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विश्व एड्स दिवस आज: एचआइवी के 22 सौ में पांच सौ मरीज टीबी के शिकार

धनबाद : धनबाद में हर साल लगभग 250 एचआइवी के नये मरीज मिल रहे हैं. सात वर्ष (वर्ष 2010 से 2017 ) की बात करें एचआइवी के मरीजों की संख्या 22 सौ के पार हो गयी है. शारीरिक प्रतिरोधक क्षमता को तेजी से घटाने वाली इस बीमारी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है […]

धनबाद : धनबाद में हर साल लगभग 250 एचआइवी के नये मरीज मिल रहे हैं. सात वर्ष (वर्ष 2010 से 2017 ) की बात करें एचआइवी के मरीजों की संख्या 22 सौ के पार हो गयी है. शारीरिक प्रतिरोधक क्षमता को तेजी से घटाने वाली इस बीमारी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इन 250 एचआइवी के नये मरीजों में लगभग 75 मरीज टीबी के शिकार हो रहे हैं. यह आंकड़े पीएमसीएच के एआरटी (एंटी रिट्रोवायरल थेरेपी) सेंटर के हैं. जानकारी के अभाव में एचआइवी पीड़ित टीबी से ग्रसित हो रहे हैं. उससे उनकी मौत भी हो जा रही है. सेंटर में गिरिडीह, बोकारो से भी मरीज आते हैं.
संजीवनी बनकर आया 99 डॉट्स प्लस : पीएमसीएच के एआरटी सेंटर में एड्स मरीजों की जांच की सुुविधा उपलब्ध है. इस वर्ष से एचआइवी के साथ टीबी से ग्रसित लोगों को लिए सरकार की ओर से 99 डॉट्स प्लस सेवा उपलब्ध करायी गयी है. दवा को टीबी प्रोफायलेक्सिस कहते हैं. यह दवा एक ओर टीबी की बैक्टेरिया को खत्म करता है, तो दूसरी ओर शारीरिक क्षमता को बढ़ाता है.

झरिया, इसरी व बालीडीह है एचआइवी हब
पिछले सात वर्षों एचआइवी मरीजों के मामले में झरिया कोयलांचल आगे रहा है. धनबाद का झरिया, गिरिडीह का इसरी व बोकारो का रेलवे स्टेशन बालीडीह में एचआइवी मरीज सबसे ज्यादा हैं. बताया जाता है कि यहां से युवकों का दूसरे राज्यों में काम के लिए पलायन सबसे ज्यादा है. फिर बाहर जाकर वह बीमारी को साथ ले आते हैं. नशे का भी कारोबार वहीं अधिक होता है. अलम यह है कि 60 प्रतिशत मरीज इसी इलाके से आते हैं.
इन लक्षणों से रहें सावधान
काफी दिनों से बुखार का बने रहना, जिसका कोई खास कारण पता नहीं चले
बिना किसी वजह के लगातार डायरिया का बने रहना
लागातार सूखी खांसी आना, मुंह में झाग बनना
मुंह में सफेद छाले जैसे निशान होना
बिना किसी वजह से थकान बने रहना व तेजी से वजन गिरना
याददाश्त में कमी व डिप्रेशन में चले जाना
लगातर दो सप्ताह से खांसी हो
एचआइवी मरीज की प्रतिरोधक क्षमता कम होने से टीबी हो जाती है, वहीं कई ऐसे टीबी के मरीज होते हैं, जो एचआइवी से ग्रसित होते हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में टीबी की दवा ही लेते रहते हैं. ऐसे में दोनों जांच जरूरी है.
डॉ ए एक्का, सीएस, धनबाद
Prabhat Khabar Digital Desk
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