रिंग रोड घोटाला: 17 आरोपियों की जमानत फिर खारिज, एससी-एसटी कोर्ट से नहीं मिली राहत
सांकेतिक तस्वीर | AI Image
धनबाद के चर्चित रिंग रोड घोटाला मामले में 17 आरोपियों को अदालत से बड़ी राहत नहीं मिली है. झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद एससी-एसटी विशेष अदालत ने सभी की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है. यह आरोपी छह माह से न्यायिक हिरासत में हैं.
विधि प्रतिनिधि, धनबाद
धनबाद के चर्चित रिंग रोड घोटाला मामले में जेल में बंद 17 आरोपियों को बुधवार को अदालत से राहत नहीं मिली. झारखंड हाईकोर्ट के निर्देश पर मामले की सुनवाई कर रही एससी-एसटी विशेष अदालत के न्यायाधीश मनीष की अदालत ने सभी आरोपियों की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी.
जिन आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज हुई, उनमें सुशील प्रसाद, अशोक कुमार महथा, उमेश महतो, बप्पी राय चौधरी, अनिल कुमार सिन्हा, उदयकांत पाठक, रवींद्र कुमार, दिलीप गोप, रामकृपाल गोस्वामी, मिथिलेश कुमार, आलोक बरियार, सुमेश्वर शर्मा, शंकर प्रसाद दुबे, विशाल कुमार, काली प्रसाद सिंह, अनुपम कुमारी और कुमारी रत्नाकर शामिल हैं.
हाईकोर्ट के आदेश के बाद एससी-एसटी कोर्ट में हुई सुनवाई
इससे पहले एसीबी की विशेष अदालत ने भी सभी आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी थी. इसके बाद बचाव पक्ष ने झारखंड हाईकोर्ट में अपील दायर कर कहा था कि चूंकि मामला एससी-एसटी एक्ट और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट) के तहत दर्ज है, इसलिए इसकी सुनवाई एसीबी कोर्ट के बजाय एससी-एसटी विशेष न्यायालय में होनी चाहिए.
इस पर झारखंड हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति राजेश कुमार की पीठ ने मुकदमे को एससी-एसटी विशेष अदालत में स्थानांतरित करने का आदेश दिया था. साथ ही जमानत याचिकाओं पर नए सिरे से सुनवाई का निर्देश भी दिया था. हालांकि पुनः सुनवाई के बाद भी अदालत ने सभी आरोपियों की नियमित जमानत अर्जी खारिज कर दी.
कुमारी रत्नाकर को मिली थी अंतरिम राहत
मामले में जेल में बंद आरोपी कुमारी रत्नाकर को झारखंड हाईकोर्ट ने पूर्व में एक माह की औपबंधिक (अंतरिम) जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था. इसके बावजूद नियमित जमानत याचिका पर एससी-एसटी अदालत ने राहत नहीं दी.
छह माह से जेल में हैं आरोपी
निगरानी (विजिलेंस) पुलिस ने 9 जनवरी 2026 को इस मामले में 34 आरोपियों में से 17 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था. सभी आरोपी करीब छह माह से न्यायिक हिरासत में हैं. एसीबी कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.
क्या है पूरा मामला
वर्ष 2016 में निगरानी थाना में विजिलेंस केस संख्या 32/16 दर्ज किया गया था. आरोप है कि झरिया पुनर्वास एवं विकास प्राधिकार (जेआरडीए) की रिंग रोड परियोजना सहित विभिन्न योजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गईं.
एफआईआर के अनुसार धनबाद, दुहाटांड़, मनईटांड़, ढोखड़ा, तिलाटांड़, धैया, भेलाटांड़, पंड्रा समेत कई मौजों में भूमि अधिग्रहण के दौरान सरकारी अधिकारियों और अन्य लोगों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये के मुआवजे का गबन किया गया. जांच में आरोप लगाया गया कि अशिक्षित, कमजोर तथा अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़े वर्ग के रैयतों के नाम पर मिलने वाली मुआवजा राशि छलपूर्वक हड़प ली गई. साथ ही छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (सीएनटी एक्ट) के उल्लंघन और वास्तविक रैयतों तथा सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के भी आरोप हैं.
मुख्य बिंदु
- एससी-एसटी विशेष अदालत ने 17 आरोपियों की नियमित जमानत याचिका खारिज की.
- हाईकोर्ट के निर्देश पर एसीबी कोर्ट से मामला एससी-एसटी कोर्ट स्थानांतरित हुआ था.
- आरोपी करीब छह माह से न्यायिक हिरासत में हैं.
- वर्ष 2016 में दर्ज विजिलेंस केस में भू-अर्जन और मुआवजा घोटाले का आरोप है.
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