गुंडा टैक्स देकर उठाना पड़ता है कोयला

Updated at : 27 Sep 2018 5:38 AM (IST)
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गुंडा टैक्स देकर उठाना पड़ता है कोयला

धनबाद : इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बीएन सिंह ने कहा कि बीसीसीएल की कोयला वितरण नीति से हमलोग पहले से त्रस्त हैं. अब कोयला उठाव के लिए गुंडा टैक्स देना पड़ता है. लोडिंग की प्रक्रिया को आसान करने के नाम पर स्थानीय दबंग और राजनीतिक लोगों के पिट्ठू हमलोगों से रंगदारी वसूलते हैं. […]

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धनबाद : इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बीएन सिंह ने कहा कि बीसीसीएल की कोयला वितरण नीति से हमलोग पहले से त्रस्त हैं. अब कोयला उठाव के लिए गुंडा टैक्स देना पड़ता है. लोडिंग की प्रक्रिया को आसान करने के नाम पर स्थानीय दबंग और राजनीतिक लोगों के पिट्ठू हमलोगों से रंगदारी वसूलते हैं. इस मामले पर हमारे जनप्रतिनिधि मौन बने हुए हैं.
प्रशासन भी पंगु हो गया है. बार-बार निवेदन करने के बाद भी रंगदारों पर कोई कार्रवाई नहीं होती. इसके चलते उद्योगों की स्थिति दयनीय हो गयी है. वह बुधवार को जोड़ाफाटक रोड स्थित इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स एसोसिएशन के सभागार में एसो. की 85 वीं आम सभा को संबोधित कर रहे थे. सिंह ने कहा कि कोयला कंपनी की त्रुटिपूर्ण मूल्य निर्धारण नीति के कारण कई ढंग से अधिभार लगाकर हमसे अनुचित कीमत वसूली जाती है. जीएसटी लागू होने के बाद भी बाजार फीस, रॉयल्टी आदि शुल्क वसूला जाता है.
इससे कोयला की कीमत में 11 फीसदी की बढ़ोतरी हो जाती है. जबकि अन्य राज्यों में बाजार फीस व रॉयल्टी आदि नहीं लगते हैं. 11 फीसदी कीमत अधिक तो दे रहे हैं, उतना ही गुंडा टैक्स भी देना पड़ता है. सरकार से आग्रह है कि रंगदारी प्रकरण में हस्तक्षेप करे अन्यथा हार्ड कोक इंडस्ट्रीज की स्थिति और भी दयनीय हो जायेगी. उपाध्यक्ष रतन लाल अग्रवाल ने स्वागत भाषण व वरीय उपाध्यक्ष एसके सिन्हा ने धन्यवाद ज्ञापन किया.
मुख्य बिंदु
हार्डकोक उद्योग से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष लाखों परिवारों का भरण पोषण
कोकिंग कोल को बिजली उत्पादन के लिए जलाना एक तरह का अपराध है
कोयला नियामक प्राधिकार को अस्तित्व में लाया जाये
पार्किंग में दुकान और सड़क पर पार्किंग हो रही है
धनबाद में हवाई सेवा की जरूरत
जनप्रतिनिधि असहाय हैं
बीएन सिंह ने कहा कि डीसी लाइन बंद कर दी गयी. रेल सेवा बढ़ाने की बजाय घटा दी गयी. हवाई सेवा आज तक चालू नहीं हो पायी. एम्स देवघर चला गया और आइआइएम रांची. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे जनप्रतिनिधि इतने असहाय हैं. सरकार में रहते हुए कोई नयी सुविधा तो नहीं मिली, जो थी उस पर भी ग्रहण लग गया.
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