छाताबाद में दोबारा भू-धंसान की प्रबल आशंका, पुलिस ने जताया बड़े नुकसान का खतरा
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कतरास के छाताबाद में भू-धंसान की घटना के बाद दोबारा बड़े हादसे की आशंका है. पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, 200 से अधिक घरों के करीब 1000 लोग सुरक्षित स्थानों पर पलायन कर चुके हैं. पुराने भूमिगत खनन से चिंता बढ़ गई है.
कतरास थाना क्षेत्र के छाताबाद फुटबॉल मैदान के समीप सात अगस्त को हुई भू-धंसान की घटना के बाद पुलिस प्रशासन ने दोबारा बड़े हादसे की आशंका जतायी है. कतरास थाना प्रभारी की ओर से धनबाद एसएसपी प्रभात कुमार को भेजी गयी रिपोर्ट में प्रभावित इलाके में फिर भू-धंसान होने की प्रबल आशंका बतायी गयी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि रात में या बड़े पैमाने पर दोबारा भू-धंसान होने पर जान-माल का भारी नुकसान हो सकता है.
एसएसपी ने थाना प्रभारी की रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेज डीसी आदित्य रंजन को अवलोकन एवं आगे की कार्रवाई के लिए भेजे हैं. प्रभावित इलाके में पुलिस की पैदल गश्ती बढ़ा दी गयी है और स्थानीय लोगों से लगातार संपर्क कर स्थिति पर नजर रखी जा रही है.
200 घरों से करीब 1000 लोगों ने किया पलायन
घटनास्थल बीसीसीएल की न्यू आकाशकिनारी सलानपुर खदान के पास है. पुलिस रिपोर्ट के अनुसार छाताबाद के करीब 500 मीटर के दायरे में लगभग 8000 लोग प्रभावित क्षेत्र में रह रहे हैं. इनमें से करीब 200 घरों के लगभग 1000 लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर चुके हैं.
बीसीसीएल ने प्रभावित 12 परिवारों को बेलगड़िया टाउनशिप में शिफ्ट करने के संबंध में जिला प्रशासन को सूची भी उपलब्ध करायी है. कंपनी की रिपोर्ट में करीब 150 मीटर क्षेत्र को डेंजर जोन बताया गया है. इस इलाके में करीब 25 घरों में 200 से अधिक लोग अब भी रह रहे हैं.
ब्लास्टिंग के बाद जमीन में तेज कंपन
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार सात अगस्त को दोपहर करीब 2.30 से 3 बजे के बीच छाताबाद फुटबॉल मैदान के पास अचानक जमीन करीब 20 से 22 फीट नीचे धंस गयी. इसकी चपेट में आकर 15 से 20 घर पूरी तरह जमींदोज हो गये, जबकि आसपास के कई मकानों में दरारें पड़ गयीं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि घटना से पहले न्यू आकाशकिनारी सलानपुर खदान में कोयला उत्खनन के लिए जोरदार ब्लास्टिंग हुई थी. इसके बाद आसपास के घरों में तेज कंपन महसूस हुआ और कुछ देर बाद तेज आवाज के साथ जमीन धंसने लगी.
जुमे की नमाज के कारण टला बड़ा हादसा
घटना के समय जुमे की नमाज का समय होने के कारण अधिकांश पुरुष घरों से बाहर थे. घरों में मौजूद करीब आठ से 10 बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे मलबे में फंस गये थे. स्थानीय लोगों और पुलिस ने सभी को बाहर निकाला और अस्पताल भेजा. एक महिला और बच्चे को अधिक चोट लगी थी.
भू-धंसान में प्रभावित परिवारों का घरेलू सामान, आभूषण और जरूरी दस्तावेज भी मलबे में दब गये.
पुराने भूमिगत खनन से बढ़ी चिंता
स्थानीय लोगों के हवाले से पुलिस रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रभावित क्षेत्र में पहले बीसीसीएल की भूमिगत खदान संचालित थी. लोगों का आरोप है कि कोयला उत्खनन के बाद भूमिगत हिस्से में बालू भराई या अन्य सुरक्षात्मक उपाय नहीं किये गये. स्थानीय लोगों के अनुसार, घटनास्थल से करीब 100 से 150 मीटर दक्षिण कतरास-छाताबाद मुख्य सड़क की ओर भी भूमिगत खनन हुआ है. इससे आसपास के क्षेत्रों में भी भू-धंसान की आशंका जतायी जा रही है.
बढ़ रहा लोगों का आक्रोश
प्रभावित परिवारों ने बीसीसीएल अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर 10 अगस्त को संयुक्त हस्ताक्षरित आवेदन देकर थाना में धरना दिया था. इसके बाद कतरास थाना कांड संख्या 213/26 दर्ज किया गया. इससे पहले सात जुलाई की घटना के बाद लोगों ने कतरास-भटमुरना मुख्य मार्ग को करीब आठ घंटे तक जाम किया था. इस मामले में कतरास थाना कांड संख्या 185/26 दर्ज किया गया था.
पुलिस रिपोर्ट में यह भी आशंका जतायी गयी है कि दोबारा भू-धंसान की स्थिति में लोगों का आक्रोश बढ़ सकता है और कतरास थाना चौक जाम करने या थाना घेराव जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है.
जमीन में बदलाव दिखे तो तत्काल सतर्कता जरूरी
भू-धंसान वाले इलाकों में जमीन का धीरे-धीरे बैठना, मकानों और दीवारों में नयी दरारें पड़ना, सड़क या आंगन का धंसना तथा जमीन से अचानक पानी निकलना या पानी का जमीन में समाना खतरे के संकेत हो सकते हैं. पुराने भूमिगत खनन क्षेत्रों में जमीन के नीचे खाली हिस्से कमजोर होने से दबाव बढ़ने पर अचानक धंसाव हो सकता है. ऐसे क्षेत्रों में आबादी की निगरानी, असुरक्षित मकानों को खाली कराना और जमीन की तकनीकी जांच जरूरी मानी जाती है.
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