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गांजा तस्करी मामला : एडीजी ने की निरसा एसडीपीओ व निलंबित इंस्पेक्टर से पूछताछ

निरसा गांजा तस्करी को लेकर दर्ज मामले की जांच करने शुक्रवार को सीआइडी एडीजी अनिल पालटा धनबाद पहुंचे. गांजा तस्करी के केस में जेल भेजने के बाद रिमांड पर लिये गये नीरज तिवारी, रवि ठाकुर और सुनील चौधरी से उन्होंने लंबी पूछताछ की

धनबाद : निरसा गांजा तस्करी को लेकर दर्ज मामले की जांच करने शुक्रवार को सीआइडी एडीजी अनिल पालटा धनबाद पहुंचे. गांजा तस्करी के केस में जेल भेजने के बाद रिमांड पर लिये गये नीरज तिवारी, रवि ठाकुर और सुनील चौधरी से उन्होंने लंबी पूछताछ की. इसके अलावा साक्ष्य के आधार पर उन्होंने मामले की जांच भी की. एडीजी ने निरसा एसडीपीओ विजय कुशवाहा और निलंबित इंस्पेक्टर उमेश सिंह से भी पूछताछ की. ये लाेग दाे बजे सर्किट हाउस पहुंचे. चार से बजे से इनसे पूछताछ शुरू हुई. बंगाल के राजीव राय से भी एडीजी ने पूछताछ की. शनिवार काे भी पूछताछ की जायेगी.

सबूतों की भी हो रही जांच : सूत्राें के मुताबिक पूछताछ में नीरज तिवारी ने बताया कि पुलिस डिपार्टमेंट के लोगों के कहने पर गांजा उसने रखा था. गाड़ी का भी इंतजाम उसी ने अपने साथियों के साथ मिल कर किया था. बाद में इसकी सूचना निरसा थाना प्रभारी उमेश सिंह को दी गयी थी. हालांकि उसके बयान के अलावा सीआइडी सबूतों की जांच भी कर रही है.

पूर्व में लिये गये बयान और तकनीकी जांच में यह बात सामने आयी है कि धनबाद पुलिस के लिए मुखबिरी का काम करनेवाले नीरज तिवारी ने खड़ी गाड़ी से गांजा जब्त करवाया था. आरोपियों ने ही फोन कर पुलिस को छापेमारी के बुलाया था, लेकिन बाद में गांजा बरामदगी के केस में इसीएलकर्मी चिरंजीत घोष के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करवा कर उसे जेल भिजवा दिया गया. तीनों आरोपियों को रविवार को वापस जेल भेज दिया जायेगा.

क्यों रची गयी साजिश : सीआइडी अभी तक की जांच में यह मान चुकी है कि चिरंजीत घोष को फंसाना साजिश था. मगर यह कहानी कहां से शुरू हुई, इसकी जांच जारी है. हालांकि पूर्व में यह बात सामने आयी है कि बंगाल के एसडीपीओ को फंसाने की कोशिश की गयी है.

पुलिस ने की गलत प्राथमिकी : गांजा बरामदगी को लेकर पुलिस ने गलत प्राथमिकी दर्ज की. अभी तक की जांच में सीआइडी ने इस बात को माना है. पूर्व में आरोपियों के बयान में पुलिस अफसरों की संलिप्तता की बात सामने आयी है. संलिप्तता इस बात को लेकर है कि गांजा रख कर चिरंजीत को फंसाने की जानकारी पुलिस अफसरों के पास पहले से थी. उक्त तीनों आरोपी षड्यंत्र में शामिल थे.

इस बात की पुष्टि उनके मोबाइल के टावर लोकेशन के आधार पर हुई है. सीआइडी ने जांच के दौरान एक मोबाइल नंबर भी हासिल किया है. संबंधित मोबाइल के बारे में पुलिस को यह जानकारी मिली है कि मोबाइल नंबर धारक पुलिस अफसरों के साथ मिल कर योजना बनाने में शामिल था. इसलिए पुलिस अफसरों की संलिप्तता के बिंदु पर जांच के लिए सीआइडी संबंधित मोबाइल नंबर का सीडीआर और टावर लोकेशन हासिल करने का प्रयास कर रही है.

Prabhat Khabar Digital Desk
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