SNMMCH के डेंगू वार्ड में मच्छरदानी तक नहीं, संक्रमण रोकथाम पर उठे सवाल
धनबाद के शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल
शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के डेंगू वार्ड में मरीजों के लिए मच्छरदानी तक उपलब्ध नहीं है, जिससे संक्रमण फैलने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है. मरीजों को खुद ही बचाव के उपाय करने पड़ रहे हैं, जो अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करता है.
शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसएनएमएमसीएच) में डेंगू मरीजों के इलाज के लिए बनाये गये विशेष वार्ड में मच्छरों से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं. अस्पताल प्रबंधन ने डेंगू मरीजों के लिए दो कमरों की व्यवस्था की है, लेकिन वहां भर्ती मरीजों के लिए मच्छरदानी तक उपलब्ध नहीं है. वर्तमान में वार्ड में सात मरीज भर्ती हैं. ऐसे समय में जब अस्पताल में प्रतिदिन डेंगू और बुखार से पीड़ित संभावित मरीज पहुंच रहे हैं, वार्ड में मच्छरों से सुरक्षा की व्यवस्था नहीं होना चिंता का विषय बन गया है.
संक्रमण रोकथाम के दावों पर सवाल
विशेषज्ञों के अनुसार डेंगू संक्रमित मरीज को मच्छरों से सुरक्षित रखना उपचार और संक्रमण नियंत्रण का महत्वपूर्ण हिस्सा है. यदि संक्रमित मरीज को एडीज मच्छर काट ले और वही मच्छर किसी अन्य व्यक्ति को काटे, तो संक्रमण फैलने की आशंका बनी रहती है. इसके बावजूद डेंगू वार्ड में मच्छरदानी की व्यवस्था नहीं होने से संक्रमण रोकथाम की तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं.
दो कमरों में मरीज भर्ती, लेकिन सुविधाएं अधूरी
अस्पताल में डेंगू की पुष्टि वाले मरीजों के अलावा बुखार और डेंगू के संभावित मरीजों को भी इन्हीं कमरों में भर्ती किया जा रहा है. मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि वार्ड में भर्ती होने के बावजूद उन्हें मच्छरों से बचाव के लिए खुद ही व्यवस्था करनी पड़ रही है. अस्पताल की ओर से मच्छरदानी जैसी बुनियादी सुविधा भी उपलब्ध नहीं करायी जा रही है.
पर्याप्त पंखों का भी अभाव
मरीजों ने वार्ड में पर्याप्त पंखे नहीं होने की शिकायत भी की है. उनका कहना है कि तेज हवा रहने पर मच्छरों का प्रकोप कुछ हद तक कम होता है, लेकिन पंखों की कमी के कारण परेशानी बढ़ रही है. मरीजों का कहना है कि डेंगू वार्ड में इलाज के साथ-साथ मच्छरों से बचाव की समुचित व्यवस्था भी होनी चाहिए.
मच्छरदानी नहीं होने से बढ़ सकता है जोखिम
- संक्रमित मरीज से संक्रमण की शृंखला आगे बढ़ने का खतरा बना रहता है.
- वार्ड में भर्ती अन्य मरीज भी जोखिम में आ सकते हैं.
- मरीजों के परिजन और स्वास्थ्यकर्मी भी प्रभावित हो सकते हैं.
- अस्पताल स्तर पर डेंगू नियंत्रण के प्रयास कमजोर पड़ सकते हैं.
नियमित फॉगिंग और कीटनाशक छिड़काव की जरूरत
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि डेंगू वार्ड में मच्छरदानी के अलावा नियमित फॉगिंग, कीटनाशक छिड़काव और मच्छर नियंत्रण के अन्य उपाय प्रभावी ढंग से लागू किये जाने चाहिए, ताकि संक्रमण फैलने की आशंका को कम किया जा सके.
अधीक्षक ने व्यवस्था सुधारने का दिया भरोसा
मामले पर पूछे जाने पर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. डीके गिंदौरिया ने कहा कि डेंगू वार्ड की व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाये जायेंगे. उन्होंने कहा कि मरीजों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना प्राथमिकता है और जल्द ही जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जायेंगी.
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