10 माह में " 21,25,20000 की रंगदारी वसूली, पहली बार. ‘रंगदारों के सरदार’ को रंगदारी देने की बजाय एसोसिएशन ने खोला मोर्चा

Updated at : 21 Nov 2018 5:56 AM (IST)
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10 माह में " 21,25,20000 की रंगदारी वसूली, पहली बार. ‘रंगदारों के सरदार’ को रंगदारी देने की बजाय एसोसिएशन ने खोला मोर्चा

धनबाद : कोयला मंत्रालय के निर्देश पर कोल इंडिया की अनुषंगी कंपनी बीसीसीएल में ई-ऑक्शन पर रोक के बाद धनबाद जिले के बाघमारा कोयलांचल में रंगदारों के सिंडिकेट में हड़कंप मचा हुआ है. मैनुअल लोडिंग में कार्यरत मजदूरों की आड़ में रंगदारी वसूली में लगे ‘रंगदारों के सरदार’ ने ई-ऑक्शन बंद होने से हो रहे […]

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धनबाद : कोयला मंत्रालय के निर्देश पर कोल इंडिया की अनुषंगी कंपनी बीसीसीएल में ई-ऑक्शन पर रोक के बाद धनबाद जिले के बाघमारा कोयलांचल में रंगदारों के सिंडिकेट में हड़कंप मचा हुआ है. मैनुअल लोडिंग में कार्यरत मजदूरों की आड़ में रंगदारी वसूली में लगे ‘रंगदारों के सरदार’ ने ई-ऑक्शन बंद होने से हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए लिंकेज व फॉरवर्ड ऑक्शन से कोयला खरीद करनेवाले व्यवसायियों के कोयला उठाव पर प्रतिटन लगने वाले रंगदारी टैक्स में बढ़ोतरी का फरमान जारी किया है.
हालांकि इस बार हार्डकोक व्यवसायियों के संगठन इंडस्ट्री एंड कॉमर्स एसोसिएशन ने ‘रंगदारों के सरदार’ के सामने घुटने टेकने की बजाय खिलाफ में मोर्चा खोल दिया है. पूरे कोयलांचल के कोयला व्यापारियों में यह चर्चा का विषय है.
क्या है मामला
बताते हैं कि बाघमारा कोयलांचल स्थित बीसीसीएल की मुराइडीह, शताब्दी, नदखरकी, बेनीडीह, जमुनिया, जोगीडीह, महेशपुर, खरखरी, ब्लॉक-फोर, कनकनी व चैतुडीह आदि कोलियरियों में पिछले कुछ वर्षों से पूरी तरह से रंगदारों के एक सिंडिकेट का कब्जा है. जो भी लिंकेज होल्डर व्यवसायी इन कोलियरियों से कोयला की खरीदारी करते हैं, उन्हें ‘रंगदारों के सिंडिकेट’ को प्रतिटन 650 रुपये की रंगदारी देनी पड़ती है.
रंगदारों का यह सिंडिकेट ई-ऑक्शन के तहत होनेवाली कोयला की खरीद-बिक्री में भी मोटी रकम की वसूली करता रहा है. इधर, ई-ऑक्शन बंद हो गया है. इसका सीधा असर ‘रंगदारों के सिंडिकेट’ की अवैध वसूली से होनेवाली मोटी कमाई पर पड़ा है. ई-ऑक्शन बंदी के नुकसान की भरपाई को लेकर रंगदारों के सिंडिकेट के ‘सरदार’ ने रंगदारी की रकम 650 से बढ़ा कर दोगुना यानी 1250 रुपये करने का फरमान जारी कर दिया. इससे कोयला व्यवसायियों में उबाल है. इंडस्ट्री एंड कॉमर्स एसोसिएशन ने बैठक कर रंगदारी टैक्स में बढ़ोतरी तो दूर वर्तमान में लग रहे रंगदारी टैक्स भी अब देने से साफ इनकार कर दिया है.
लिंकेज होल्डरों से 21.25 करोड़ की रंगदारी वसूली
बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों से बाघमारा कोयलांचल स्थित बीसीसीएल की एक दर्जन से अधिक कोलियरियों पर ‘रंगदारों के सिंडिकेट’ का कब्जा है. यहां से कोयला उठाव के लिए लिंकेज होल्डरों को प्रतिटन 650 रुपये की रंगदारी देनी पड़ती है. इसमें करीब 250 रुपये का बंटवारा लोडिंग मजदूर, कांटा, डिस्पैच, प्रोजेक्ट ऑफिसर, सेल्स अधिकारी, सीआइएसएफ के बीच होता है.
शेष 400 रुपये ‘रंगदारों के सिंडिकेट’ के ‘सरदार’ की जेब में चले जाते हैं. इस हिसाब से यदि जनवरी से अक्तूबर 2018 तक लिंकेज के तहत कोयला उठाव के दौरान व्यवसायियों द्वारा किये जानेवाले भुगतान पर गौर करें, तो 21.25 करोड़ (21,25,20,000 रुपये) की राशि होती है. यह राशि सीधे तौर पर ‘रंगदारों के सिंडिकेट’ के ‘सरदार’ की जेब में गयी है. बिना किसी रोक-टोक के इतनी बड़ी राशि की वसूली की पूरे क्षेत्र में चर्चा रही है.
किस कोलियरी से कितनी वसूली
महेशपुर व खरखरी कोलियरी में लिंकेज होल्डरों से 650 रुपये लोडिंग के नाम पर लिये जाते हैं. इसमें 200 रुपये प्रतिटन लोडिंग मजदूरों को दिया जाता है, जबकि 450 रुपये रंगदारों के सिंडिकेट को चला जाता है.
नदखरकी, बेनीडीह, जमुनियां कोलियरी में लिंकेज होल्डरों से 650 रुपये लोडिंग के नाम पर लिये जाते हैं. इसमें 230 रुपये प्रतिटन लोडिंग मजदूरों को दिया जाता है, जबकि 420 रुपये रंगदारों के सिंडिकेट को चला जाता है.
शताब्दी, मुराइडीह फुलारीटांड़ में 650 की वसूली कर मैनुअल लोडिंग मजदूरों को 250 रुपये प्रतिटन मजदूरी दी जाती है. शेष 400 रुपये रंगदारों के सिंडिकेट को चला जाता है.
भाजपा विधायक के आतंक से पीड़ित हैं कोयला व्यवसायी : सिंह
धनबाद. पहली बार धनबाद जिले के हार्डकोक उद्यमियों के संगठन इंडस्ट्री एंड कॉमर्स एसोसिएशन ने बाघमारा में रंगदारी वसूली के खिलाफ मोर्चा खोला है. एसोसिएशन के अध्यक्ष बीएन सिंह ने कहा कि केंद्र व राज्य सरकार झारखंड में छोटे-बड़े उद्योग लगाने के लिए प्रयासरत है. इसके लिए मोमेंटो झारखंड का आयोजन हुआ. दूसरी ओर भाजपा के विधायक ढुलू महतो के आंतक से नये उद्योग लगाना तो दूर पुराने उद्योग भी आज बंदी के कगार पर हैं.
लोडिंग मजदूरों की आड़ में खुलेआम रंगदारी वसूली हो रही है. सरकार में उच्च पदस्थ लोग कार्रवाई करने की बजाय संरक्षण देने में जुटे है. श्री सिंह ने कहा कि लिंकेज होल्डर व्यवसायी से लोडिंग मजदूरों के नाम पर पैसे की वसूली की जाती है. श्री सिंह ने कहा कि यदि सही मायने में बाघमारा विधायक मजदूरों के मसीहा हैं.
मजदूरों का भला चाहते हैं, तो वे मजदूरों की लोडिंग का भुगतान मनरेगा, गैस सब्सिडी और अन्य सरकारी योजनाओं की तरह भीम एप या फिर सीधे उनके बैंक खातों में भुगतान सुनिश्चित कराएं, ताकि मजदूरों को सही मजदूरी मिल सके और रंगदारी प्रथा समाप्त हो सके. श्री सिंह ने राज्य व केंद्र सरकारों से मामले में त्वरित कार्रवाई करने तथा रंगदारी वसूली में शामिल दोषियों पर अविलंब कार्रवाई करने की मांग की है.
रंगदारी वसूली होने की बात नहीं मालूम : ढुलू महतो
बाघमारा विधायक ढुलू महतो ने लिंकेज होल्डरों से रंगदारी वसूली के मामले में अनभिज्ञता जाहिर की है. प्रभात खबर से बातचीत में श्री महतो ने कहा-‘उन्हें लिंकेज होल्डरों से रंगदारी वसूली होने की बात नहीं मालूम है. लिंकेज होल्डर कोयला लोडिंग करनेवाले मजदूरों को मजदूरी का भुगतान करते हैं. मजदूरों ने यदि मजदूरी की राशि बढ़ाने की बात कही है, तो यह उनका मामला है. इससे मेरा कुछ भी लेना-देना नहीं है. इस बारे में लोडिंग मजदूरों से बातचीत करने के बाद ही मैं कुछ कह सकता हूं.’
श्री महतो ने कहा कि ‘मैं क्षेत्र का जनप्रतिनिधि हूं, यदि मेरे पास मजदूर या हार्डकोक उद्यमी अपनी समस्या लेकर आते हैं, तो उसका समाधान करूंगा.’ इंडस्ट्री एंड कॉमर्स एसोसिएशन के आरोप के संबंध में श्री महतो ने कहा-‘जिनसे मैंने रंगदारी मांगी है, वह खुलकर सामने आयें और साबित करें कि मैंने कब, किससे और कितने रुपये की रंगदारी मांगी. मेरे सिर पर गलत आरोप का नारियल फोड़नेवालों को मुंहतोड़ जवाब दूंगा. कोयला का रोड सेल बंद हो जाने से हजारों मजदूरों की रोजी-रोटी छिन गयी है. इसकी चिंता किसी को नहीं है. यहां गुंडागर्दी करके किसी को व्यापार नहीं करने दिया जायेगा. किसी को गरीब मजदूरों के हक के साथ खिलवाड़ करने नहीं दिया जायेगा.’
फ्लोर प्राइस पर स्लरी का उठाव शुरू, 21 लाख का नुकसान
बाघमारा. बीसीसीएल के ब्लॉक टू एरिया की मधुबन कोल वाशरी में स्लरी का उठाव शुरू हो गया है़ वाशरी के स्टॉक में पड़े दो लाख टन वाशरी फोर ग्रेड की स्लरी में से 2900 टन का डीओ ई-ऑक्शन के माध्यम से डीओ धारकों ने लगाया है. प्रतिटन 3500 रुपये में बिकने वाली स्लरी का उठाव 2766 रुपये के फ्लोर प्राइस पर हो रहा है़ यानी प्रतिटन 734 रुपये के हिसाब से बीसीसीएल को 21,28,600 रुपये का नुकसान हो रहा है. यह राशि सीधे रंगदारों के सिंडिकेट को मिल रही है. रंगदारों के सिंडिकेट के समर्थकों के नाम पर 2900 टन का अलग-अलग डीओ लगाया गया है़
डर से नहीं लगा कोई डीओ
कोलियरी क्षेत्र में रंगदारों के सिंडिकेट के सरदार का खौफ इतना बढ़ गया है कि डर से कोई व्यवसायी वाशरी से स्लरी उठाव के लिए डीओ नहीं लगाना चाह रहा. पहले भी इसी तरह स्लारी उठाव के लिए ऑफर निकला था. झरिया के एक कोयला व्यवसाय ने 100 टन का डीओ लगाया, लेकिन रंगदारों के सिंडिकेट ने स्लरी उठने नहीं दिया़ इसके बाद यहां स्लरी की बिडिंग बंद हो गयी. घाटे में चल रही मधुबन वाशरी जमकर स्लरी की चोरी शुरू हो गयी. वाशरी के घाटे को पाटने तथा स्लरी की चोरी रोकने के लिए बीसीसीएल मुख्यालय प्रबंधन रेस हुआ और 2900 टन का ऑफर निकाला गया.
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