छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में विधानसभा में गूंजा मामला, जयराम महतो ने न्यायिक जांच की उठाई मांग
विधायक जयराम महतो का फाइल फोटो | Prabhat Khabar Network
झारखंड विधानसभा में जेपीएससी-जेएसएससी छात्रों पर लाठीचार्ज का मामला उठा. विधायक जयराम महतो ने न्यायिक जांच और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है.
फुसरो नगर. झारखंड में जेपीएससी एवं जेएसएससी में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे छात्रों पर 10 अगस्त को पुलिस द्वारा लाठीचार्ज एवं आंसू गैस के गोले छोड़े जाने का मामला मंगलवार को झारखंड विधानसभा में गूंजा. डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो ने सदन के शून्यकाल के दौरान इस घटना को गंभीर बताते हुए सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराने तथा दोषी पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध तत्काल कठोर कार्रवाई की मांग की.
विधानसभा सचिव को दिए अपने शून्यकाल के प्रस्ताव में विधायक जयराम महतो ने कहा कि जेपीएससी एवं जेएसएससी में हो रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ छात्र शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे थे. ऐसे में पुलिस प्रशासन द्वारा निहत्थे छात्रों पर बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज करना और आंसू गैस के गोले छोड़ना अत्यंत निंदनीय है.
उन्होंने सरकार से घटना की निष्पक्ष एवं न्यायिक जांच कराकर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की.विधायक ने सदन में छात्रों के अधिकारों और उनके भविष्य का मुद्दा उठाते हुए कहा कि रोजगार एवं प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग करना छात्रों का अधिकार है.
लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठा रहे छात्रों के साथ बल प्रयोग किया जाना उचित नहीं है.उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए उनकी लड़ाई लगातार जारी रहेगी और उनके साथ किसी भी प्रकार का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
उन्होंने पुलिस कार्रवाई पर आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि 10 अगस्त की घटना ने ब्रिटिश हुकूमत के दौर की याद दिला दी. कहा कि अंग्रेजों के शासनकाल में भी अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले आंदोलनकारियों को इसी तरह प्रताड़ित किया जाता था.उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में भी शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ इसी तरह का व्यवहार किया गया.
उन्होंने सरकार से मांग की कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराकर यह स्पष्ट किया जाए कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल करने का आदेश किस स्तर से दिया गया. साथ ही दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए. कहा कि छात्रों की आवाज दबाने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए. छात्रों के साथ न्याय और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित होने तक उनकी लड़ाई जारी रहेगी.
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