Deoghar News : राम-सीता विवाह के साथ रिखियापीठ में शतचंडी महायज्ञ की पूर्णाहुति

Published by : Sanjeet Mandal Updated At : 25 Nov 2025 7:30 PM

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रिखियापीठ में पांच दिवसीय शतचंडी महायज्ञ की पूर्णाहुति मंगलवार को सीता कल्याण में श्रीराम- सीता की प्रतिमूर्ति के विवाह के साथ हो गयी. सुबह में स्वामी निरंजनानंद जी व स्वामी सत्संगी जी द्वारा रिखिया की सैकड़ों कन्याओं का फूल, धूप और शृंगार के साथ कन्या पूजन किया गया व कन्याओं को भोजन परोसा.

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संवाददाता, देवघर : रिखियापीठ में पांच दिवसीय शतचंडी महायज्ञ की पूर्णाहुति मंगलवार को सीता कल्याण में श्रीराम- सीता की प्रतिमूर्ति के विवाह के साथ हो गयी. सुबह में स्वामी निरंजनानंद जी व स्वामी सत्संगी जी द्वारा रिखिया की सैकड़ों कन्याओं का फूल, धूप और शृंगार के साथ कन्या पूजन किया गया व कन्याओं को भोजन परोसा. कन्याओं को पठन-पाठन सामग्री व शृंगार की सामग्री दी गयी. दोपहर में काशी के पंडितों द्वारा बसोधारा के माध्यम से यज्ञ की पूर्णाहुति की गयी. दोपहर में बैंड- बाजा और बारात के साथ श्रीराम -सीता की प्रतिपूर्ति का विवाह मंत्रोच्चारण के साथ किया गया. इस दौरान देश-विदेश से आये श्रद्धालु बाराती बनकर श्री राम और जानकी के विवाह का उत्सव मनाये. देश- विदेश के श्रद्धालुओं ने सीताराम की मनोहर जोड़ी दशरथ नंदन जनक दुलारी…, राम जी की निकली सवारी… आदि धुनों पर खूब थिरके. सच्चा प्रेम हमेशा सुखद परिणाम देता है: स्वामी सत्संगी जी यज्ञ के दौरान प्रवचन में स्वामी सत्संगी जी ने कहा कि रिखियापीठ में यह शतचंडी महायज्ञ 15 वर्षों तक स्वामी परमहंस स्वामी सत्यानंद जी की उपस्थिति में संपन्न हुआ है. यज्ञ से जीवन में आध्यात्मिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है. पूरा वातावरण सकारात्मक ऊर्जा से सराबोर हो जाता है और आत्मभाव जागृत होता है. कन्याओं का पूजन साक्षात् देवी की आराधना है. स्वामी सत्यानंद जी जब रिखिया पहुंचे थे, तो अचानक एक दिन सुबह में रिखिया की एक कन्या ने उनसे अंग्रेजी सीखने की मांग रख दी थी, जिसके बाद स्वामी सत्यानंद जी ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि अध्यात्म, योग, संस्कृत व उपनिषद की जगह पर अंग्रेजी सीखने की मांग आखिर यह बच्ची क्यों कर रही है. उनके जीवन में रोटी, कपड़ा, मकान व स्वास्थ्य प्राथमिकता है. जरूर वह भविष्य देख रही है, उसके बाद स्वामी सत्यानंद जी ने रिखिया की कन्याओं को अंग्रेजी सीखने के लिए विशेष तौर पर शिक्षक रखा. इसके अलावा उन्होंने रोटी, कपड़ा, पठन-पठान और स्वास्थ्य सुविधा की भी व्यवस्था करायी. आज रिखिया में काफी कुछ बदल चुका है. अब रिखिया की कन्या योग भी कर रही हैं. सच्चा प्रेम हमेशा अपने संकल्पों को पूरा करता है. स्वामी सत्यानंद जी ने यहां के कन्या, बटुकों और ग्रामीणों के साथ सच्चा प्रेम किया, जिस कारण से आज रिखिया का भविष्य उज्जवल हो गया है. स्वामी सत्यानंद जी का संकल्प साकार हो रहा है. स्वामी सत्यानंद जी ने अध्यात्म और सेवा का संदेश रिखिया से पूरी दुनिया में दिया है. अनुष्ठान में देश-विदेश के श्रद्धालु सेवा का संकल्प लेकर वापस लौटे. इस दौरान सैकड़ों ग्रामीणों को प्रसाद का भी वितरण किया गया. हाइलाइट्स सेवा का संकल्प लेकर लौटे देश-विदेश के श्रद्धालु

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