धनबाद में तेजी से पांव पसार रहा मिजिल्स-रूबेला, अब तक चार बच्चों की मौत, 30 से ज्यादा मरीजों की हुई पहचान

Updated at : 14 Oct 2022 2:34 PM (IST)
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धनबाद में तेजी से पांव पसार रहा मिजिल्स-रूबेला, अब तक चार बच्चों की मौत, 30 से ज्यादा मरीजों की हुई पहचान

मिजिल्स-रूबेला जिले में तेजी से पांव पसार रही है. स्वास्थ्य विभाग से जारी आंकड़ों के अनुसार मिजिल्स की चपेट में आकर अबतक चार बच्चों की मौत हो गयी है. वहीं 30 से ज्यादा मरीजों की पहचान हुई

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धनबाद : मिजिल्स-रूबेला जिले में तेजी से पांव पसार रही है. स्वास्थ्य विभाग से जारी आंकड़ों के अनुसार मिजिल्स की चपेट में आकर अबतक चार बच्चों की मौत हो गयी है. वहीं 30 से ज्यादा मरीजों की पहचान हुई. ज्यादातर मरीज ग्रामीण क्षेत्र के हैं. इस संक्रामक बीमारी में मरीजों की संख्या बढ़ने की वजह धनबाद जिला रेड जोन की ओर बढ़ रहा है. फिलहाल यह येलो जोन में है.

स्वास्थ्य मुख्यालय के निर्देश पर मिजिल्स की रोकथाम के लिए विशेष टीम गठित की गयी है. टीम में शामिल डॉक्टर मिजिल्स के मरीजों पर लगातार नजर बनाये हुए हैं. वहीं मिजिल्स प्रभावित गांवों में कैंप लगाकर लोगों का इलाज शुरू करने की तैयारी है.

कहां कितने मरीज :

गोविंदपुर में दो, निरसा में एक और बोकारो से धनबाद के टुंडी आये एक बच्चे की मृत्यु मिजिल्स से हो चुकी है. वहीं गोविंदपुर प्रखंड में 22, निरसा में आठ, झरिया में तीन, टुंडी में चार सहित अन्य प्रखंडों में भी मिजिल्स के मरीज पाये गये हैं.

33 प्रतिशत कम टीकाकारण के कारण की वजह से बढ़ रहे मरीज : स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2021-22 में 67 प्रतिशत बच्चों को मिजिल्स का टीका दिया गया है. वहीं 33 प्रतिशत बच्चे टीकाकरण से छूट गये है. स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार बाघमारा, बलियापुर, धनबाद सदर, गोविंदपुर, झरिया, निरसा, तोपचांची व टुंडी ब्लॉक में 72,327 बच्चों के टीकाकरण का लक्ष्य निर्धारित था. जबकि, 48,459 बच्चों को मिजिल्स का टीका दिया गया. करीब 23,868 बच्चे मिजिल्स टीकाकरण से छूट गये.

मिजिल्स-रूबेला के लक्षण

  • बच्चों के शरीर पर छोटे-छोटे दाने निकलना

  • शरीर पर चकत्ते निकलना

  • दस्त, सिरदर्द, सर्दी, खांसी

  • और निमोनिया बुखार

  • बच्चों की आंखों का लगातार लाल रहना

  • नवजात बच्चों में लगातार बुखार का आना

  • कान या गर्दन की लसिका ग्रंथियों में वृद्धि

  • थ्रोम्बोसाइटोपेनिया या खून में प्लेटलेट्स की कमी

  • मस्तिष्क में सूजन जैसे लक्षण दिखना 15 माह के बच्चों को दिया जाता है टीका

सिविल सर्जन डॉ आलोक विश्वकर्मा ने बताया :

मिजिल्स संक्रामक बीमारी है. खासकर बच्चों के बीच यह तेजी से फैलता है. इससे बचाव के लिए 15 माह के बच्चों को मिजिल्स व रूबेला का टीका दिया जाता है. पहला टीका का पहला डोज नौ माह में ओर दूसरा डोज 15 माह में बच्चे को दिया जाता है. इस समय सीमा में छूटे बच्चों को पांच साल की अवधि तक में एक माह में दो टीका देना अनिवार्य है.

मिजिल्स के मामले तेजी से बढ़ रहे है. यह सांक्रमक बीमारी है. आंकड़ा बढ़ने से धनबाद जिला रेड जोन की ओर बढ़ रहा है. इसकी रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से विशेष टीम बनायी गयी है. सर्वे कर मिजिल्स के मरीजों की पहचान की जा रही है. वही टीकाकरण की गति बढ़ाने का निर्देश दिया गया है. स्वास्थ्य विभाग की टीम गंभीरता से मामले पर नजर बनाए हुए है.

डॉ आलोक विश्वकर्मा, सिविल सर्जन, धनबाद

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Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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