Dhanbad News: कारखाने का गेट खुला, 15 दिनों बाद मुक्त हुईं कोलकाता में कैद पंचेत की 95 युवतियां, लौटीं घर

Updated at : 26 Feb 2025 1:48 AM (IST)
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Dhanbad News: कारखाने का गेट खुला, 15 दिनों बाद मुक्त हुईं कोलकाता में कैद पंचेत की 95 युवतियां, लौटीं घर

Dhanbad News: कारखाने का गेट खुला, 15 दिनों बाद मुक्त हुईं कोलकाता में कैद पंचेत की 95 युवतियां, लौटीं घर

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Dhanbad News: दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर के रामचंद्रपुर स्थित एक्सोडस फ्यूचरा नीट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में फंसीं निरसा, धनबाद की रहने वाली 95 युवतियों को मंगलवार को बाहर निकाला गया. मुक्त होने के बाद सभी लड़कियां ट्रेन से देर शाम अपने घर पहुंचीं, तो परिजनों ने राहत की सांस ली. इस संबंध में कारखाने के अंदर फंसीं युवतियों ने बताया कि वेतन को लेकर कारखाना प्रबंधन और स्थानीय कामगारों के बीच विवाद चल रहा है. विवाद इस कदर बढ़ गया कि उन लोगों ने कारखाने के गेट पर बाहर से ताला लगा दिया. इस कारण अंदर रहने व काम करने वाली लड़कियां फंस गयीं. परेशान युवतियों ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर अपनी आपबीती सुनायी. इस खबर को मंगलवार को प्रभात खबर ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था. इधर, निरसा विधायक अरूप चटर्जी ने बंगाल के मंत्री से बात कर कार्रवाई करने की मांग की. इसको लेकर मंगलवार की सुबह स्थानीय प्रशासन ने कारखाने के गेट का ताला खुलवाया. इसके बाद वहां फंसी युवतियां अपने घरों के लिए रवाना हो गयीं.

बोली नंदनी : अब वहां काम नहीं करेंगे

देर शाम पंचेत क्षेत्र के लूचीबाद गांव निवासी मति मुंडा व मीना मुंडा की पुत्री नंदिनी मुंडा कोलकाता से शक्तिकुंज एक्सप्रेस से कुमारधुबी स्टेशन पहुंचीं, तो माता पिता ने उसे गले लगा लिया. दरअसल, कारखाना से निकल कर अधिकांश युवतियां

शक्तिपुंज एक्सप्रेस से कुमराधुबी स्टेशन पहुंचीं.

कुछ बस से घर वापस आयीं. नंदिनी परिवार के सभी सदस्यों से गले मिली. सबकी आंखों में खुशी के आंसू थे. नंदिनी ने कहा कि वह उस कंपनी में और काम नहीं करेगी. 15 दिन से डर-डर कर रह रही थी. वह 18 महीने से उस कंपनी में काम कर रही थी, लेकिन पीएफ, ग्रेच्युटी नाम की कोई चीज ही नहीं है. साथ ही कोई सुरक्षा नहीं हैं. स्थानीय लोगों के आंदोलन के कारण फरवरी माह का वेतन भी नहीं मिला.

बोलीं गुड़िया कुमारी व पंपा कुमारी

गुड़िया व पंपा ने कहा कि उन्हें ना पीएफ मिला और न ही ग्रेच्युटी. अपने घर के पास रोजगार नहीं मिलने के कारण विवश होकर उन्हें बाहर जाना पड़ा. सभी युवतियां पंचेत क्षेत्र के बांदा, सोनाबाद, लेदाहरिया, सालुकचापड़ा, पतलाबाड़ी, बेनागड़िया आदि गांव की हैं.

विधायक अरूप चटर्जी व चंद्रदेव महतो ने की पहल

पंचेत एवं आसपास की लड़कियों को कारखाने से मुक्त कराने में निरसा के विधायक अरूप चटर्जी ने सोमवार को बंगाल के मंत्री मलय घटक से बात की थी, वहीं सिंदरी के विधायक चंद्रदेव महतो ने मंगलवार को यह मामला विधानसभा में उठाया.

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