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कोयला के ग्रेड में हेराफेरी, 5 साल में झारखंड सरकार को 58 करोड़ का नुकसान

Updated at : 14 Jul 2025 11:55 PM (IST)
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Coal India News Dhanbad

कैग की रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा.

Coal India News: कोयला के ग्रेड में हेराफेरी की वजह से झारखंड सरकार के 5 साल में 58 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ है. सीएजी की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है. मामला वर्ष 2017 से 2022 के बीच का है. कैग ने कहा है कि धनबाद और चतरा जिले में 16 पट्टेदारों और 4 वाशरी यूनिट्स की जांच में इसका पता चला है. रिपोर्ट में जी-10 ग्रेड के कोयले को जी-11 ग्रेड का दिखाया गया है.

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Coal India News: कोयले के ग्रेड में हेरफेरी व माइनिंग विभाग की लापरवाही से झारखंड सरकार को करीब 58.39 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ है. यह खुलासा कैग (महालेखाकार) की एक ऑडिट रिपोर्ट से हुआ है. इसके मुताबिक, धनबाद और चतरा जिले के सिर्फ 16 पट्टेदारों और 4 वाशरी यूनिट्स की जांच में यह गड़बड़ी उजागर हुई है. इसमें सर्वाधिक नुकसान धनबाद जिले से होने की बात सामने आयी है.

5 साल में 106.17 लाख एमटी कोयले का किया डिस्पैच

ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2017 से वर्ष 2022 तक की अवधि में इन पट्टेदारों द्वारा 106.17 लाख मीट्रिक टन (एमटी) कोयले का डिस्पैच किया. इस पर 232.73 करोड़ रुपए राजस्व की वसूलनी होनी चाहिए थी. विभाग ने 174.34 करोड़ रुपए ही वसूले की गयी. इसमें धनबाद जिले के 12 पट्टेदारों पर 33.28 करोड़ रुपए, दो अन्य पट्टेदारों पर 6.36 करोड़ और एक अन्य पट्टेदार पर 10.37 करोड़ रुपए कम राजस्व की वसूली की गयी है. इस गड़बड़ी से डीएमएफटी में 17.52 करोड़ रुपए व एनएमइटी मद में 1.17 करोड़ रुपए का भी नुकसान हुआ है.

14.78 करोड़ की बजाय 4.41 करोड़ के राजस्व की वसूली

धनबाद के एक मामले में एस-1 ग्रेड कोयले का मूल्य 1914.12 रुपए प्रति एमटी होने के बावजूद, इसकी गणना 571.20 रुपए प्रति एमटी के हिसाब से की गयी. इस कारण अप्रैल 2017 से जून 2017 तक डिस्पैच किये गये 0.77 लाख मीट्रिक टन कोयले पर केवल 4.41 करोड़ रुपए रॉयल्टी लगायी गयी, जबकि सही मूल्य के आधार पर 14.78 करोड़ रुपए के राजस्व की वसूली होनी चाहिए थी. सिर्फ इस मामले में 10.37 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ.

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जी-10 ग्रेड को रिटर्न में जी-11 ग्रेड दिखाया गया

इसी तरह, चतरा जिला में स्थित अम्रपाली ओपन कास्ट प्रोजेक्ट से अप्रैल 2017 से दिसंबर 2019 के बीच 39.05 लाख एमटी कोयला डिस्पैच किया गया, जो वास्तव में जी-10 ग्रेड का था. लेकिन, रिटर्न में इसे जी-11 ग्रेड दर्शाया गया. जिससे 3.83 करोड़ रुपए की रॉयल्टी कम वसूली गयी.

अब भी बनी हुई हैं ऑफलाइन रिटर्न पर निर्भरता

कैग की रिपोर्ट बताया गया कि कोयला कंपनियों की ऑनलाइन मासिक रिटर्न प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए जिम्मस पोर्टल की शुरुआत की गयी थी. उक्त पोर्टल की खामियों के कारण अब भी ऑफलाइन रिटर्न पर ही निर्भरता बनी हुई है. ऑनलाइन रिटर्न में नोटिफाइड प्राइस, इन्वॉयस प्राइस और रॉयल्टी की पूरी जानकारी नहीं होती, जिससे मूल्यांकन में गड़बड़ियां हो रही हैं.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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