Jharkhand News : 10 हजार में बिक रही 28 सौ की सूई ! अस्पताल में बिना अनुमति के हो रहा इलाज
Author : Prabhat Khabar News Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 23 Sep 2020 10:53 AM
धनबाद : धनबाद में कोरोना से गंभीर रूप से ग्रसित बीमारियों के उपचार में प्रयुक्त होनेवाली एंटी वायरल सूइयों की खुलेआम कालाबाजारी हो रही है. 28 सौ से 54 सौ तक की सूई (रेमडेसिविर 100) राेगियाें काे 10 हजार रुपये तक में दी जा रही है. इस जीवन रक्षक सूई की बिक्री दवा दुकानों से सीधे ग्राहक को नहीं होती
धनबाद : धनबाद में कोरोना से गंभीर रूप से ग्रसित बीमारियों के उपचार में प्रयुक्त होनेवाली एंटी वायरल सूइयों की खुलेआम कालाबाजारी हो रही है. 28 सौ से 54 सौ तक की सूई (रेमडेसिविर 100) राेगियाें काे 10 हजार रुपये तक में दी जा रही है. इस जीवन रक्षक सूई की बिक्री दवा दुकानों से सीधे ग्राहक को नहीं होती. अस्पतालों से ही इसे लेना पड़ता है या अस्पतालाें में ही इसे काेराेना राेगियाें काे दिया जाता है. यह स्थिति तब है, जब यहां के निजी अस्पतालों में आधिकारिक ताैर पर काेराेना का इलाज नहीं हाे रहा है. सूचना है कि धनबाद के तीन नर्सिंग हाेम-अस्पताल काेराेना राेगियाें का चोरी-छिपे इलाज कर रहे हैं.
बिना अनुमति हो रहा उपचार : धनबाद के किसी भी निजी अस्पताल को कोविड पॉजिटिव मरीज के उपचार की अनुमति नहीं है. पर यहां के तीन अस्पतालों में चोरी-छिपे कोविड मरीजों का उपाचर हो रहा है. ऐसे मरीजों को कोविड निगेटिव बता कर दूसरी बीमारी के नाम पर भर्ती किया जाता है. इसमें सरायढेला थाना क्षेत्र के दो नर्सिंग होम तथा गोविंदपुर क्षेत्र का एक अस्पताल शामिल है. ऐसे मरीजों को वार्ड की बजाय केबिन में रख कर उपचार किया जाता है.
यहां के कई डॉक्टरों ने भी ऐसे अस्पतालों में अपना इलाज कराया है. सूत्रों के अनुसार इन तीनों अस्पतालों के प्रबंधन ने बाजार में उपलब्ध रेमडेसिविर का लगभग 70 प्रतिशत माल उठा लिया है. चूंकि यह सूई सीधे ग्राहकों को नहीं देनी है. इसका बेजा लाभ अस्पताल संचालक उठाने लगे हैं.
-
तीन अस्पतालों ने बाजार से उठायी 70 फीसदी जीवन रक्षक दवाइयां
-
ये अस्पताल चोरी-छिपे कर रहे हैं काेराेना मरीजाें का इलाज
-
गंभीर रूप से ग्रसित मरीजों को दी जाती है दवा
डॉक्टरों के अनुसार रेमडेसिविर 100 नामक एंटी वायरल सूई गंभीर रूप से कोविड पॉजिटिव मरीजों को दी जाती है. यह लक्षणवाले वैसे मरीजों को दिया जाता है, जिन्हें निमोनिया हो चुका होता है. डॉक्टर इस सूई को चार से पांच दिनों तक देने को कहते हैं. पहले दिन दो टाइम यह सूई पड़ती है. दूसरे दिन से एक बार पड़ता है. इस सूई को कई दवा कंपनियों ने लांच किया है. बाजार में इस सूई की अधिकतम खुदरा कीमत तय है.
सिप्ला कंपनी यह सुई 4000 रुपये (एमआरपी) में उपलब्ध कराती है, वहीं कैडिला 2800 (एमआरपी) में, हेट्रो 5400 (एमआरपी) और जुबलियंट 4700 रुपये (एमआरपी) में देती है. पर धनबाद के अस्पतालों में इन सूइयों की कीमत 10 हजार से कम नहीं ली जा रही है. सरकारी अस्पताल में यह सूई नि:शुल्क दी जा रही है.
यहां के निजी अस्पतालों में कोविड मरीजों के उपचार की सूचना मिल रही है. इसकी जांच करायी जा रही है. मरीजों की जान से खिलवाड़ करनेवालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी. रेमडेसिविर इंजेक्शन सहित अन्य जीवन रक्षक दवाइयों की कालाबाजारी करने वालों पर भी सख्त कानूनी कार्रवाई होगी.
उमाशंकर सिंह, उपायुक्त, धनबाद
रेमडेसिविर सूई का उपयोग मरीज की स्थिति पर ही होनी चाहिए. इस सूई के साइड इफेक्ट भी हैं. कई बार तो मरीज का लीवर तक फेल हो जा रहा है. किसी भी परिस्थिति में पांच फाइल से अधिक नहीं लेना चाहिए. मेडिकल कॉलेज के आइसीयू में यह इंजेक्शन उपलब्ध है, लेकिन अधिकांश मरीजों का उपचार दूसरी दवाओं से ही सफलतापूर्वक किया जा रहा है.
डॉ यूके ओझा, विभागाध्यक्ष मेडिसीन सह कोविड के नाेडल पदाधिकारी, एसएनएमएमसीएच.
Post by : Pritish Sahay
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar News Desk
यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










