मधुपुर. शहर के भेड़वा नवाडीह स्थित स्थानीय राहुल अध्ययन केंद्र में प्रखर समाजवादी आचार्य नरेंद्र देव, लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती व इंदिरा गांधी की शहादत दिवस पर याद किया गया. उपस्थित लोगों ने विभूतियों की तस्वीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किये. वहीं, धनंजय प्रसाद ने कहा कि आचार्य नरेन्द्र देव हिन्दी में समाजवाद के प्रथम व्याख्याता थे. उन्होंने लोकतांत्रिक समाजवाद की बात करते हुए समाजवाद को राष्ट्रीयता और किसान आंदोलन से जोड़ा. उनके आदर्शों व सिद्धांतों में जनहित की भावना सर्वोपरि रही है. उन्होंने अतीत के अनुभव के आलोक में ही वर्तमान को देखा और इतिहास, राजनीति, समाजशास्त्र तथा साहित्य के विविध विषयों पर सधि हुई कलम चलाई. लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती को हम राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाते हैं. वे स्वतंत्र भारत के पहले गृहमंत्री, उपप्रधानमंत्री व भारत रत्न थे. वे भारत की एकता, अखंडता अटूट संकल्प के प्रतीक थे. वे राष्ट्र की स्वतंत्रता से लेकर बाद में सशक्त करने तक में अपने अदम्य साहस, संगठन कौशल व दूरदृष्टि के बल पर देश के 562 देशी रियासतों को एकसूत्र में पिरौने का काम किये. देश की प्रथम महिला प्रधानमंत्री, भारतरत्न व लौह नेत्री इंदिरा गांधी शक्ति, संकल्प व सशक्त नेतृत्व की मिसाल रही. उन्होंने बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया. राजाओं के प्रिवी पर्स समाप्ति किया. सिक्किम को भारतीय गणराज्य में शामिल किया. नया देश बांग्ला देश बनवाया. साथ ही विश्व स्तर घोर विरोध के बावजूद भारत का पहला परमाणु परीक्षण कराई. आज ही के दिन 31 अक्तूबर 1984 को उनकी शरीर में कई गोलियां दागीं गयी और वो 10 घंटों तक मौत की आंखों में आंखें डालकर लड़ती हुई वीरगति प्राप्त की. अन्य लोगों ने भी अपने विचार व्यक्त किया. हाइलार्ट्स : आचार्य नरेंद्र देव, सरदार पटेल की जयंती व इंदिरा गांधी की शहादत दिवस पर किया गया याद
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