इसमें बहुत अटूट बताया गया है. पति-पत्नी दोनों के कर्तव्य को गहराई से समझाया गया है. भाईयों के प्रेम को बहुत ही अनोखे रूप में दिखाया गया है.
श्री हिम्मतसिंहका ने कहा कि इसके अलावा इसमें बाप-बेटे के मार्मिक संबंध को भी दर्शाया गया है. मित्रता को जात-पात, राजधर्म से ऊपर रखा गया है. पाप कर्म का अंत किस प्रकार होता है, यह दिखाया गया है. इसलिए हर व्यक्ति को रामायण में बताये गये नैतिक मूल्यों को धारण कर अच्छा जीवन जीना चाहिए.
उल्लेखनीय है कि नौ दिवसीय श्रीरामचरित मानस परायण महायज्ञ का आयोजन श्री अग्रसेन भवन में दादी महिमा मंडल, मारवाड़ी युवा मंच की महिला शाखा प्रेरणा, श्रीकृष्ण सखा मंडल, श्री हरि सत्संग समिति के सदस्य महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. हर दिन मनमोहक झाकी तथा भक्तिमय संगीत के भी कार्यक्रम हो रहे हैं.
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