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झारखंड में भू-माफियाओं ने कौड़ी के भाव बेच दी रेलवे के लिए अधिग्रहित जमीन, फिर क्या हुआ पढ़िए ये रिपोर्ट

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
रेलवे के लिए अधिग्रहित जमीन को भू-माफियों ने बेच दी
रेलवे के लिए अधिग्रहित जमीन को भू-माफियों ने बेच दी
प्रतीकात्मक तस्वीर

धनबाद (संजीव झा) : धनबाद में भू-माफियाओं व कुछ सरकारी कर्मियों व अधिकारियों की मिलीभगत से रेलवे के लिए अधिग्रहित जमीन भी कौड़ी के भाव बिक गयी. गलत डीड तैयार कर न केवल निबंधन कार्यालय से रजिस्ट्री करा ली, बल्कि उसका म्यूटेशन कराने की कोशिश भी हुई. हालांकि, अभी तक इस जमीन का म्यूटेशन नहीं हो पाया है.

धनबाद अंचल के हीरापुर मौजा के खाता नंबर 45 के प्लॉट नंबर 28 एवं 29 की 13 डिसमिल जमीन का निबंधन शंकर गोप व हुबलाल गोप ने 26.05.2020 को डीड नंबर 2153 के जरिये रीतेश अनुभव के नाम किया. इसमें से प्लॉट नंबर 28 रेलवे की जमीन है. इसका अधिग्रहण वर्ष 1952 में ही हुआ था. पॉलिटेक्निक रोड स्थित इस प्लॉट के आस-पास भी रेलवे की कई जमीन है. इसमें से बहुत सारी जमीन पर पहले से ही अतिक्रमण हो चुका है.

सबसे बड़ी बात यह है कि जिस डीड के जरिये इस जमीन की बिक्री हुई है, उसमें प्लॉट नंबर 28 एवं 29 के रजिस्टर टू में असली मालिक जतन गोप, नरेश गोप, धनंजय गोप एवं भोला गोप हैं. इन सबका नाम विक्रेता में नहीं है. इस डीड के जरिये बेचने वाले शंकर गोप, हुबलाल गोप का नाम वंशावली में नहीं है. डीड रजिस्ट्री में वंशावली का उल्लेख भी नहीं है. जमीन खरीदने के बाद क्रेता की तरफ से तीन बार धनबाद अंचल कार्यालय में इस जमीन का म्यूटेशन कराने के लिए आवेदन दिया गया, लेकिन हर बार अंचलाधिकारी प्रशांत लायक द्वारा आवेदन खारिज कर दिया गया.

धनबाद अंचल के हीरापुर मौजा की खाता संख्या 17 के प्लॉट नंबर 14 में 80 कट्टा जमीन गुहीराम महतो के नाम से खतियान में दर्ज है. वंशावली के अनुसार इस परिवार में अभी कुल 27 सदस्य जीवित हैं, लेकिन इस परिवार के दो सदस्य मंतू गोप एवं संजय गोप (बाप-बेटा) ने ही जमीन को एक परिवार के 10 सदस्यों को बेचा. खरीददारों की तरफ से रजिस्ट्री में लगने वाले स्टांप ड्यूटी से बचने के लिए आठ डीड परिवार की महिलाओं के नाम से बनवाया गया. सभी महिलाओं के नाम पर 10.31-10.31 डिसमिल का ही निबंधन कराया गया, ताकि एक रुपये में रजिस्ट्री हो सके.

हीरापुर मौजा के खाता नंबर 17, प्लॉट नंबर 14 की इन जमीनों के म्यूटेशन के दावा को कुंदन सिंह एवं सैयद इकबाल हुसैन ने चुनौती दी थी. इन लोगों का दावा था कि इस जमीन के कुछ हिस्सा का पावर ऑफ अटॉर्नी उन लोगों के पास है. उन लोगों ने तत्कालीन प्रभारी उपायुक्त बाल किशुन मुंडा एवं अपर समाहर्ता को इसकी शिकायत की थी. कहा था कि इस मामले को लेकर वाद संख्या 446/ 2019 के जरिये सिविल जज सीनियर डिवीजन नंबर वन के कोर्ट में मामला चल रहा है.

सूत्रों के अनुसार तत्कालीन उपायुक्त ने मामले के न्यायालय में विचाराधीन रहने के कारण किसी के पक्ष में म्यूटेशन नहीं करने को कहा था. धनबाद सीओ ने भी कुंदन सिंह एवं सैयद इकबाल हुसैन के म्यूटेशन आवेदन को रिजेक्ट कर दिया, लेकिन दूसरे पक्ष के लोगों के आवेदन को स्वीकार करते हुए म्यूटेशन स्वीकृत कर दिया.

धनबाद के सीओ प्रशांत लायक ने कहा कि हीरापुर मौजा के खाता नंबर 17, प्लॉट नंबर 14 के म्यूटेशन में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है. कुंदन सिंह एवं सैयद इकबाल हुसैन ने जिन रैयतों से पावर ऑफ अटॉर्नी लिया था. उन लोगों ने कोर्ट में केस कर कह दिया कि गलती से पावर दे दिया था. साथ ही जमीन पर वास्तविक दखल कब्जा भी दूसरे पक्ष का ही था. तत्कालीन उपायुक्त ने भी कहा था कि सीओ इस मामले में नियमानुसार म्यूटेशन करें. टाइटल सूट के लिए कोई भी कोर्ट जा सकते हैं.

Posted By : Guru Swarup Mishra

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