लापरवाही करनेवाले होंगे दंडित: जेडीए
Updated at : 28 Nov 2017 5:27 AM (IST)
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मामला. कृषि विभाग के गोदाम में पड़े रह गये कीटनाशक के एक्सपायर होने का मामला फरवरी 2016 में बने थे कीटनाशक, मार्च 2017 में हो गये एक्सपायर दुमका : जिला कृषि कार्यालय के गोदाम में जो कीटनाशक, जैविक खाद व पोषक तत्व को छह वर्ष से रख कर एक्सपायर कराने का मामले को संयुक्त कृषि […]
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मामला. कृषि विभाग के गोदाम में पड़े रह गये कीटनाशक के एक्सपायर होने का मामला
फरवरी 2016 में बने थे कीटनाशक, मार्च 2017 में हो गये एक्सपायर
दुमका : जिला कृषि कार्यालय के गोदाम में जो कीटनाशक, जैविक खाद व पोषक तत्व को छह वर्ष से रख कर एक्सपायर कराने का मामले को संयुक्त कृषि निदेशक ने गंभीरता से लिया है. उन्होंने कहा कि लापरवाही करनेवाले दंडित किये जायेंगे. याद हो कि कई कीटनाशक व जैविक खाद, जिसे 2010-11 अथवा 2011-12 तक में बंट जाना चाहिए था, वह गोदाम में ही अब तक रखा हुआ है. दरअसल, ऐसे रसायनों को वितरित कराने की पहल ही नहीं हुई थी. प्लास्टिक के डिब्बे में पैक निमटा नाम के कीटनाशक भारी तादाद में पड़े हुए थे,
जो फरवरी 2016 का बना हुआ था और एक वर्ष बाद यानी की मार्च 2017 में यह एक्सपायर हो चुका था. वहीं धानस्टिम नाम का कार्बनडाजिम की कई पैकेट जो फरवरी 2010 का बना हुआ था और 2012 जनवरी में एक्सपायर कर चुका था, वह भी गोदाम में पड़ा हुआ था. दूसरे कीटनाशक बायोहीट के दर्जन भर कार्टून को भी अब तक उपयोग नहीं किया गया, जो इस महीने (तीन दिनों में)एक्सपायर हो रहे हैं.
जेडीए ने जुलाई महीने में ही पकड़ी थी गड़बड़ी : संयुक्त कृषि निदेशक अजय कुमार सिंह ने तो योगदान करने के बाद जुलाई महीने में ही काठीकुंड एवं गोपीकांदर प्रखंड में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन योजना अंतर्गत कृषकों को वितरित करने के लिए बोरोन, हेलीकाप,
मोनोक्रोटोफास, जिंक सल्फर, वर्मी कंपोस्टर फेरोमेंट्रेप इत्यादि एटिक सेंटर में पड़ा पाया था. मामले में आत्मा के परियोजना निदेशक ने दोनों प्रखंड के बीटीएम को शो-कॉज भी किया था कि क्यों न उनकी लापरवाही की वजह से एक्सपायर हो चुके सामान के मूल्य की गणना कर उनके वेतन से कटौती कर ली जाये. बावजूद इसके सामान नहीं बांटे गये थे. प्रभात खबर ने मामले को पिछले दिनों सामने लाया था, तब जाकर एटिक सेंटर से सामान हटाने गये थे.
नमसा योजना. लाभुक को देना था, पड़ा है गोदाम में
नमसा योजना के तहत वर्मी कंपोस्ट का बेड लाभुक को दिया जाना था, पर सैंकड़ों बेड गोदाम की ही शोभा बढ़ा रहे हैं. इसकी जांच भी हो, तो बड़ी अनियमितता का खुलासा होना तय माना जा रहा है. ये सामान भी लंबे समय से गोदाम में है. सवाल यह भी उठ रहा है कि जब लाभुक को बांटने के लिए सामान की खरीद हुई, तो बंटे क्यों नहीं.
अब आनन-फानन में खपाने की तैयारी
मिली जानकारी के मुताबिक गोदाम में रखे इन सामान को किसानों तक न पहुंचाने का मामला तूल पकड़ने और जांच की आशंकाओं के बाद जैसे-तैसे इसे खपाने की भी तैयारी चल रही है. ताकि गड़बड़ी पर परदा डाला जा सके. बता दें कि प्रभात खबर में समाचार प्रकाशित होने के बाद न सिर्फ आत्मा, बल्कि कृषि महकमा भी अपने-अपने गोदामों को खाली करने में जुट गया है. वर्षों से रखे हुए डोलोमाइट जो नहीं बांटे गये थे, उन्हें ट्रैक्टर में लदवाकर दूसरी जगह भेजने की कवायद हो रही है.
किन योजनाओं के तहत ये सामान की खरीद हुई है और कैसे कीटनाशक, पोषक तत्व व उपकरण नहीं बंटे और रखे-रखे नष्ट हो गये उसकी जांच होगी. जो भी लापरवाह रहे होंगे, उनकी जिम्मेदारी सुनिश्चित कर दंडित किया जायेगा. कोई सामान गोदाम के बाहर फेंका गया है, तो यह गंभीर बात है.
अजय कुमार सिंह, संयुक्त कृषि निदेशक
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