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Jharkhand Crime News: धनबाद में कोयला तस्करी के सारे रिकॉर्ड टूटे, हर महीने 600 करोड़ रुपये का काला धंधा

धनबाद में कोयले की बेखौफ तस्करी हो रही है. अनुमान के मुताबिक जिले में प्रतिमाह करीब 600 करोड़ रुपये का अवैध कारोबार होता है. सबसे बड़ी कोल कंपनी बीसीसीएल में 15-20 फीसदी कोयला चोरी हो रहा है

By Prabhat Khabar Digital Desk
Updated Date
इस्ट कतरास में अवैध खदान का मुहाना
इस्ट कतरास में अवैध खदान का मुहाना
फाइल फोटो

Coal Smuggling In Dhanbad धनबाद : ‘धनबाद जिले की चारों दिशाओं में कोयले की बेखौफ तस्करी हो रही है. जानकार कहते है कि ‘काला हीरा’ के ‘काला कारोबार’ ने इस बार कोयलांचल में तस्करी के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिये हैं. एक अनुमान के मुताबिक जिले के विभिन्न हिस्साें से प्रतिमाह करीब 600 करोड़ रुपये के कोयले का अवैध कारोबार हो रहा है. तस्करों द्वारा बीसीसीएल-इसीएल की विभिन्न कोलियरियों से हर दिन करीब एक हजार हाइवा कोयला टपाया जा रहा है.

कोयले का अवैध कारोबार जिले के झरिया, निरसा व बाघमारा कोयलांचल से लेकर महुदा तक धड़ल्ले से संचालित हो रहा है. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी ने शुक्रवार को निरसा इलाके का निरीक्षण किया. एनजीटी को अनुमान है कि सिर्फ निरसा इलाके से ही रोज 10 हजार टन कोयले का अवैध कारोबार हो रहा है. पढ़ें विस्तृत रिपोर्ट...

वर्तमान में बीसीसीएल हर दिन औसतन 85-90 हजार टन कोयले का उत्पादन कर रहा है. एक अनुमान के मुताबिक कंपनी के उत्पादन का करीब 15-20 फीसदी कोयला चोरी हो जा रहा है. खास कर झरिया, निरसा व बाघमारा कोयलांचल में अवस्थित बीसीसीएल-इसीएल की विभिन्न कोलियरियों में तो मानो, कोयला लूट की पूरी छूट मिल चुकी है.

झरिया के एनटी-एसटी, ऐना, बस्ताकोला, कुइयां, भौंरा, पाथरडीह, टासरा व बाघमारा क्षेत्र के गजलीटांड़, मुराईडीह, सोनारडीह, चैतुडीह, तेतुलमारी, एकेडब्ल्यूएम, शताब्दी परियोजना क्षेत्रों समेत आस-पास के सभी इलाकों में बड़े पैमाने पर कोयले का अवैध कारोबार चल रहा है. यह कारोबार न सिर्फ रात में, बल्कि दिन के उजाले में भी धड़ल्ले से संचालित हो रहा है.

खास बात यह कि सिर्फ झरिया व बाघमारा कोयलांचल में अवस्थित बीसीसीएल की खदानों से हर दिन औसतन 650 से 700 हाइवा कोयला लोड हो कर निकलता है, जबकि निरसा से भी करीब 300 हाइवा कोयला प्रतिदिन टपाया जा रहा है.

इन हाइवा पर लोड कोकिंग कोल बरवाअड्डा, गोविंदपुर, बलियापुर सहित अन्य स्थानीय हाडकोक भट्ठों में खपाया जा रहा है, जबकि नन कोकिंग कोयले की खपत पश्चिम बंगाल, बिहार व यूपी की मंडियों में हो रही है. जाननेवालों का कहना है कि ऐसी कोयला चोरी पहले कभी नहीं देखने को मिली. एक अनुमान के मुताबिक धनबाद से प्रतिदिन 20 करोड़ और महीने में 600 करोड़ से अधिक के अवैध कोयले का कारोबार हो रहा है.

ऐसे समझें कोयले के अवैध कारोबार का गणित

झरिया, निरसा व बाघमारा कोयलांचल में अवस्थित बीसीसीएल-इसीएल की खदानों से हर दिन 18-20 हजार टन कोयले की अवैध निकासी हो रही है. वर्तमान में बीसीसीएल औसतन 12 हजार रुपया प्रतिटन कोयले की बिक्री कर रही है, जबकि कोकिंग कोल की बिक्री 17 हजार रुपया प्रतिटन हो रही है. ऐसे में हम अवैध कोयले का रेट औसतन 10 हजार रुपया प्रतिटन ही मान कर चलें, तो प्रतिदिन 20 करोड़ रुपया, यानी हर माह करीब 600 करोड़ रुपये के कोयले का अवैध कारोबार हो रहा है.

  • बीसीसीएल के कुल उत्पादन के

  • विभिन्न कोलियरियों से हर दिन निकल रहा 1000 हाइवा कोयला

  • स्थानीय हार्डकोक भट्ठों में कोकिंग कोल और पश्चिम बंगाल, बिहार व यूपी में खप रहा नन कोकिंग कोल

  • हर एरिया में अलग-अलग सिंडिकेट का है कब्जा

बाघमारा कोयलांचल में आर टुडू का एकछत्र राज

पूरे जिले में संचालित हो रहे कोयले के अवैध धंधे में यूं तो छोटे-बड़े कई सिंडिकेट सक्रिय हैं. परंतु हर क्षेत्र में कुछ खास लोग ही किंगपिन बने हुए हैं. जानकारी के मुताबिक निरसा कोयलांचल में संचालित हो रहे कोयले के इस अवैध धंधे पर रमेश गोप, आरएस सिंह और एम खान के सिंडिकेट का पूरी तरह से कब्जा है.

इनकी छत्रछाया में ही निरसा कोयलांचल में छोटे-बड़े तस्कर कोयले का अवैध कारोबार कर रहे हैं, जबकि झरिया में एम सिंह, जी यादव, एम यादव, एस-एस व के कुमार का कब्जा है. वहीं बाघमारा कोयलांचल में आर टुडू का एकछत्र राज है. उसकी छत्रछाया में ही कई छोटे-बड़े सिंडिकेट व धंधेबाज कोयले का अवैध कारोबार संचालित कर रहे हैं. यहां टुडू के इशारे पर ही अवैध धंधेबाजों का पूरा सिंडिकेट संचालित हो रहा है. बिना टुडू की अनुमति के काम करनेवाले लोगों की गाड़ियां पकड़ ली जा रही हैं.

पांडेय, चौधरी, शर्मा व महतो जी का पेपर

जी पांडेय, वी चौधरी, वी महतो व आर शर्मा के पेपर पर बिहार व यूपी की मंडियों में अवैध कोयला पहुंच रहा है. जबकि एस मंडल व आर गोप के पेपर पर पश्चिम बंगाल में कोयला खपाया जा रहा है. वहीं जी पांडेय के पेपर पर बिहार-यूपी से पुरुलिया तक कोयला भेजा जा रहा है. जानकारी के मुताबिक बिहार-यूपी के लिए पेपर बनाने के एवज में 350-450 रुपया प्रति टन, पश्चिम बंगाल के लिए 800 रुपया प्रति टन व पुरुलिया के पेपर के लिए 700 रुपया प्रतिटन के हिसाब से राशि की वसूली की जा रही है. सर्वाधिक 500 गाड़ियां बिहार-यूपी, 250 गाड़ियां बंगाल व करीब 100 गाड़िया हर दिन पुरुलिया भेजी जा रही हैं.

Posted By: Sameer Oraon

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