सहरसा में 7.49 लाख से बना शौचालय महीनों से बंद, ब्लॉक ऑफिस पहुंचने वाली महिलाओं की बढ़ी परेशानी
प्रखंड कार्यालय परिसर में बंद पड़ा सार्वजनिक शौचालय
Saharsa News: सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड कार्यालय परिसर में 7.49 लाख रुपये से बना सार्वजनिक शौचालय महीनों से बंद पड़ा है, जिससे महिलाओं और बुजुर्गों को परेशानी हो रही है.
सिमरी बख्तियारपुर, सहरसा से आयुष की रिपोर्ट
Saharsa News: सुबह से ही प्रखंड कार्यालय परिसर में लोगों की भीड़ जुटने लगती है. कोई पेंशन के लिए आया है, तो कोई जाति, आय और निवास प्रमाणपत्र बनवाने के लिए. महिलाएं, बुजुर्ग और दिव्यांग भी अपनी बारी का इंतजार करते हुए घंटों परिसर में बैठे रहते हैं. लेकिन इन सबके बीच एक ऐसी समस्या है, जो हर दिन लोगों की परेशानी बढ़ा रही है. लाखों रुपये की लागत से बना सार्वजनिक शौचालय आज भी बंद पड़ा है और उसके दरवाजे पर ताला लटका हुआ है.
करीब 7.49 लाख रुपये की लागत से निर्मित यह सार्वजनिक शौचालय आम लोगों की सुविधा के लिए बनाया गया था. लेकिन निर्माण कार्य पूरा होने के महीनों बाद भी इसे नियमित रूप से शुरू नहीं किया जा सका है. इसका खामियाजा प्रतिदिन प्रखंड कार्यालय आने वाले लोगों को भुगतना पड़ रहा है.
आखिर क्यों बंद पड़ा है शौचालय?
जानकारी के अनुसार, षष्ठम वित्त आयोग की योजना के तहत 7,49,700 रुपये की लागत से सार्वजनिक शौचालय का निर्माण कराया गया था. इस योजना की अनुशंसा प्रखंड प्रमुख शबनम कुमारी ने की थी.
10 मई 2023 को तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी डॉ. अमित कुमार की उपस्थिति में इसका शिलान्यास किया गया था. निर्माण कार्य समय पर पूरा भी हो गया. लेकिन इसके बावजूद आज तक शौचालय का नियमित संचालन शुरू नहीं हो सका है. स्थानीय लोगों का कहना है कि कभी-कभार ही इसका ताला खोला जाता है.
बिहार की ताजा खबरों के लिए क्लिक करें
महिलाओं और बुजुर्गों की बढ़ी मुश्किल
प्रखंड कार्यालय में प्रतिदिन पेंशन, मनरेगा, सामाजिक सुरक्षा, राजस्व और विभिन्न प्रमाणपत्रों से संबंधित कार्यों के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं. ऐसे में शौचालय की सुविधा नहीं मिलने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
सबसे ज्यादा दिक्कत महिलाओं, बुजुर्गों और अस्वस्थ लोगों को होती है. कई महिलाओं ने बताया कि मजबूरी में उन्हें अपना काम अधूरा छोड़कर घर लौटना पड़ता है. वहीं कई लोग घंटों तक असुविधा झेलने को विवश हैं.
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब शौचालय का निर्माण पूरा हो चुका है, तो इसे आम लोगों के लिए शुरू क्यों नहीं किया जा रहा है. लोगों का आरोप है कि यह प्रशासनिक उदासीनता का उदाहरण है.
नियमित रूप से प्रखंड कार्यालय आने वाले लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द शौचालय का संचालन शुरू करने की मांग की है, ताकि आमजन को मूलभूत सुविधा का लाभ मिल सके.
Saharsa News: लोगों में आक्रोश
लोगों की मांग है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए बंद पड़े सार्वजनिक शौचालय को तत्काल चालू कराए. इससे न सिर्फ लोगों की परेशानी कम होगी, बल्कि सरकारी योजनाओं के तहत बनाए गए संसाधनों का सही उपयोग भी सुनिश्चित हो सकेगा.
किसी भी सरकारी कार्यालय में आने वाले लोगों को सम्मानजनक और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है. ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि लोगों की यह मांग कब तक पूरी होती है.
इसे भी पढ़ें: बिहार को मोदी सरकार ने दिया 2900 करोड़ का तोहफा, जानिए कैसे खर्च होगा पैसा और क्या है 50-50 का फॉर्मूला?
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










