Dhanbad News: एसएनएमएमसीएच : पीएसए प्लांट पर निर्भरता घटेगी, इमरजेंसी में भी नहीं टूटेगी सप्लाई

Published by :ANAND KUMAR UPADHYAY
Published at :04 May 2026 12:59 AM (IST)
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Dhanbad News: एसएनएमएमसीएच : पीएसए प्लांट पर निर्भरता घटेगी, इमरजेंसी में भी नहीं टूटेगी सप्लाई

Dhanbad News: सुपर स्पेशियलिटी में लगेंगे दो लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट, हर दिन 15-15 टन होगा उत्पादन, गंभीर मरीजों को मिलेगी निर्बाध ऑक्सीजन व 20 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले प्लांट के लिए स्थान का चयन शुरू.

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विक्की प्रसाद, धनबाद, राज्य के तीसरे सबसे बड़े सरकारी अस्पताल शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसएनएमएमसीएच) तथा नवनिर्मित सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में दो नए लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किए जाएंगे. इसकी तैयारी शुरू कर दी गयी है.

स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर प्लांट के निर्माण के लिए टेंडर निकाला गया है. साथ ही प्लांट के लिए स्थान चयन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गयी है. प्रत्येक प्लांट की उत्पादन क्षमता करीब 15 टन प्रति दिन होगी. यानी दोनों प्लांट मिलकर रोजाना लगभग 30 टन ऑक्सीजन का उत्पादन करेंगे. यह व्यवस्था लागू होने के बाद अस्पतालों में ऑक्सीजन की उपलब्धता न केवल स्थायी होगी, बल्कि आपात स्थिति में भी किसी प्रकार की कमी नहीं होगी. कोविड काल के दौरान सामने आयी ऑक्सीजन संकट की चुनौती को देखते हुए यह निर्णय काफी अहम माना जा रहा है.

वर्तमान में तीन पीएसए प्लांट में एक ही कर रहा काम

फिलहाल, एसएनएमएमसीएच में ऑक्सीजन की आपूर्ति मुख्य रूप से पीएसए प्लांट के माध्यम से की जा रही है. अस्पताल में कुल तीन पीएसए प्लांट लगाए गए हैं. इनमें से दो प्लांट की क्षमता 600 एलपीएम (लीटर प्रति मिनट) है. जबकि एक प्लांट 1000 एलपीएम क्षमता का है. हालांकि, इन तीनों में से अभी केवल 1000 एलपीएम क्षमता वाला प्लांट ही नियमित रूप से क्रियाशील है. बाकी दो प्लांट तकनीकी कारणों से बंद हैं. जो 1000 एलपीएम प्लांट चालू है, उसमें भी बीच-बीच में ब्रेकडाउन की समस्या आती रहती है.

लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट से क्या होगा लाभ

नए लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट स्थापित होने के बाद अस्पताल की पूरी ऑक्सीजन व्यवस्था में बड़ा बदलाव आएगा. सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि ऑक्सीजन की आपूर्ति पूरी तरह से निर्बाध और बड़े पैमाने पर उपलब्ध होगी. पीएसए प्लांट जहां सीमित क्षमता में ऑक्सीजन बनाते हैं, वहीं लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट बड़े स्तर पर उत्पादन करने में सक्षम होते हैं. लिक्विड ऑक्सीजन को स्टोरेज टैंक में सुरक्षित रखा जा सकता है, जिससे जरूरत के अनुसार गैस में परिवर्तित कर सीधे मरीजों तक पहुंचाया जा सकेगा. गंभीर मरीजों, विशेष रूप से आईसीयू, वेंटिलेटर और ऑपरेशन थिएटर में भर्ती मरीजों के लिए यह व्यवस्था जीवन रक्षक साबित होगी.

20 करोड़ की लागत से तैयार किया जायेगा प्लांट

सूत्रों के अनुसार एक लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट की स्थापना पर लगभग 10 करोड़ रुपये तक का खर्च आएगा. इस हिसाब से दोनों प्लांट की कुल अनुमानित लागत 20 करोड़ रुपये के बीच है. इस लागत में प्लांट की स्थापना, क्रायोजेनिक स्टोरेज टैंक, पाइपलाइन कनेक्शन, सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी उपकरण शामिल होंगे.

एसएनएमएमसीएच अधीक्षक डॉ डीके गिंदौरिया से सवाल-जवाब

सवाल : नए लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट लगाने की जरूरत क्यों महसूस हुई?

जवाब : वर्तमान में हमारे पास पीएसए प्लांट हैं, लेकिन उनकी क्षमता सीमित है और तकनीकी समस्याएं भी आती रहती हैं. भविष्य की जरूरतों को देखते हुए लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट जरूरी हो गया है.

सवाल : इससे मरीजों को क्या सीधा लाभ मिलेगा?

जवाब : सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि मरीजों को ऑक्सीजन की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा. विशेषकर गंभीर मरीजों के लिए यह व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण है.

सवाल : क्या इससे पीएसए प्लांट की जरूरत खत्म हो जाएगी?

जवाब : नहीं, पीएसए प्लांट बैकअप के रूप में काम करते रहेंगे. मुख्य आपूर्ति लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट से होगी, लेकिन आपात स्थिति में पीएसए प्लांट का इस्तेमाल किया जाएगा. टेंडर प्रक्रिया के बाद योजना का काम शुरू हो जाएगा.

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