सहरसा के इस 300 साल पुराने मंदिर में छिपा है आस्था का 'महासागर'! नाग पंचमी पर उमड़ेगा सैलाब, दान में मिली थी 22 एकड़ जमीन

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फोटो- भगवती मंदिर | Prabhat Khabar Network

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सहरसा के मैना गांव में स्थित मां भगवती विषहरी का 300 साल पुराना पौराणिक मंदिर भक्तों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है. आगामी नाग पंचमी पर यहां विशेष पूजा-अर्चना और मेले का आयोजन होगा, जहां हजारों श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुंचेंगे.

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सहरसा, सोनवर्षाराज. प्रखंड मुख्यालय से करीब पांच किलोमीटर दक्षिण परड़िया पंचायत के मैना गांव में एनएच-107 के पूरब स्थित मां भगवती विषहरी का पौराणिक मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है. यहां बिहार के विभिन्न जिलों से श्रद्धालु मां के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं. स्थानीय मान्यता के अनुसार मां के दरबार में सच्चे मन से मांगी गयी मनोकामना पूरी होती है.

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नाग पंचमी पर उमड़ेगा श्रद्धालुओं का सैलाब

आगामी मंगलवार को नाग पंचमी के अवसर पर मंदिर परिसर में मां भगवती विषहरी और नाग देवता की विशेष पूजा-अर्चना होगी. आसपास के गांवों के अलावा दूर-दराज से भी हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है. भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था की जा रही है. कई श्रद्धालु यहां मंत्र-साधना और सिद्धि के लिए भी पहुंचते हैं. ग्रामीणों के अनुसार मैना गांव में मां भगवती विषहरी की पूजा करीब 300 वर्षों से होती आ रही है. वर्ष 1961 से नाग पंचमी के अवसर पर यहां प्रतिवर्ष मेले का आयोजन किया जा रहा है.

बारिश से भी जुड़ी है मां विषहरी की आस्था

ग्रामीणों के अनुसार पुराने समय में जब लंबे समय तक बारिश नहीं होती थी, तब आसपास के गांवों के लोग कमल पुष्प लेकर मां विषहरी की सामूहिक पूजा करते थे. पूजा के बाद खीर का भोग लगाकर महाप्रसाद बांटा जाता था. ग्रामीणों का दावा है कि पूजा के बाद कई बार जोरदार बारिश हुई, जिससे किसानों के बीच खुशहाली आयी और मां के प्रति लोगों की आस्था और मजबूत हुई. ग्रामीणों में आज भी कहावत प्रचलित है, "ओध दिवारी बोरने थान, मैना के देवी घर-घर करलक पियान."

मंदिर के लिए दान में मिली 22 एकड़ जमीन

ग्रामीणों के अनुसार देहद गांव निवासी जमींदार ठाकुर नारायण सिंह ने मां विषहरी मंदिर के लिए करीब 22 एकड़ जमीन दान में दी थी. शुरुआत में वर्तमान मंदिर से पश्चिम स्थित गांव में एक छोटे कच्चे मकान में मां की पूजा होती थी. करीब 50 वर्षों बाद लगभग 1750 ईस्वी के आसपास वर्तमान मंदिर परिसर में कच्चे मकान में मां की स्थापना की गयी.

राजा हरिवल्लभ नारायण सिंह ने बनवाया पक्का मंदिर

ग्रामीणों के मुताबिक बाद में सोनवर्षाराज स्टेट के राजा हरिवल्लभ नारायण सिंह ने यहां पक्का मंदिर का निर्माण कराया. बताया जाता है कि राजा भी मां विषहरी के उपासक थे. इसके बाद वर्ष 2002 में मां भगवती की वर्तमान नवनिर्मित मंदिर में विधिवत स्थापना की गयी.

नाग पंचमी पर भक्तिमय हो जाता है पूरा क्षेत्र

नाग पंचमी के अवसर पर मैना गांव में धार्मिक उत्सव का माहौल बन जाता है. मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही होती है. मेले को लेकर स्थानीय स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं. इस दौरान पूरा क्षेत्र मां विषहरी की भक्ति में डूबा नजर आयेगा.


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