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क्या हत्याकांड में विधायक संजीव सिंह का हाथ है?

Updated at : 23 Mar 2017 8:59 AM (IST)
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क्या हत्याकांड में विधायक संजीव सिंह का हाथ है?

नीरज सिंह की मां, मौसी समेत अन्य परिजनों ने नीरज सिंह की हत्या में उनके चचेरे भाई व झरिया विधायक संजीव सिंह की संलिप्तता बतायी है. नीरज सिंह के चाचा पूर्व मंत्री बच्चा सिंह ने भी यह संदेह व्यक्त किया है. नीरज सिंह के अधिसंख्य समर्थकों व करीबी लोगों का भी यही मानना है. तर्क-एक […]

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नीरज सिंह की मां, मौसी समेत अन्य परिजनों ने नीरज सिंह की हत्या में उनके चचेरे भाई व झरिया विधायक संजीव सिंह की संलिप्तता बतायी है. नीरज सिंह के चाचा पूर्व मंत्री बच्चा सिंह ने भी यह संदेह व्यक्त किया है. नीरज सिंह के अधिसंख्य समर्थकों व करीबी लोगों का भी यही मानना है.
तर्क-एक : संजीव सिंह के आवास कुंती निवास के सामने जिस तरह बेखौफ होकर अपराधियों ने इस घटना को अंजाम दिया, वह बिना संजीव सिंह के इशारे के संभव नहीं. इलाके में सिंह मैंशन व रघुकुल का जैसा प्रभाव रहा है, उसमें घर के पास इस तरह के हमले की कल्पना नहीं की जा सकती थी.
गौरतलब : नीरज सिंह के परिजनों व उनके समर्थकों के तर्क से विपरीत एक बड़ा तथ्य यह है कि संजीव सिंह भी नीरज सिंह की तरह हत्या की राजनीति से दूर रहे हैं. संजीव का कोई आपराधिक अतीत नहीं रहा है. खून-खराबा व हत्या तो दूर की बात है, मारपीट व विवाद से भी संजीव हमेशा परहेज करते रहे हैं. ट्रेड यूनियन की राजनीति में संजीव की छवि सौम्य, शांत, सभ्य नेता की रही है. बतौर विधायक भी संजीव द्वारा कभी किसी अधिकारी या अन्य लोगों को हड़काने का मामला सामने नहीं आया है. संजीव आग्रह के साथ पैरवी करते रहे हैं. आमजन के गले यह बात नहीं उतर रही कि संजीव हत्या जैसी वारदात करा सकते हैं.
तर्क-दो : नीरज सिंह के समर्थकों का मानना है कि 29 जनवरी, 2017 को संजीव सिंह के करीबी रंजय सिंह की हत्या हुई थी. इस हत्या से संजीव गंभीर रूप से आहत हुए थे. रंजय के प्रतिशोध में संजीव ऐसा करा सकते हैं.
गौरतलब : यह सही है कि रंजय सिंह की हत्या से संजीव आहत थे, लेकिन हत्या के बदले हत्या जैसी मानसिकता संजीव की नहीं रही है. यदि संजीव की ऐसी मानसिकता रही होती, तो बड़े भाई राजीव रंजन सिंह की हत्या के मामले में भी वह दिखती. संजीव, विधायक हैं. सूबे में उनकी पार्टी की सरकार है. संजीव चाहते, तो रंजय हत्याकांड में नीरज सिंह व उनके समर्थकों का नाम डलवा सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया.
हत्याओं के पीछे है कोई तीसरी शक्ति?
29 जनवरी, 2017 को नीरज सिंह के आवास रघुकुल के करीब संजीव सिंह के करीबी रंजय सिंह की हत्या और अब कुंती निवास के सामने नीरज सिंह की हत्या के बाद यह कयास लगाया जा रहा है कि कहीं हत्याओं के पीछे कोई तीसरी शक्ति तो नहीं है? सिंह मैंशन परिवार से अलग होकर बने रघुकुल परिवार के बीच तीखा संबंध जगजाहिर है. यह भी किसी से छुपा नहीं है कि चचेरा भाई होने के बावजूद संजीव सिंह और नीरज सिंह एक-दूसरे के कट्टर विरोधी रहे हैं. पिछले विधानसभा चुनाव में झरिया से कांग्रेस की टिकट पर नीरज सिंह ने चुनाव भी लड़ा था. यह चर्चा भी तेज है कि संजीव सिंह व नीरज सिंह और सिंह मैंशन परिवार व रघुकुल परिवार के बीच की तकरार का फायदा कोई तीसरी शक्ति उठा रही है. वजह तमाम दूरियों व मतभेदों के बावजूद दोनों परिवारों में “एक-दूजे के खून के प्यासे” जैसे हालात नहीं बने हैं. चूंकि दोनों परिवार एक ही खानदान से आते हैं. दोनों परिवारों के कई सगे-संबंधी एक हैं. आज भी बड़ी तादाद में ऐसे लोग हैं, जिनका दोनों परिवारों में आना-जाना है. एक बार दोनों हत्या के स्टाइल पर गौर करें. रंजय सिंह को मौत की नींद सुलाने के लिए एक-दो गोली काफी थी, लेकिन हत्यारे ने आठ-आठ गोलियां दागी. इसी तरह नीरज सिंह पर भी गोलियों की बौछार कर दी गयी. इस तरह की निर्मम हत्या घृणा की पराकाष्ठा में ही संभव है.
दर्शक की भूमिका में खड़ा पुलिस तंत्र भी कटघरे में
पूरे प्रकरण में दर्शक की भूमिका में खड़ा धनबाद जिले का पुलिस तंत्र भी कटघरे में है. 29 जनवरी, 2017 को हुई रंजय सिंह की हत्या के मामले की तह तक पुलिस पहुंची होती और अपराधी सलाखों के पीछे होते, तो शायद नीरज सिंह की हत्या की घटना टल सकती थी. भीड़-भाड़ वाले इलाके में डंके की चोट पर गोलियों की बौछार करने का साहस यह भी साबित करता है कि अपराधियों में पुलिस का खौफ नहीं है. दोनों हत्या की घटनाओं में अपराधी पूरी तरह से आश्वस्त दिखे कि वह गोलियां बरसायेंगे, हत्याएं करेंगे और आराम से फरार हो जायेंगे.
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