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भीषण गर्मी में रेलवे लोको पायलट भी हैं बेहाल

लोको पायलट मुंह पर गमछा बांधकर काम करने को विवश

संवाददाता, धनबाद.

भीषण गर्मी में जहां लोग घरों से निकलने से बच रहे हैं, वहीं असुविधाओं के बीच में ट्रेनों को दौड़ा रहे लोको पायलटों का हाल बेहाल है. गर्मी से बचने के लिए उनके पास सिर्फ दो छोटे पंखे हैं, जो राहत के नाम पर सिर्फ गर्म हवा देते हैं. ऐसे में लोको पायलट मुंह पर गमछा बांधकर काम करने को विवश हैं. उनका कहना है कि नये इंजन डब्ल्यूएजी 12 में एसी की सुविधा दी गयी है लेकिन इस इंजन का उपयोग सिर्फ गुड्स ट्रेनों में किया जा रहा है. मेल व एक्सप्रेस ट्रेनों में आज भी पुराने इंजन का इस्तेमाल हो रहा है. कई इंजन ऐसे भी हैं जिसमें बैठने तक की अच्छी व्यवस्था नहीं है.

इंजन से ही सभी कोच में चलता है एसी :

इंजन के पावर से ही कोच में एसी चलता है. एचओजी से इंजन का कनेक्शन होता है. इसी से एसी को पावर मिलता है. लेकिन दुर्भाग्य है कि इंजन में गर्मी से बचने की कोई व्यवस्था नहीं है.

बाहर के तापमान से अधिक गर्म रहता है इंजन:

बाहर के तापमान से इंजन के अंदर पांच डिग्री ज्यादा तापमान रहता है, गर्मी में यह काफी असहनीय है. लोको पायलट इस प्रतिकूल स्थिति में ड्यूटी करने को विवश है. रनिंग लोको पायलटों ने गत अप्रैल में मुंडी गर्म प्रदर्शन भी किया था. इस दौरान उन्होंने इंजन को अपडेट करने की मांग की थी. लेकिन इसपर अब तक कोई काम नहीं हुआ. एसोसिएशन की मानें तो सरकारी गाइडलाइन के अनुसार इंजन को एसी बनाना है. लेकिन पुराने इंजन को ना हटाया जा रहा है और न उसमें एसी लगाने की व्यवस्था की जा रही है. इंजन में बैठने की सीट की स्थिति बदतर है. ऐसे में लोको रनिंग कर्मी कमर दर्द व नस की समस्या का शिकार हो रहे हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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