सफलता. लिपिक से लेकर प्राचार्य तक को दबोचा, ट्रैप किये गये 19 में से आठ दुमका के ही निकले
जामताड़ा के तत्कालीन सिविल सर्जन और देवघर में श्रम विभाग के अधिकारी को भी किया गिरफ्तार
दुमका : संतालपरगना में पिछले दस महीने में भ्रष्टाचार निरोधक कोषांग अर्थात एंटी करप्शन ब्यूरो ने 19 रिश्वतखोरों को संताल परगना से गिरफ्तार कर जेल भेजा है. प्रमंडलीय मुख्यालय दुमका में एक अप्रैल को एसीबी का थाना भी यहां खुल गया है, जिसके बाद रिश्वतखोरों के खिलाफ शिकायत के लिए पहुंचने वालों की संख्या बढ़ी है और लोगों में जागरूकता भी आयी है. यही वजह है कि अधिकारी से लेकर लिपिक तक और मुखिया से लेकर प्राचार्य तक को रंगे हाथ दबोच कर जेल भेजा जाना संभव हो सका है.
रिश्वतखोरी के मामले में ट्रैप किये गये 19 में से 8 तो दुमका के ही निकले. जिनमें जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ विजय कुमार सिंह एवं उस कार्यालय के लेखापाल अरविंद कुमार सिंह, अंचल कार्यालय रामगढ़ के लिपिक राजेश अंबष्ठ, क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार कार्यालय के सहायक संजीव कुमार दुबे एवं प्रियनाथ तिवारी, बरमसिया के पंचायत सचिव सुभाष चंद्र दां, जरमुंडी के पंचायत सचिव सह जनसेवक शंभुनाथ गण तथा विद्युत आपूर्ति प्रमंडल के कर्मी प्रकाश सिंह शामिल हैं. पिछले वर्ष एसीबी ने दुमका में थाना खुलने से पहले जामताड़ा के तत्कालीन सिविल सर्जन और देवघर में श्रम विभाग के अधिकारी को भी पकड़ा था.
छात्रों ने प्राचार्य को भिजवाया जेल
प्राथमिक शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय घोरमारा की प्राचार्य एडलीन हांसदा को छात्रों ने ही एसीबी से गिरफ्तार करवाया था. एडलीन पर आरोप था कि वह छात्रवृत्ति के लिए बोनाफाइड सर्टिफिकेट जारी करने में रिश्वत मांग रही थी. बिना पैसे के वह सर्टिफिकेट पर हस्ताक्षर नहीं कर रहीं थीं. उनमें से एक राजीव किस्कू ने शिकायत की, तो एडलीन पकड़ी गयीं.
एसीबी वाले बगल में, फिर भी मांगा घूस
संतालपरगना परिवहन प्राधिकार प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय परिसर में ही चलता है. उसी भवन में एसीबी का भी दफ्तर
चलता है. प्राधिकार के सहायक संजीव दुबे ने परमिट जारी करने के लिए बस मालिक संजय कुमार चौधरी से रिश्वत मांगी थी. संजय ने एसीबी में शिकायत की. बगल के कमरे में एसीबी वालों ने कार्रवाई की और रंगे हाथ संजीव व प्रियनाथ तिवारी दबोच लिये.
फाइन से बचाने के नाम पर मांगा था रिश्वत
विद्युत आपूर्ति प्रमंडल दुमका ग्रामीण के एक कर्मी प्रकाश सिंह ने शिकारीपाड़ा थाना क्षेत्र के राजबांध पलासी गांव के
पास गेट-ग्रिल बनाने का काम करने वाले सुनील मंडल को परेशान कर रखा था. उसे ओवरलोड के मामले में डरा-धमका कर फाइन से बचने के लिए रिश्वत की मांग की जा रही थी. प्रकाश के खिलाफ सुनील एसीबी गया, तो प्रकाश रंगे हाथ धरा गया. उसके बाद अग्रेतर कार्रवाई भी की गयी.
