एक साल में माइक्रोस्कोप की कीमत डेढ़ गुणा और लिटमस पेपर की छह गुणा बढ़ गयी
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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लैब कीट खरीदने को प्रत्येक विद्यालय को मिले थे 25000 रुपये स्कूलों ने आरएमएसए की पसंद की एजेंसी से बिना टेंडर की थी खरीदारी धनबाद : जिले के सरकारी हाई स्कूलों में पिछले वर्ष जून में लैब के साजो सामान की खरीदारी में भारी गड़बड़ी का मामला सामना आया है. 2016 में जिस इक्विपमेंट को […]
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लैब कीट खरीदने को प्रत्येक विद्यालय को मिले थे 25000 रुपये
स्कूलों ने आरएमएसए की पसंद की एजेंसी से बिना टेंडर की थी खरीदारी
धनबाद : जिले के सरकारी हाई स्कूलों में पिछले वर्ष जून में लैब के साजो सामान की खरीदारी में भारी गड़बड़ी का मामला सामना आया है. 2016 में जिस इक्विपमेंट को 4500 रुपये में खरीदा गया था, 2017 में जब उसी इक्विपमेंट की दोबारा खरीदारी हुई तो उसकी कीमत 3000 रुपये बढ़ गयी. इस तरह अन्य उपकरणों की खरीदारी में भी एक साल में दो गुणा से छह गुणा तक कीमत चुकायी गयी. यह सब कुछ राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (आरएमएसए) की नाक के नीचे हुआ. दरअसल 2017 में सभी स्कूलों में लैब के साजो सामान की खरीदारी आरएमएसए की निगरानी में हुई थी. आरोप यह भी है कि सभी स्कूलों में खरीदारी आरएमएसए की ओर से सुझायी गयी दो एजेंसियों से ही की गयी़
क्या है मामला
आरएमएसए के माध्यम से जिले के सौ से अधिक सरकारी उच्च विद्यालयों में वर्ष 2016-17 में लैब का साजो सामान खरीदने के लिए प्रति स्कूल 25 हजार रुपये का फंड आया था. सभी स्कूलों को अलग-अलग सप्लायरों से कोटेशन मंगा कर सबसे कम दर वाले कोटेशन पर खरीदारी करनी थी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. आरएमएसए की ओर से केवल दो सप्लायरों (धनबाद स्पोर्ट्स और आदर्श प्रिंटिंग प्रेस) से लैब का समान खरीदने का फरमान जारी कर दिया गया. दोनों सप्लायरों के बीच क्षेत्र का विभाजन किया गया. इसमें एक सप्लायर को निरसा, गोविंदपुर और बलियापुर का क्षेत्र दिया गया, जबकि दूसरे को झरिया, बाघमारा, धनबाद व तोपचांची क्षेत्र के स्कूलों में सप्लाई का काम सौंपा गया. इस खरीदारी से विभाग को लाखों का चूना लगा है. मामला सामने आने के बाद अब अधिकारी मामले की जांच की बात कर रहे हैं.
एक साल पहले टेंडर से हुई थी खरीदारी
एक साल पहले 2016 में कुछ कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों में टेंडर के माध्यम से लैब के लिए यही साजो सामान खरीदे गये थे. लेकिन दोनों की कीमतों में आसमान जमीन का फर्क है. ऐसे दो बिल प्रभात खबर के पास हैं. इससे स्पष्ट होता है कि 2017 में हुई खरीदारी में इनकी कीमत बाजार दर से कई गुणा अधिक लगायी गयी है. सबसे बड़ी बात है कि बिना किसी जांच के दोनों सप्लायरों को उनके बिल का भुगतान कर दिया गया.
दोनों सप्लायरों की कीमतों में भी अंतर
2017 में लैब के साजो सामान की सप्लाइ करने वाले दोनों सप्लायरों की कीमत में भी अंतर है. जहां आदर्श प्रिंटिंग प्रेस ने कम्पाउंड माइक्रस्कोप की कीमत 7000 रुपये लगायी है. वहीं धनबाद स्पोर्ट्स ने इसकी कीमत 7500 और 6900 रुपये लगायी थी. जबकि इसी कम्पाउंड माइक्रोस्कोप को कुछ कस्तूरबा विद्यालयों ने टेंडर के माध्यम से वर्ष 2016 में 4500 रुपये में खरीदा था. इसी तरह लिटमस पेपर की खरीदारी 40 रुपये में की गयी थी. लेकिन 2017 में इसकी कीमत 245 रुपये हो गई थी.
जिला शिक्षा पदाधिकारी को जानकारी नहीं
जिला शिक्षा पदाधिकारी माधुरी कुमारी ने कहा कि उन्हें ऐसी गड़बड़ी की जानकारी नहीं है. जबकि 2017 में उनके कार्यकाल के दौरान ही एक सप्लायर से सभी स्कूलों ने लैब का सामान खरीदा था. हालांकि वे कहती हैं कि अगर ऐसी गड़बड़ी सामने आ रही है तो इसकी जांच होगी.
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