क्या बुधवार सुबह अमेरिका कर सकता है परमाणु हथियारों के जरिए ईरान की प्राचीन सभ्यता का अंत?

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Donald trump iran war deadline

ट्रंप ने ईरान को दी सभ्यता समाप्त करने की धमकी

US-Iran War : अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध क्या बुधवार सुबह को विनाश लाकर समाप्त हो जाएगा? यह सवाल पूरी दुनिया के लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया ट्रूथ पर ईरान को चेतावनी देते हुए लिखा है कि अगर रात 8 बजे होर्मुज स्ट्रेट को नहीं खोला गया, तो प्राचीन ईरानी सभ्यता नष्ट हो जाएगी. वहीं अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि अमेरिका के पास कई और टूल भी हैं, जिनका इस्तेमाल इस युद्ध में हो सकता है. ट्रंप और वेंस के बयानों से यह सवाल गहराता जा रहा है कि क्या अमेरिका ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों का प्रयोग करेगा. आइए इस मुद्दे को समझते हैं-

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US-Iran War : ईरान के लोगों के लिए आज की रात कयामत की रात साबित हो सकती है. हालांकि ईरान भी किसी भी सूरत में अमेरिका के सामने घुटने टेकने को तैयार नहीं है और वो जवाबी कार्रवाई की बात कर चुका है. अगर दोनों देश इसी तरह आमने सामने रहे, तो भारतीय समयानुसार सुबह 5:30 बजे के बाद विश्व में कुछ विनाशकारी हो सकता है. इसकी तीव्रता कितनी होगी, यह तो अमेरिका के राष्ट्रपति ही तय कर सकते हैं. यहां गौर करने वाली बात यह है कि अमेरिका कूटनीति की ओर जाता है या फिर किसी बड़े युद्ध की ओर.

क्या ट्रंप की चेतावनी परमाणु हथियारों के प्रयोग की ओर इशारा कर रही हैं?

इसमें कोई दो राय नहीं है कि ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी है, लेकिन इस चेतावनी को मनोवैज्ञानिक दबाव के रूप में ज्यादा देखा जा रहा है. परमाणु हथियारों का प्रयोग बहुत बड़ा कदम होगा, जिसके लिए शायद अमेरिका तैयार ना हो. वैसे भी व्हाइट हाउस ने यह स्पष्ट किया है कि जेडी वेंस के टूल्स का मतलब परमाणु हथियार नहीं बल्कि कई और तरीके हैं. ट्रंप अपने सोशल मीडिया पोस्ट में एक ओर जहां चेतावनी दे रहे हैं, वहीं बातचीत के अवसर को भी जिंदा रखने की कोशिश कर रहे हैं.

परमाणु हथियारों का प्रयोग हुआ, तो पूरी दुनिया अमेरिका के खिलाफ होगी

अमेरिका इस बात को अच्छी तरह से जानता है कि अगर उसने परमाणु हथियारों का प्रयोग किया, तो उसे पूरी दुनिया का विरोध झेलना होगा. इसी वजह से अमेरिका परमाणु हथियार होते हुए भी उनका प्रयोग करने में हिचकेगा. रूस और चीन जैसे देश भी उसके खिलाफ खड़े हो सकते हैं, जो युद्ध को क्षेत्रीय तनाव से बढ़ाकर वैश्विक कर देंगे.ईरान पर परमाणु हमला हुआ, तो लाखों लोगों की मौत हो सकती है और पूरा मिडिल ईस्ट रेडिएशन के दायरे में आ जाएगा, जिससे मानवता पर घोर संकट उत्पन्न हो जाएगा. निश्चित तौर पर अमेरिका इस स्थिति के लिए तैयार नहीं होगा, क्योंकि ट्रंप की इस नीति का विरोध उनके अपने देश में भी होगा.

एनर्जी वार की तरफ जा रहा है विश्व

ईरान ने ट्रंप की धमकी के बाद कहा है कि इंशाल्लाह कल जो होगा, उसमें अमेरिका और उसके सहयोगियों को ईरान की प्राचीन सभ्यता की ताकत दिखेगी. कहने का आशय यह है कि ईरान भी पूरी तैयारी में है और वे अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ एनर्जी वार करने के लिए तैयार हैं. ईरान होर्मुज स्ट्रेट को नहीं खोलेगा और खार्ग द्वीप पर जो अमेरिकी हमले हो रहे हैं, उनके एवज में अमेरिका और उसके दोस्तों को तेल संकट झेलने पर मजबूर करेगा. यह तमाम बयान यह साबित करते हैं कि मिडिल ईस्ट में अगले 12 घंटे बहुत महत्वपूर्ण होने जा रहे हैं, जो पूरी दुनिया को एक नई दिशा दे सकते हैं.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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