आइआइटी आइएसएम के रिसर्च पार्क में बनेगा स्किल सेंटर

Updated at : 26 Jun 2024 1:48 AM (IST)
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आइआइटी आइएसएम के रिसर्च पार्क में बनेगा स्किल सेंटर

निरसा परिसर में पांच एमएमटी हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता वाला संयंत्र स्थापित किया जायेगा

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वरीय संवाददाता, धनबाद.

आइआइटी आइएसएम प्रबंधन ने अपने निरसा परिसर के विकास के लिए रोड मैप तैयार कर लिया है. परिसर के विकास के लिए संस्थान के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने 220 के बजट को मंजूरी प्रदान कर दी है. इसी परिसर में संस्थान रिसर्च पार्क स्थापित करेगा. इसमें अत्याधुनिक रिसर्च फैसिलिटी विकसित की जायेगी. यहां भविष्य के ईंधन पर शोध के साथ ही डीप अंडर ग्राउंड माइनिंग पर शोध होगा. साथ ही इस परिसर का इस्तेमाल स्किल सेंटर के रूप में किया जायेगा. इसमें छात्रों को नयी तकनीक से रूबरू करवाया जायेगा.

भविष्य के ईंधन पर शोध :

निरसा परिसर में प्रस्तावित रिसर्च पार्क का मुख्य आकर्षण हाइड्रोजन वैली इनोवेशन क्लस्टर (एचवीआइसी) होगा. इस हाइ़ड्रोजन क्लस्टर में प्रति वर्ष पांच मिलियन मिट्रिक टन हाइड्रोजन का उत्पादन होगा. एचवीआइसी की स्थापना सेंटर फॉर हाइड्रोजन एंड कार्बन कैप्चर स्टोरेज एंड यूटिलाइजेशन टेक्नोलॉजीज (सीएचसीसीयूएसटी) की एक टीम कर रही है. आइआइटी (आइएसएम) में मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर संदीपन कुमार दास बनाये गये हैं. एचवीआइसी में 2030 तक उत्पादन शुरू करने लक्ष्य रखा गया है.

आर्टिफिशियल अंडर ग्राउंड माइंस की होगी स्थापना :

निरसा परिसर का इस्तेमाल खनिज उत्पादन को और सुरक्षित बनाने के लिए भी यहां रिसर्च होगा. इस परिसर में एक आर्टिफिशियल अंडर ग्राउंड माइंस की स्थापना होगी. यह एक तरह से वास्तविक अंडरग्राउंड माइंस की तरह ही होगा. पहले यहां सभी मानकों को परखा जायेगा. इसके बाद असली माइंस में प्रयोग या शोध पर काम होगा. आने वाले समय में खनिजों के उत्पादन के लिए धरती में काफी गहराई तक खनन किया जायेगा. यह आर्टिफिशियल माइंस भविष्य की इस जरूरत को भी पूरा करेगा.

यहां नहीं होगी एकेडमिक गतिविधि :

निरसा परिसर में कोई एकेडमिक गतिविधि नहीं होगी. संस्थान की सभी एकेडमिक गतिविधि धनबाद परिसर होगी. यह निर्णय दोनों परिसर के बीच की दूरी को देखते हुए लिया गया है. निरसा में संस्थान को 210 एकड़ जमीन राज्य सरकार से मिली है. इसमें रिसर्च पार्क के लिए अभी फिलहाल करीब 67 एकड़ जमीन पर चहारदीवारी कर दी गयी है. शेष जमीन के बीच में रैयत जमीन होने की वजह से अभी तक चहारदीवारी का कार्य पूरा नहीं हो पाया है.

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