Dhanbad News: अवैध कोयला खनन से जमुनिया नदी और वन क्षेत्र के अस्तित्व पर संकट

प्रमंडलीय वन पदाधिकारी विकास पालीवाल ने अवैध खनन के खिलाफ उपायुक्त आदित्य रंजन को लिखा पत्र, कार्रवाई की मांग की.
धनबाद जिले में जमुनिया नदी का हाल ठीक-ठाक नहीं है. तोपचांची वन क्षेत्र अंतर्गत बाघमारा अंचल के माटीगढ़ा से केशरगढ़ के बीच जमुनिया नदी और इसके आसपास की वन भूमि व गैरमजरुआ भूमि से कोयले का अवैध खनन हो रहा है. प्रमंडलीय वन पदाधिकारी विकास पालीवाल ने धनबाद उपायुक्त आदित्य रंजन को पत्र लिखकर उन्हें स्थिति से अवगत कराया है. जमुनिया नदी को संकरा कर धड़ल्ले से हो रहे कोयला खनन की शिकायत कोयला मंत्रालय से भी की गयी है. 26-27 जनवरी को मंत्रालय की टीम जमुनिया नदी एवं अवैध खनन स्थल का मुआयना करने पहुंचने वाली है. इसकी सूचना ब्लॉक दो प्रबंधन को भी मिल गयी है. डीएफओ ने जिला प्रशासन, अंचल अधिकारी व संबंधित विभागों से इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए ठोस और प्रभावी कार्रवाई करने का अनुरोध किया है. पत्र में नियमित गश्त, सतत निगरानी और विधिसम्मत कदम उठाने पर जोर दिया गया है, ताकि जमुनिया नदी और माटीगढ़ा वनभूमि को हो रहे नुकसान को रोका जा सके.
माटीगढ़ा में वनभूमि के नीचे गुफा बना निकाल रहे कोयला
डीएफओ ने पत्र में अवैध खनन से हो रही पर्यावरण क्षति, संभावित दुर्घटना और सरकारी राजस्व के नुकसान का उल्लेख किया है. रिपोर्ट के अनुसार, माटीगढ़ा से केशरगढ़ के बीच जमुनिया नदी की धारा को रोककर नदी के बीचों-बीच कोयले का अवैध खनन और निष्कासन किया जा रहा है. साथ ही, नदी किनारे स्थित माटीगढ़ा वनभूमि के नीचे गुफा बनाकर कोयला निकाला जा रहा है, जिससे भू-धंसान और बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है.नदी किनारे चल रही हैं 100 से अधिक अवैध माइंस
नदी के किनारे एक किमी के दायरे में 100 से अधिक अवैध माइंस चल रही हैं. अवैध कारोबार बड़े पैमाने पर हो रहा है. धंधेबाजों के पास अवैध खनन करने के लिए सभी तरह की मशीनें उपलब्ध हैं.कोयला व पंप जब्त होने के बाद भी जारी है खनन
वन विभाग, बीसीसीएल और स्थानीय थाना ने दिसंबर माह में संयुक्त कार्रवाई की थी. इस दौरान कोयला और पंप जब्त किये गये थे. साथ ही, अवैध मुहानों की भराई करायी गयी थी. बावजूद अवैध गतिविधियों में संलिप्त लोग बार-बार मुहानों को फिर से खोदकर कोयले का खनन शुरू कर देते हैं, जिससे समस्या लगातार बनी हुई है.लाखों लोगों की जरूरतें पूरी करती है जमुनिया
धनबाद जिले में करीब 22 किलोमीटर की दूरी तय करती जमुनिया नदी दोनों किनारों पर बसे इलाकों की जीवनरेखा बनी हुई है. नदी पर एक दर्जन से अधिक सरकारी इंटेकवेल निर्भर हैं, जबकि गैर-सरकारी रूप से लाखों लोग दैनिक जरूरतों के लिए इसके जल का उपयोग करते हैं. माटीगढ़ा के पास बीसीसीएल द्वारा बनाये गये डैम से ब्लॉक दो, बरोरा की कॉलोनियों और आसपास के गांवों को पानी मिलता है.
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