Deoghar News : मन का भाव ही सबसे बड़ा तीर्थ: पंडित प्रदीप मिश्रा

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Deoghar News : मन का भाव ही सबसे बड़ा तीर्थ: पंडित प्रदीप मिश्रा

जसीडीह के कोठिया में चल रहे शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला. प्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा जी महाराज के भजनों और प्रवचन ने करीब दो लाख भक्तों को शिव-भाव में सराबोर कर दिया.

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संवाददाता, देवघर : जसीडीह के कोठिया में चल रहे शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला. प्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा जी महाराज के भजनों और प्रवचन ने करीब दो लाख भक्तों को शिव-भाव में सराबोर कर दिया. पूरा पंडाल ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गुंजायमान रहा. पंडाल में उपस्थित हर भक्त शिव-भाव में डूबता नजर आया. महाराज श्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि मन का भाव ही सबसे बड़ा तीर्थ है. भगवान शिव की आराधना के लिए कोई विशेष समय नहीं होता. जब चाहो, तब शिव का स्मरण करो, क्योंकि शिव सदैव हृदय में शांत रूप से विराजते हैं. उन्होंने कहा कि संसार के सभी प्राणी ईश्वर की ही सृष्टि हैं, लेकिन मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ है. कई जन्मों के पुण्य का फल है. इसका सदुपयोग करते हुए भगवान शिव की उपासना करनी चाहिए, तभी जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति संभव है. उन्होंने सोलह सोमवार व्रत, भगवान पशुपति नाथ की उपासना तथा माता सती के त्याग और राजा दक्ष की अवमानना का प्रसंग विस्तार से बताया.

प्रसन्नता ही भक्ति का आभूषण

स्नेह के उदाहरण पर बोलते हुए पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि संसार में मां अपने पुत्र की गलती को भी स्नेहवश स्वीकार नहीं करती, जबकि पुत्रवधु की छोटी गलती भी सास को अखर जाती है. यह केवल स्नेह का खेल है और आवश्यक है कि पुत्रवधु को भी बेटी समान ही सम्मान दिया जाये, क्योंकि वह भी किसी की बेटी है. महाराज श्री ने जीवन व्यवहार पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि चाहे कार्यालय हो या व्यापार, चेहरे पर प्रसन्नता रखें. किसी से मिलें यदि कुछ न दे सकें, तो कम से कम मुस्कुराता चेहरा अवश्य दें. उन्होंने कहा कि भजन, कथा-श्रवण, भोजन और मंदिर-दर्शन इन सभी में मन की पवित्रता और एकाग्रता आवश्यक है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि आज लोग चाहे जितने ब्रांडेड वस्त्र पहन लें, पर फोटो की सुंदरता चेहरे की प्रसन्नता से आती है. इसीलिए कैमरा भी अंतिम क्षण में कहता है स्माइल प्लीज. अंत में सभी भक्तों को संदेश देते हुए महाराज श्री ने कहा कि प्रसन्नता ही भक्ति का सबसे सुंदर आभूषण है. इसे जीवन के प्रत्येक क्षण में धारण करें. भक्तों ने महाराज के उपदेशों को श्रवण कर भाव-विभोर होते हुए जय-जयकार के साथ कथा का समापन किया.

नगर विकास, पर्यटन एवं खेल मंत्री पहुंचे कथा स्थल

कथा के दौरान राज्य के नगर विकास, पर्यटन एवं खेल मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू कथा स्थल पर पहुंचे. उन्होंने झारखंड सरकार की ओर से पं प्रदीप मिश्रा जी महाराज को बुके और अंग वस्त्र भेंट कर उनका अभिनंदन किया. उसके बाद महाराज जी ने भी मंत्री जी को अंगवस्त्र और व्यासपीठ पर अर्पित माल भेंट कर आशीर्वाद दिया. मौके पर मंत्री ने कथा में आये भक्तों काे सरकार की ओर से अभिनंदन किया तथा राज्य की समृद्धि के लिए महाराज जी से आशीर्वाद मांगा.

हाइलाइट्स

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