आज का दर्शन : बाबा मटेश्वर धाम में सावन व महाशिवरात्रि पर उमड़ती है आस्था की भीड़

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बाबा मकेश्वर धाम मंदिर | Prabhat Khabar Network

बाबा मटेश्वर धाम महादेव मंदिर, बिहार के सहरसा में स्थित एक प्राचीन शिव मंदिर है जो आस्था और लोकविश्वास का केंद्र है. सावन और महाशिवरात्रि के पावन अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है, जो मंदिर के महत्व को दर्शाता है.

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सहरसा : सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड के काठो गांव स्थित बाबा मटेश्वर धाम महादेव मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का प्रमुख केंद्र है. वर्षों से यह मंदिर शिवभक्तों की श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक बना हुआ है. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने वाले भक्तों की मनोकामना बाबा मटेश्वरनाथ पूरी करते हैं. यही कारण है कि आसपास के गांवों के अलावा दूर-दराज क्षेत्रों से भी श्रद्धालु जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं.

मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक और शांत वातावरण का अनुभव होता है. सुबह की आरती से लेकर शाम की पूजा तक यहां भक्तों की आवाजाही बनी रहती है. स्थानीय लोगों के अनुसार, बाबा मटेश्वरनाथ की कृपा से क्षेत्र में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है.

स्वयंभू शिवलिंग होने की मान्यता

मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी प्राचीनता और लोकआस्था है. स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां स्थापित शिवलिंग स्वयंभू स्वरूप में प्रकट हुआ था. तभी से यहां पूजा-अर्चना का क्रम लगातार जारी है. सावन माह में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगाजल लेकर बाबा का जलाभिषेक करते हैं. हर-हर महादेव के जयकारों से मंदिर परिसर का वातावरण भक्तिमय हो जाता है.

सावन में हजारों श्रद्धालु करते हैं जलाभिषेक

सावन और महाशिवरात्रि के अवसर पर बाबा मटेश्वर धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. मुंगेर जिले के छर्रापट्टी से भी सावन माह में श्रद्धालु गंगाजल लेकर बाबा के जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं. यह सिलसिला पूरे सावन महीने चलता है. इस दौरान हजारों शिवभक्त बाबा के दरबार में पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं.

महाशिवरात्रि के अवसर पर कला एवं संस्कृति विभाग की ओर से यहां दो दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाता है. मंदिर में सुबह से देर रात तक पूजा-पाठ, रुद्राभिषेक और भजन-कीर्तन का दौर चलता रहता है. विशेष अवसरों पर मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बाबा का विशेष शृंगार किया जाता है.

मनोकामना पूर्ण होने पर चढ़ाते हैं बेलपत्र और धतूरा

कई श्रद्धालु मनोकामना पूरी होने के बाद बाबा को बेलपत्र, धतूरा और विशेष प्रसाद अर्पित करते हैं. शाम की आरती में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष श्रद्धालु शामिल होते हैं. भक्तों का मानना है कि बाबा के दरबार में सच्ची श्रद्धा से की गयी प्रार्थना अवश्य स्वीकार होती है.

धार्मिक पर्यटन के रूप में बढ़ रही पहचान

स्थानीय लोगों के अनुसार, बाबा मटेश्वर धाम अब धार्मिक पर्यटन के केंद्र के रूप में भी पहचान बना रहा है. यहां आने वाले श्रद्धालु पूजा-अर्चना के साथ ग्रामीण परिवेश और आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव करते हैं. मंदिर परिसर में सुविधाओं के विकास के साथ श्रद्धालुओं की संख्या में भी लगातार वृद्धि हो रही है.


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Vinay Kumar Mishra

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By Vinay Kumar Mishra

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