पाकिस्तान में सुबह-सुबह दो बार आया भूकंप, 5.5 और 5.3 तीव्रता के झटकों से हिली धरती

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रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.5 और 5.3 की रही.

Pakistan Double Earthquake: नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी ने जानकारी दी कि पाकिस्तान में शनिवार सुबह भूकंप के दोहरे झटके महसूस किए गए. एक सुबह 6.15 बजे आया, जबकि दूसरा लगभग 8.30 बजे. दोनों की तीव्रता 5 मैग्नीट्यूड से ज्यादा रही.

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Pakistan Double Earthquake: दुनिया इस महीने में भूकंप के प्रकोप का सामना कर रही है. 8 जून को फिलीपींस की धरती में हलचल मची. इसके बाद दो दिन पहले वेनेजुएला में अर्थक्वेक ने तबाही मचाई. अब पाकिस्तान में शनिवार को भूकंप के दोहरे झटके महसूस किए गए. नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, भूकंप की तीव्रता 5.5 मापी गई. हालांकि, शुरुआती जानकारी के मुताबिक इस भूकंप से अभी तक किसी की मौत या संपत्ति को नुकसान पहुंचने की खबर सामने नहीं आई है.

यूरोपियन-मेडिटेरेनियन सीस्मोलॉजिकल सेंटर (EMSC) और अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) की रिपोर्ट के मुताबिक, भूकंप का केंद्र पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में स्थित बरखान शहर से करीब 63 किलोमीटर की दूरी पर था. इसकी गहराई धरती के अंदर लगभग 35 किलोमीटर दर्ज की गई. हालांकि, NCS ने भूकंप की गहराई 40 किलोमीटर बताई गई है. यह भूकंपीय हलचल भारतीय समय के अनुसार सुबह करीब 8:36 बजे महसूस की गई.

सुबह-सुबह आया पहला भूकंप

यह भूकंप ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान में इससे कुछ घंटे पहले ही एक और झटका महसूस किया गया था. नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी ने बताया कि शुक्रवार शाम पाकिस्तान में 5.3 तीव्रता का भूकंप आया था. NCS ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया था कि शनिवार को सुबह 6.15 बजे आए भूकंप का केंद्र जमीन से करीब 75 किलोमीटर की गहराई में था.

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एक ही दिन में लगातार दो दिनों में भूकंप के झटकों के बाद लोगों में चिंता का माहौल है, हालांकि प्रशासन की ओर से किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं दी गई है.

धरती पर भूकंप क्यों आते हैं?

धरती की ऊपरी सतह कठोर है, जिसे क्रस्ट कहा जाता है. यह कई विशाल और छोटे टुकड़ों में बंटी हुई है, जिन्हें टेक्टोनिक प्लेट्स कहते हैं. इसी क्रस्ट के नीचे धरती के अंदर गर्म तरल मैग्मा है. इसी मैग्मा पर ये प्लेट्स तैरती रहती हैं.  जब ये प्लेटें आपस में टकराती हैं या इनके बीच दबाव बढ़ जाता है, तो अचानक इनमें हलचल होती है और बड़ी मात्रा में ऊर्जा बाहर निकलती है. यही ऊर्जा धरती की सतह पर कंपन पैदा करती है, जिसे हम भूकंप के रूप में महसूस करते हैं. इन्हें  इसके अलावा ज्वालामुखी गतिविधियां, बड़े बांधों का निर्माण और खनन के दौरान होने वाले विस्फोट जैसी मानवीय गतिविधियां भी छोटे स्तर के भूकंप पैदा कर सकती हैं. 

भूकंप की तीव्रता को मापने के लिए आमतौर पर रिक्टर स्केल का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे मैग्नीट्यूड 1 से 10 तक के बीच संख्या में मापा जाता है. भूकंप एक ऐसी प्राकृतिक आपदा है जो कम समय में बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा सकती है. प्राथमिक (P) तरंगें और द्वितीयक (S) तरंगें भूकंप से पैदा होने वाली दो प्रमुख प्रकार की बॉडी वेव्स होती हैं.

P-वेव्स (Primary Waves) सबसे तेज गति से चलने वाली भूकंपीय तरंगें होती हैं. ये धरती के अंदर मौजूद पदार्थों को आगे-पीछे दबाकर और फैलाकर आगे बढ़ती हैं, ठीक उसी तरह जैसे ध्वनि तरंगें काम करती हैं. इनकी खास बात यह है कि ये ठोस, तरल और गैस तीनों तरह के माध्यमों से गुजर सकती हैं. ये सबसे पहले पहुंचती हैं.

S-वेव्स (Secondary Waves) की गति P-वेव्स की तुलना में धीमी होती है. ये जमीन को ऊपर-नीचे या एक तरफ से दूसरी तरफ हिलाने वाली गति पैदा करती हैं. S-वेव्स केवल ठोस पदार्थों के अंदर ही यात्रा कर सकती हैं और तरल माध्यम से नहीं गुजर पातीं. यह सबसे ज्यादा घातक होती हैं, क्योंकि यह बाद में पहुंचती हैं और धरती को ऊपर-नीचे हिलाती हैं.

भारत में हिमालयी क्षेत्र भूकंप के प्रति सबसे ज्यादा संवेदनशील है. भारत में दिसंबर 2025 तक भूकंप के पांच जोन बनाए गए थे. लेकिन अब छठवां जोन (उच्चतम जोखिम) भी बना दिया गया है. इसमें  पूरे हिमालयी क्षेत्र यानी जम्मू कश्मीर से पूर्वोत्तर भारत तक को रखा गया है. हिमालय विश्व के सबसे सक्रिय टकराव क्षेत्रों में से एक है. यह भारतीय और यूरेशियन प्लेटों के अभिसरण (एक साथ मिलने या एक बिंदु पर घर्षण करने) के कारण बना है. दोनों प्लेटों के बीच प्रति वर्ष 5 सेमी का अभिसरण हो रहा है.

भारत के अन्य भूकंप जोन हैं

जोन V बहुत अधिक जोखिम: यह भारत का सबसे संवेदनशील भूकंपीय क्षेत्र है. इसमें कच्छ का रण (गुजरात) और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह जैसे इलाके शामिल हैं, जहां बड़े भूकंप की संभावना अधिक रहती है.

जोन IV उच्च जोखिम: इस क्षेत्र में भूकंप का खतरा काफी ज्यादा माना जाता है. इसमें दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तरी राजस्थान के कुछ हिस्से शामिल हैं.

जोन III मध्यम जोखिम: इस श्रेणी में ऐसे इलाके आते हैं जहां भूकंपीय गतिविधि का खतरा मध्यम स्तर का है. इसमें केरल, गोवा, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, झारखंड और दक्षिण भारत के कुछ हिस्से शामिल हैं.

जोन II कम जोखिम: यह अपेक्षाकृत कम भूकंपीय खतरे वाला क्षेत्र है. इसमें राजस्थान, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु के बाकी हिस्से शामिल हैं.

जोन I नगण्य जोखिम: यह भारत का सबसे कम भूकंप जोखिम वाला क्षेत्र माना जाता था. हालांकि, नए भूकंपीय वर्गीकरण में ज्यादातर ऐसे क्षेत्रों को अब ज़ोन II में शामिल कर दिया गया है.

पाकिस्तान भी भौगोलिक रूप से दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में शामिल है. यह भी वहीं है, जहां इंडियन प्लेट और यूरेशियन प्लेट एक-दूसरे से टकराती हैं. खासतौर पर बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा जैसे इलाके फॉल्ट लाइनों के करीब होने के कारण अक्सर भूकंपीय हलचल का सामना करते रहते हैं.

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Anant Narayan Shukla

लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.

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